रेलवे ने सीआईसी से कहा, किराया गणना विधि 'व्यापारिक रहस्य' ; आरटीआई अपील खारिज
सुभाष पवनेश
- 13 Jan 2026, 05:36 PM
- Updated: 05:36 PM
नयी दिल्ली, 12 जनवरी (भाषा) भारतीय रेलवे ने केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) को बताया है कि यात्री ट्रेन के किराये की गणना करने की उसकी पद्धति ‘‘व्यापारिक रहस्य’’ और व्यावसायिक गोपनीयता है, इसलिए इसे सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत सार्वजनिक नहीं किया जा सकता।
सीआईसी द्वारा एक आरटीआई अपील खारिज किये जाने के दौरान यह बात सामने आई। आरटीआई अर्जी के जरिये ट्रेन टिकटों और एक विशिष्ट सेवा, पश्चिम सुपरफास्ट एक्सप्रेस के लिए मांग आधारित किराया निर्धारण और तत्काल बुकिंग के प्रभाव सहित आधार किराया (बेस फेयर) गणना प्रणाली पर विस्तृत जानकारी मांगी गई थी।
‘पीटीआई’ द्वारा हासिल जवाब में, रेलवे बोर्ड ने कहा कि किराया श्रेणी-आधारित है और विभिन्न श्रेणियों में प्रदान की जाने वाली सुविधाओं के कारण इसमें अंतर आता है।
हालांकि, इसने यह तर्क दिया कि ‘‘विभिन्न श्रेणियों के किराया निर्धारण के वर्गीकरण और पद्धति के संबंध में, नीति व्यापार रहस्य/बौद्धिक संपदा अधिकारों के दायरे में आता है’’ और आरटीआई अधिनियम की धारा 8 के तहत इसे सार्वजनिक किये जाने से छूट प्राप्त है।
सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 8 में उन सूचनाओं के लिए छूट का प्रावधान है जिन्हें सार्वजनिक करना अनिवार्य नहीं है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा, व्यापार रहस्य और व्यक्तिगत गोपनीयता जैसी संवेदनशील जानकारी की रक्षा करती हैं।
रेलवे अधिकारियों ने किराया निर्धारण पद्धति के गैर-खुलासे को बरकरार रखने संबंधी सीआईसी के पूर्व के आदेशों का भी हवाला दिया। साथ ही, यह तर्क दिया कि भारतीय रेलवे एक वाणिज्यिक उपयोगिता के रूप में कार्य करता है तथा राष्ट्रीय हित में सामाजिक दायित्वों का निर्वहन भी करता है।
रेलवे बोर्ड के मुख्य जन सूचना अधिकारी (सीपीआईओ) ने कहा कि विस्तृत मूल्य निर्धारण प्रणाली का खुलासा जनहित में उचित नहीं है।
उन्होंने कहा, ‘‘मूल्य निर्धारण संबंधी जानकारी का खुलासा जनहित में उचित नहीं है, क्योंकि यदि कोई लाभ होता भी है, तो वह आम आदमी को वितरित/हस्तांतरित कर दिया जाता है, न कि निजी उद्यम की तरह व्यक्तिगत लाभ के लिए रखा जाता है।’’
आयोग ने उल्लेख किया कि जन सूचना अधिकारी ने पहले ही सभी सार्वजनिक करने योग्य जानकारी और रेलवे रेटिंग नीतियों के सामान्य सिद्धांत मुहैया कर दिए थे और उपलब्ध अभिलेखों से परे डेटा तैयार करने या उसकी व्याख्या करने की आवश्यकता नहीं है।
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