ऑपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं हुआ: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह
पृथ्वी बाकोलिया खारी
- 15 Jan 2026, 11:00 PM
- Updated: 11:00 PM
(तस्वीरों सहित)
जयपुर, 15 जनवरी (भाषा) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारतीय सेनाओं का ‘ऑपरेशन सिंदूर’ अभी खत्म नहीं हुआ है।
उन्होंने कहा कि जब तक आतंकी सोच खत्म नहीं होती तब तक शांति के लिए यह प्रयास लगातार जारी रहेगा।
सिंह ने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ भारत के इतिहास में साहस व संतुलन के प्रतीक के रूप में याद रखा जाएगा।
रक्षा मंत्री, भारतीय सेना दिवस के उपलक्ष्य में यहां एसएमएस स्टेडियम में आयोजित शौर्य संध्या को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा, “यह भी सच है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ अब पूरी तरह से समाप्त नहीं हुआ है क्योंकि जब तक आतंकी सोच खत्म नहीं होती तब तक शांति के लिए हमारा यह प्रयास लगातार चलता रहेगा। मैं राजस्थान की इस वीर धरती से इसकी घोषणा कर रहा हूं।”
रक्षा मंत्री ने कहा कि इस (ऑपरेशन सिंदूर) अभियान में भारत ने अपनी सैन्य ताकत ही नहीं दिखाई बल्कि अपने राष्ट्रीय स्वभाव का भी परिचय दिया है।
उन्होंने कहा, “आतंकियों के खिलाफ की गई कार्रवाई पूरी तरह से सोच समझ कर और मानवीय मूल्यों को ध्यान में रखकर की गई। इसी कारण ‘ऑपरेशन सिंदूर’ भारत के इतिहास में सिर्फ सैन्य कार्रवाई के रूप में नहीं बल्कि साहस व संतुलन के प्रतीक के रूप में याद रखा जाएगा।”
सिंह ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान अदम्य साहस व शौर्य का परिचय देने के लिए सेना के जवानों को बधाई दी। राजनाथ सिंह ने इस बात पर बल दिया कि आतंकवादी कभी सोच भी नहीं सकते थे कि भारतीय सशस्त्र बल उनके खिलाफ इतनी बहादुरी और तेजी से कार्रवाई करेंगे।
उन्होंने कहा, ‘‘हालात मुश्किल थे और दबाव भी था लेकिन हमारे सैनिकों ने जिस संयम, एकता और धैर्य के साथ ऑपरेशन को अंजाम दिया वह अभूतपूर्व और तारीफ के काबिल है।’’
सिंह ने कहा कि भारतीय सैनिक सिर्फ योद्धा नहीं होता बल्कि एक दार्शनिक व कुशल प्रबंधक होता है क्योंकि सैनिक का जीवन ‘सेवा परमो धर्म’ पर आधारित है।
उन्होंने कहा, ‘‘भारतीय सेना अपने आप में देश के लिए, नागरिकों के लिए, हमारे युवाओं के लिए कई मायनों में विशाल है। कोई भी जब भारतीय सेना को देखता है तो हमें पूरा भारत दिखाई देता है। भारतीय सेना अपने आप में विविधता में एकता का सजीव उदाहरण है।’’
रक्षा मंत्री ने कहा, ‘‘सेना ने भारत की सामाजिक एकता को मजबूत करने में अतुल्य योगदान दिया है। यही कारण है कि भारतीय सेना एक सैन्य बल नहीं है यह राष्ट्र निर्माण का एक प्रमुख स्तम्भ है।’’
सिंह ने कहा, ‘‘दूसरे देशों में आम तौर पर सेना का नागरिकों के साथ बहुत ज्यादा वास्ता नहीं है जबकि भारत में सेना नागरिकों के साथ मिलकर काम करती है। जनता, सेना पर अटूट विश्वास करती है। मैं मानता हूं कि यह विश्वास ही सेना की सबसे बड़ी ताकत है।’’
उन्होंने कहा कि जनता व सेना के बीच पारस्परिक विश्वास का बंधन ही हमारे राष्ट्रीय सुरक्षा के ढांचे की नींव है।
सिंह ने सुधारों के लिए भारतीय सेना द्वारा उठाये गए कदमों की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना ने दिखाया कि संगठन बड़ा होने के बावजूद भी अगर इच्छा शक्ति है तो सुधारों को तेजी से लागू करने में कोई समस्या नहीं आती है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि हम 2047 तक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय सेना को दुनिया की सबसे सशक्त सेना बनाने की ओर बढ़ रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘हम ऐसे दौर से गुजर रहे हैं जहा स्थापित धारणाएं टूट रही हैं या तोड़ी जा रही हैं। दुनिया अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है। ऐसे में ये बात स्पष्ट है कि सेनाओं का मजबूत रहना और सेनाओं का आधुनिक और आत्मनिर्भर रहना किसी भी देश के अस्तित्व के लिए आज जितना महत्वपूर्ण हो चुका है उतना पहले कभी नहीं रहा।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ऐसी स्थिति में सेनाओं का मजबूत रहना सर्वोपरि है। हमारी सेनाएं हमारी प्राथमिक ताकत है।’’
रक्षा मंत्री ने कहा कि अभियान के दौरान स्वदेशी हथियारों के इस्तेमाल ने इस बात पर बल दिया कि आत्मनिर्भरता सिर्फ गर्व की बात नहीं बल्कि जरूरत है।
उन्होंने कहा, ‘‘देश आत्मनिर्भरता के रास्ते पर काफी आगे बढ़ गया है, जिसमें सशस्त्र बलों ने आगे बढ़कर इस कोशिश में अहम योगदान दिया है।’’
सिंह ने आने वाले समय में आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य हासिल करने के लिए इन कोशिशों को और तेज करने पर जोर दिया।
उन्होंने युद्ध के आयामों के विस्तार को देखते हुए ‘इंटर-सर्विस लिंकेज’ को बढ़ाने के महत्व पर भी जोर दिया।
सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार सशस्त्र बलों को भारत की जरूरतों के हिसाब से स्वदेशी अत्याधुनिक हथियारों और मंच से लैस कर रही है।
उन्होंने बताया कि घरेलू रक्षा उत्पादन 2014 में सिर्फ 46,000 करोड़ रुपये था जो बढ़कर रिकॉर्ड 1.51 लाख करोड़ रुपये हो गया है।
उन्होंने कहा कि रक्षा निर्यात 2014 में 1,000 करोड़ रुपये से कम था जो बढ़कर रिकॉर्ड लगभग 24,000 करोड़ रुपये हो गया है।
रक्षा मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में भारतीय सैनिकों के योगदान पर भी प्रकाश डाला।
सिंह ने कहा कि सरकार पूर्व सैनिकों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है।
सशस्त्र बलों में महिलाओं की बढ़ती भूमिका पर, उन्होंने कहा कि पहले महिलाओं को सशस्त्र बलों में सहायक भूमिकाओं में भर्ती किया जाता था, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने उनकी भूमिका का विस्तार करने की कल्पना की।
उन्होंने कहा, “अब, सेना में महिलाओं को स्थायी कमीशन दिया जा रहा है, जबकि नेशनल डिफेंस एकेडमी ने भी महिलाओं के लिए अपने दरवाजे खोल दिए हैं। हमारा प्रयास है कि सशस्त्र बलों में महिलाओं को उनके पुरुष समकक्षों के बराबर लगातार समान अवसर प्रदान किए जाएं।’’
राजनाथ सिंह की जयपुर यात्रा में जयपुर मिलिट्री स्टेशन पर सैनिकों के साथ संवाद भी किया।
शौर्य संध्या कार्यक्रम में भारतीय सेना के साहस, बलिदान और पेशेवर उत्कृष्टता को प्रस्तुत किया गया। इस दौरान अन्य कार्यक्रमों के अलावा मार्शल आर्ट और कलारीपयट्टू और मल्लखंभ जैसे पारंपरिक खेलों के माध्यम से सेना की शारीरिक क्षमता, अनुशासन और समृद्ध मार्शल विरासत को प्रदर्शित किया।
नेपाल आर्मी के बैंड ने रोमांचक ब्रास बैंड प्रदर्शन से दर्शकों का मन मोह लिया। रक्षा मंत्री ने बैंड को सम्मानित भी किया। 'ऑपरेशन सिंदूर' पर लाइट और साउंड शो हुआ। ‘ड्रोन डिस्प्ले’ ने दर्शकों मंत्रमुग्ध कर दिया।
इस कार्यक्रम में राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे, मिजोरम के राज्यपाल जनरल वीके सिंह, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा, प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल अनिल चौहान, सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी और प्रेम चंद बैरवा, सेना की दक्षिण पश्चिम कमान के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल मनजिंदर सिंह भी मौजूद थे।
भाषा पृथ्वी बाकोलिया