सीबीआई एमएमटीसी कोयला आयात ‘घोटाले’ की जांच कर रही जांच
आशीष पवनेश
- 14 May 2024, 07:51 PM
- Updated: 07:51 PM
(अभिषेक शुक्ला)
नयी दिल्ली, 14 मई (भाषा) केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (पीएसयू) एमएमटीसी के ऑस्ट्रेलिया की एक कंपनी से बढ़ी हुई कीमतों पर कोयला आयात में कथित भ्रष्टाचार की जांच कर रही है, जिसे पीएसयू के पूर्व मुख्य प्रबंध निदेशक (सीएमडी) ने 11 साल से अधिक समय तक दबाए रखा था। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
जांच तब शुरू हुई जब एमएमटीसी को उच्चतम न्यायालय में झटका लगा, जिसने ऑस्ट्रेलियाई कंपनी के पक्ष में मध्यस्थता मामला चलाने का आदेश दिया। एमएमटीसी को दिल्ली उच्च न्यायालय में 1,088 करोड़ रुपये जमा कराने थे।
एमएमटीसी ने इन आरोपों की आंतरिक सतर्कता जांच का आदेश दिया कि पीएसयू के कुछ अधिकारियों ने ब्रिस्बेन स्थित कंपनी को 300 अमेरिकी डॉलर प्रति मीट्रिक टन (लगभग 615 करोड़ रुपये मूल्य) वसूलने की अनुमति देकर आर्थिक लाभ अर्जित किया, जब 2008 में लेहमन ब्रदर्स के दिवालिया होने के बाद विश्व स्तर पर कोयले समेत अन्य वस्तुओं की कीमतें गिर गई थीं।
सतर्कता रिपोर्ट में उजागर की गई गंभीर अनियमितताएं एमएमटीसी के शीर्ष अधिकारियों के लिए सीबीआई जांच की सिफारिश करने के लिए पर्याप्त थीं। वाणिज्य मंत्रालय के संदर्भ पर सीबीआई ने पिछले साल प्रारंभिक जांच दर्ज की थी जिसमें दो पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका संदेह के घेरे में है।
एजेंसी ने घटनाक्रम पर कोई टिप्पणी नहीं दी।
सीबीआई को अपनी शिकायत में, एमएमटीसी ने आरोप लगाया कि उसने सात मार्च, 2007 को ब्रिस्बेन स्थित एंग्लो अमेरिकन मेटलर्जिकल कोल प्राइवेट लिमिटेड के साथ कोयला आपूर्ति के लिए एक दीर्घकालिक समझौता किया था। यह समझौता एक-एक वर्ष की तीन अवधि के लिए था। यह समझौता इस आधार पर हुआ था जहां आपूर्ति के लिए खरीदार वस्तु भेजे जाने के बाद सभी जोखिम उठाता है।
आपूर्ति की अवधि एक जुलाई 2004 से 30 जून 2005, एक जुलाई 2005 से 30 जून 2006 और एक जुलाई 2006 से 30 जून 2007 तक थी। इन्हें दो अतिरिक्त आपूर्ति अवधि तक बढ़ाया जा सकता था।
समझौते की शर्तों के अनुसार, एमएमटीसी कंपनी के साथ नए दीर्घकालिक समझौते को आगे बढ़ाने या बातचीत करने के लिए सहमत हो सकती थी। पीएसयू ने बिना किसी विवाद के पहली विस्तारित आपूर्ति अवधि का लाभ उठाया, जिसमें कोयले की कीमत 96 अमेरिकी डॉलर प्रति मीट्रिक टन रखी गई थी।
अधिकारियों ने कहा कि दूसरी विस्तारित आपूर्ति अवधि कथित तौर पर ‘‘एमएमटीसी अधिकारियों और एंग्लो अमेरिकन मेटलर्जिकल कोल प्राइवेट लिमिटेड की मिलीभगत’’ से तय की गई थी, जब पीएसयू अधिकारी 300 अमेरिकी डॉलर प्रति मीट्रिक टन की कीमत पर सहमत हुए थे, जबकि पिछले वर्ष यह 96 अमेरिकी डॉलर प्रति मीट्रिक टन थी।
सूत्रों ने कहा कि आपूर्ति अवधि के लिए समझौते को बढ़ाने को लेकर संबंधित आपूर्ति अवधि शुरू होने से पहले आपसी चर्चा के माध्यम से कीमतों पर बातचीत की जानी थी। यदि कीमतें एमएमटीसी के अनुकूल नहीं होतीं, तो वह एक नया दीर्घकालिक समझौता कर सकती थी, जिससे सभी कोयला आपूर्तिकर्ता प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम होते और इसके परिणामस्वरूप प्रतिस्पर्धी मूल्य प्राप्त होता।
एमएमटीसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नोट शीट पर यह भी दर्ज किया था कि मार्च 2009 तक, एमएमटीसी को 2008-09 के लिए कोयले की 300 अमेरिकी डॉलर प्रति मीट्रिक टन (एफओबी) कीमत को अंतिम रूप देने से बचने और स्थगित करने का प्रयास करना चाहिए। ऐसा इसलिए आगाह किया गया था क्योंकि राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड (आरआईएनएल)-एमएमटीसी के ग्राहकों के पास मार्च 2009 तक उनकी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त स्टॉक था।
भाषा आशीष