कर्नाटक मनरेगा पर चर्चा के लिए 22 से 31 जनवरी तक विधानमंडल का संयुक्त सत्र आयोजित करेगा
आशीष पवनेश
- 14 Jan 2026, 10:12 PM
- Updated: 10:12 PM
बेंगलुरु, 14 जनवरी (भाषा) कर्नाटक मंत्रिमंडल ने राज्य विधानमंडल का संयुक्त सत्र 22 से 31 जनवरी तक आयोजित करने का बुधवार को फैसला किया, जिसमें मुख्यत: केंद्र द्वारा मनरेगा को निरस्त किए जाने के संबंध में चर्चा की जाएगी।
राज्य के कानून और संसदीय मामलों के मंत्री एच के पाटिल ने बताया कि कांग्रेस नीत सरकार ने शुरू में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को रद्द करने पर चर्चा के लिए दो दिवसीय विशेष सत्र आयोजित करने की योजना बनाई थी लेकिन संविधानिक आवश्यकताओं के कारण प्रारूप बदल दिया गया है।
मनरेगा के स्थान पर विकसित भारत-गारंटी रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी वीबी-जी राम जी कानून लाया गया है।
पत्रकारों से बातचीत में पाटिल ने कहा कि तकनीकी कारणों से सरकार विशेष सत्र के बजाय संयुक्त सत्र बुला रही है। पाटिल ने कहा, ‘‘कर्नाटक विधानमंडल का संयुक्त सत्र 22 जनवरी से 31 जनवरी तक आयोजित किया जाएगा। अवकाश विधानसभाध्यक्ष द्वारा घोषित किए जाएंगे।’’
अनुच्छेद 176 का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि संविधान में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है और यह अनिवार्य है कि चुनाव के बाद या हर साल के पहले सत्र के पहले दिन राज्यपाल का संबोधन होना चाहिए। मंत्री ने कहा, “...विशेष सत्र के बजाय यह संयुक्त सत्र होगा जब तक कि आगे कोई सत्र न बुलाया जाए।”
पाटिल ने कहा, “संघीय प्रणाली में यदि हमारे राज्य के लोगों के अधिकार छीने जाते हैं, तो सरकार चुप नहीं बैठ सकती। इसलिए जागरूकता फैलाने और मनरेगा को बहाल करने के लिए हम केंद्र पर उचित दबाव डालने का प्रयास करेंगे।”
कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर अशोक ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार "दुर्भावनापूर्ण इरादे" से संयुक्त सत्र आयोजित कर रही है और इसे "धन की सरासर बर्बादी" बताया।
उन्होंने संवाददाता सम्मेलन में कहा, “सत्र हमेशा कानून बनाने, कानून व्यवस्था पर चर्चा करने के लिए आयोजित होता है, लेकिन यह सत्र किसलिए आहूत किया जा रहा? क्या सदन में निरर्थक बातें करने के लिए? इस सत्र का कोई फायदा नहीं है।”
भाजपा नेता ने कहा कि विधानसभा में पारित प्रस्ताव का कोई महत्व नहीं है, इसलिए इसे कूड़ेदान में ही फेंक दिया जाएगा।’’
अशोक ने कहा, ‘‘नशीले पदार्थों के माफिया, कोगिलु क्रॉस पर अवैध कब्जेदार, कासरगोड में कन्नड़ भाषा का अपमान और इसी तरह के मुद्दों पर चर्चा के लिए एक विशेष सत्र होना चाहिए। यदि विकसित भारत संकल्प योजना के संबंध में कोई आपत्ति है, तो उन्हें केंद्र सरकार से संपर्क करके इस पर चर्चा करनी चाहिए।’’
भाषा आशीष