भविष्य के लिए तैयार बल के रूप में आगे बढ़ रही है भारत की सेना: जनरल द्विवेदी
पृथ्वी मनीषा
- 15 Jan 2026, 03:17 PM
- Updated: 03:17 PM
(तस्वीरों सहित)
जयपुर, 15 जनवरी (भाषा) सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारतीय सेना 'भविष्य के लिए तैयार बल' के रूप में आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि सेना केवल वर्तमान चुनौतियों पर ही नहीं बल्कि भविष्य के युद्धों की तैयारी पर भी गंभीरता से काम कर रही है।
यहां सेना दिवस परेड के अवसर पर संवाददाताओं से बातचीत में उन्होंने कहा, "भारतीय सेना एक 'फ्यूचर रेडी फोर्स' के रूप में आगे बढ़ रही है जहां अच्छी तरह से प्रशिक्षित सैनिक, आधुनिक प्रणालियां और मल्टी-डोमेन ऑपरेशन्स की क्षमता मौजूद हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘प्रौद्योगिकी का उपयोग सैनिकों को 'रिप्लेस' करने के लिए नहीं बल्कि उन्हें और सक्षम बनाने के लिए किया जा रहा है।’’
उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी से दक्षता बढ़ती है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि यह 'मानव बल' की जगह ले लेगी। जनरल द्विवेदी ने कहा कि छोटी टुकड़ियां ज्यादा सफल होती हैं क्योंकि इनमें गति और फुर्ती होती है।
उन्होंने कहा, “भैरव बटालियन को घातक और विशेष बलों के बीच की कमी को पूरा करने के लिए बनाया गया है। नए आर्गेनाइजेशन बनाए गए हैं। और भी बदलाव आएंगे।’’ उन्होंने कहा कि रणक्षेत्र तेजी से बदल रहे हैं और तालमेल बनाए रखने के लिए तेज चलना पड़ेगा।
सेना प्रमुख ने कहा, ‘‘ऑपरेशन सिंदूर ने एक नया मानक स्थापित किया है। इस ऑपरेशन ने भारतीय सेना की तेज प्रतिक्रिया, बेहतर समन्वय और सटीक कार्रवाई की क्षमता को दर्शाया है। यह एक परिपक्व, आत्मविश्वासी और जिम्मेदार बल की तस्वीर प्रस्तुत करता है जो राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह सक्षम है।’’
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ सालों में भारतीय सेना की सोच में साफ बदलाव आया है। उन्होंने कहा, "आज हम वर्तमान की चुनौतियों की ही नहीं, बल्कि भविष्य के युद्धों की तैयारी पर भी गंभीरता से काम कर रहे हैं। इसी दिशा में नयी 'सरंचनाएं' बनाई जा रही हैं जिन्हें भविष्य की जरूरत के हिसाब लैस और प्रशिक्षित किया जा रहा है।’’
सेना प्रमुख ने कहा कि इसी परिवर्तन प्रक्रिया के अंतर्गत सेना में भैरव बटालियन, अश्नी प्लाटून, शक्ति बाण और दिव्यास्त्र बैटरीज जैसी नई इकाइयां खड़ी की गई हैं। उन्होंने कहा, "ये संरचनाएं भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप एक चुस्त, जवाबदेह और मिशन-केंद्रित सेना के निर्माण को दर्शाती है।"
उन्होंने कहा कि हमारे इस परिवर्तन की आधारशिला आत्मनिर्भरता है जिसकी झलक आज परेड के दौरान "मेड इन इंडिया" उपकरणों के प्रदर्शन से देखने को मिली। उन्होंने कहा, "भारतीय सेना को भविष्य में भी ऐसी हथियार प्रणाली और उपकरण चाहिए जो भारत में ही डिज़ाइन और विकसित किए गए हों। स्वदेशीकरण केवल लक्ष्य नहीं है बल्कि एक रणनीतिक आवशयकता बन चुकी है।’’
जनरल द्विवेदी ने कहा कि आज की परेड में परंपरा और परिवर्तन का खूबसूरत संगम देखने को मिला। उन्होंने कहा, "परेड में शामिल नेपाल आर्मी बेंड ने हमारे प्रगाढ़ सम्बन्धों को दर्शाया जबकि नयी इकाइयों ने सेना की उभरती शक्ति को प्रदर्शित किया।"
उन्होंने कहा, "भारतीय सेना हर समय पूरे तरीके से तैयार है किसी भी स्थिति से निपटने के लिए। हमारी भविष्य की लड़ाइयों के लिए तैयारी पूरी है। यह परेड में हमने दिखाया। ऐसी तैयारी आने वाले दिनों में बढ़ती रहेगी।’’
सेना प्रमुख ने कहा, ‘‘भारतीय सेना समय के साथ अपने आप को बदलती रहेगी और जो बदलाव लाने हैं वह लाती रहेगी।’’
जनरल द्विवेदी ने कहा कि ऐसे संसाधनों पर विशेष जोर दिया जा रहा है जो सैन्य और नागरिक दोनों उद्देश्यों के लिए उपयोगी हों, जिससे देश के समग्र विकास में योगदान मिले।
जयपुर में सेना दिवस परेड आयोजित करने के बारे में उन्होंने कहा कि राजस्थान वह वीर भूमि है जहां कई नायकों ने इतिहास रचा है और इसलिए इस भूमि को सेना दिवस परेड के लिए चुना गया।
उन्होंने कहा, “हम भविष्य के बारे में अनुमान नहीं लगा सकते इसलिए बदलती परिस्थितियों के हिसाब से ढलना जरूरी है। आज का युद्ध... चार दिन चलेगा या चार साल, यह तो युद्ध के मैदान में ही पता चलेगा।”
सेना प्रमुख ने देश में अनुसंधान व विकास पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि आपको लम्बी लड़ाई लड़नी है तो साजो सामान देश में ही बनना चाहिए... उसकी मरम्मत भी देश में होनी चाहिए।
उन्होंने कहा, “अनुसंधान और विकास बहुत जरूरी हैं। जब तक भारत अनुसंधान पर ध्यान नहीं देगा और प्रौद्योगिकी लाकर केवल यहां बनाता रहेगा तब तक हम लंबी लड़ाई लड़ने में सक्षम नहीं होंगे और पूर्ण रूपेण आत्मनिर्भरता हासिल नहीं कर सकते। इसलिए अनुसंधान जरूरी है।'
भाषा पृथ्वी