विदेशी बाजारों में भारी गिरावट से तेल-तिलहन के दाम धराशायी
राजेश राजेश अजय
- 14 May 2024, 08:03 PM
- Updated: 08:03 PM
नयी दिल्ली, 14 मई (भाषा) विदेशी बाजारों में गिरावट के रुख के बीच देश के बाजारों में मंगलवार को लगभग सभी तेल-तिलहन के दाम गिरावट के साथ बंद हुए।
बाजार सूत्रों ने कहा कि विदेशी बाजारों में नरमी के रुख के बीच सरसों, सोयाबीन एवं मूंगफली तेल-तिलहन, कच्चा पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन तथा बिनौला तेल के दाम हानि के साथ बंद हुए।
सूत्रों ने कहा कि शिकॉगो एक्सचेंज कल रात लगभग दो प्रतिशत टूटा था और फिलहाल यहां 3-4 प्रतिशत की गिरावट है। दूसरी ओर मलेशिया एक्सचेंज में भी गिरावट चल रही है।
सूत्रों ने कहा कि विदेशों में सोयाबीन तिलहन, तेल और डी-आयल्ड केक (डीओसी) के दाम में गिरावट है। इस गिरावट का असर देश के सभी तेल-तिलहन के भाव में देखा जा रहा है।
सूत्रों ने कहा कि इस बार कपास बुवाई का रकबा भी घटा है। परामर्शदाताओं ने किसानों से 20 अप्रैल से 20 मई के बीच कपास बुवाई की सलाह दी थी। कपास की इस मौसम में राजस्थान के गंगानगर में खेती होती है और वहां बुवाई में गिरावट की सूचना है। उन्होंने कहा कि ऐसी सूचना है कि किसानों ने कपास की लगह मूंग का रुख किया है।
उन्होंने कहा कि कपास से ही बिनौला निकलता है जिससे खाद्य तेल तो कम मिलता है पर इससे सबसे अधिक मवेशी आहार में उपयोग आने वाले खल की प्राप्ति होती है। पशु आहार में 80-90 प्रतिशत बिनौले खल का उपयोग किया जाता है। जिस तरह से बिजाई के ऐन मौके पर वायदा कारोबार में बिनौले खल का दाम नीचे चलाया जा रहा है और इसकी खेती के रकबे में गिरावट की सूचना मिल रही है तो किसी को इस बात की ओर ध्यान देना होगा कि मवेशी आहार के लिए खल का इंतजाम कैसे होगा? मुर्गीदाने में उपयोग आने वाले डीओसी का तो आयात भी किया जा सकता है लेकिन खल का आयात भी नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा कि देश में मवेशी आहार के लिए खल की मांग अनुमानत: 125-130 लाख टन वार्षिक की है। उन्होंने कहा कि क्या नकली खल से इस मांग को पूरा किया जा सकता है ? नकली बिनौले खल पर कड़ी रोक ही कपास और बिनौला खल उत्पादन को सुनिश्चित कर सकती है।
उन्होंने कहा कि बाकी तिलहनों की तरह बिनौले खल के वायदा कारोबार को प्रतिबंधित करने की जरूरत है जो कपास उत्पादन और बिनौला खल उत्पादन बढ़ाने में मददगार होगा।
तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:
सरसों तिलहन - 5,575-5,625 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली - 6,125-6,400 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 14,800 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली रिफाइंड तेल 2,240-2,540 रुपये प्रति टिन।
सरसों तेल दादरी- 10,500 रुपये प्रति क्विंटल।
सरसों पक्की घानी- 1,790-1,890 रुपये प्रति टिन।
सरसों कच्ची घानी- 1,790-1,805 रुपये प्रति टिन।
तिल तेल मिल डिलिवरी - 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 9,950 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 9,750 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 8,310 रुपये प्रति क्विंटल।
सीपीओ एक्स-कांडला- 8,775 रुपये प्रति क्विंटल।
बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 9,800 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 9,875 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन एक्स- कांडला- 9,000 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।
सोयाबीन दाना - 4,860-4,880 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन लूज- 4,660-4,700 रुपये प्रति क्विंटल।
मक्का खल (सरिस्का)- 4,075 रुपये प्रति क्विंटल।
भाषा राजेश राजेश