ईडी ने अल फलाह विश्वविद्यालय की संपत्तियां कुर्क कीं, आरोप-पत्र दाखिल किया
देवेंद्र माधव
- 16 Jan 2026, 10:20 PM
- Updated: 10:20 PM
नयी दिल्ली, 16 जनवरी (भाषा) प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार को कहा कि इसने हरियाणा स्थित अल फलाह विश्वविद्यालय की लगभग 140 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन और इमारत को शुक्रवार को कुर्क कर लिया।
इसने बताया कि ईडी ने अल फलाह समूह के अध्यक्ष जवाद अहमद सिद्दीकी और उनके ट्रस्ट के खिलाफ आरोप-पत्र दाखिल किया है।
अल फलाह विश्वविद्यालय राष्ट्रीय राजधानी में पिछले साल 10 नवंबर को लाल किले के निकट हुए कार बम विस्फोट के बाद केंद्रीय एजेंसियों की जांच के घेरे में है।
ईडी ने कहा कि धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत जारी एक अंतरिम आदेश के तहत फरीदाबाद के धौज क्षेत्र में स्थित विश्वविद्यालय की 54 एकड़ भूमि, विश्वविद्यालय की इमारतों, विभिन्न स्कूलों और विभागों से संबंधित इमारतों और छात्रावासों को कुर्क कर लिया गया है।
ईडी ने एक बयान में कहा कि इन संपत्तियों का मूल्य 139.97 करोड़ रुपये है।
‘पीटीआई’ ने इस सप्ताह की शुरुआत में सबसे पहले यह खबर दी थी कि ईडी अल फलाह ट्रस्ट के स्वामित्व वाली इन संपत्तियों को ‘‘अपराध से अर्जित आय’’ के रूप में वर्गीकृत करते हुए इन्हें कुर्क करने जा रही है।
सिद्दीकी को नवंबर में ईडी ने उनके ट्रस्ट द्वारा संचालित शिक्षण संस्थानों के छात्रों के साथ धोखाधड़ी से जुड़े धनशोधन के आरोपों में गिरफ्तार किया था।
एजेंसी ने दावा किया कि शिक्षण संस्थानों के पास शिक्षण के लिए आवश्यक वैध मान्यता नहीं थी।
ईडी ने कहा कि पीएमएलए की विशेष अदालत में सिद्दीकी और अल फलाह ट्रस्ट के खिलाफ भी आरोप-पत्र दायर किया गया है।
ईडी के अनुसार, ट्रस्ट ने सिद्दीकी के परिवार द्वारा नियंत्रित फर्मों को 110 करोड़ रुपये से अधिक की रकम भेजी।
वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में जेल में बंद है।
एजेंसी ने कहा कि जांच के दौरान जवाद अहमद सिद्दीकी की सक्रिय भूमिका पाई गई है।
इसने कहा, ‘‘उसने अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट, अल-फलाह विश्वविद्यालय (जिसमें अल-फलाह स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च सेंटर भी शामिल है) और संबंधित संस्थाओं पर अपना नियंत्रण कायम रखा और वह अवैध रूप से अर्जित धन का प्रमुख लाभार्थी पाया गया है।’’
अधिकारियों ने बताया कि दोनों को आरोपी बनाकर अदालत में पेश किया गया है और ईडी ने धनशोधन रोधी कानून के तहत उन पर मुकदमा चलाने का अनुरोध किया है।
‘अपराध से अर्जित’ धन संपत्तियों को नष्ट होने, बेचे जाने या लेन-देन में इस्तेमाल होने से रोकने के लिए पीएमएलए के तहत कुर्की की जाती है।
अधिकारियों ने बताया था कि अस्थायी कुर्की की कार्यवाही पूरी होने के बाद सरकार की ओर से नियुक्त ‘रिसीवर’ को अल फलाह विश्वविद्यालय परिसर का प्रशासन सौंपा जा सकता है, जिससे आपराधिक कार्रवाई और अभियोग जारी रहने के बावजूद छात्रों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी।
ईडी ने नवंबर 2025 में अदालत से सिद्दीकी की रिमांड का अनुरोध करते हुए कहा था कि विश्वविद्यालय और उसके संचालक ट्रस्ट ने सिद्दीकी के निर्देश पर मान्यता प्राप्त होने का झूठे दावा किया, ताकि ज्यादा से ज्यादा छात्र दाखिला लें और इस तरह उसने छात्रों तथा उनके अभिभावकों से “बेईमानी” से कम से कम 415.10 करोड़ रुपये की “अपराध की आय” अर्जित की।
अल फलाह विश्वविद्यालय उस “सफेदपोश” आतंकवादी मॉड्यूल के खिलाफ जांच के दौरान सुर्खियों में आया है, जिसके सिलसिले में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने तीन चिकित्सकों सहित कम से कम 10 लोगों को गिरफ्तार किया है।
अल फलाह मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर उमर उन नबी ने पिछले साल 10 नवंबर को दिल्ली में लाल किले के निकट विस्फोटकों से भरी कार में विस्फोट कर दिया था, जिससे 15 लोगों की मौत हो गई थी।
ईडी ने दिल्ली पुलिस की दो प्राथमिकी का संज्ञान लेते हुए सिद्दीकी और अल फलाह समूह के खिलाफ 14 नवंबर को धनशोधन रोधी कानून के तहत मामला दर्ज किया है।
सिद्दीकी के वकील ने उसकी गिरफ्तारी के बाद अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल को इस मामले में झूठा फंसाया गया है और दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज की गई दोनों प्राथमिकी ‘‘झूठी और मनगढ़ंत’’ हैं।
एजेंसी ने दावा किया कि उसने परिवार द्वारा नियंत्रित संस्थाओं के माध्यम से अवैध धन को कई स्तरों पर वितरित किया।
ईडी ने आरोप लगाया है कि अल-फलाह विश्वविद्यालय ने झूठा दावा किया कि वह विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय है।
भाषा
देवेंद्र