केरल : मुख्यमंत्री विजयन के नेतृत्व में केंद्र के खिलाफ 'सत्याग्रह'
रवि कांत रवि कांत नेत्रपाल
- 12 Jan 2026, 05:59 PM
- Updated: 05:59 PM
(फोटो के साथ)
तिरुवनंतपुरम, 12 जनवरी (भाषा) केरल के मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर राज्य के साथ ‘‘वित्तीय भेदभाव’’ करने का आरोप लगाते हुए सोमवार को कहा कि अनुदान और उधार लेने की सीमा में मनमानी कटौती का उद्देश्य राज्य का ‘‘आर्थिक रूप से गला घोंटने’’ के समान है।
विजयन ने दावा किया कि केंद्र सरकार केरल के संवैधानिक रूप से प्रदत्त अधिकारों को ‘‘छीनने’’ की कोशिश कर रही है, जो एक लोकतांत्रिक देश में स्वीकार्य नहीं है।
विजयन ने सोमवार को यहां केंद्र सरकार के खिलाफ ‘सत्याग्रह’ का नेतृत्व किया और कहा कि केरल के साथ ‘‘राजनीतिक प्रतिशोध’’ के चलते भेदभाव किया जा रहा है तथा राज्य को उसके उचित वित्तीय आवंटन से वंचित किया जा रहा है।
उन्होंने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य को अपने संवैधानिक रूप से प्रदत्त अधिकारों की रक्षा के लिए एक ‘‘असाधारण संघर्ष’’ करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
विजयन ने सभी से एकजुट होकर यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि केरल को उसका उचित हिस्सा मिले।
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘हमारा राज्य संघर्ष के एक दौर से गुजर रहा है। यह संघर्ष इस भूमि और यहां के लोगों के अस्तित्व के लिए है। केंद्र में बैठे शासक यह मानते हुए कि समस्त सत्ता उन्हीं के हाथों में है, मनमाने ढंग से हमारे अधिकारों का हनन कर रहे हैं।’’
विजयन ने कहा, ‘‘मौजूदा परिस्थिति ने हमें इन अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करने पर विवश कर दिया है। यह एक असाधारण और गंभीर परिस्थिति है।’’
वरिष्ठ वामपंथी नेता ने केंद्र पर केरल की प्रगति को रोकने के लिए ‘‘जानबूझकर बाधाएं पैदा करने’’ का आरोप लगाते हुए कहा कि उसने हाल ही में चालू वित्त वर्ष के अंतिम तीन महीनों के लिए राज्य को देय धनराशि में से आधे से अधिक की कटौती की है।
विजयन के अनुसार, जनवरी-मार्च की अवधि के दौरान केरल 12,000 करोड़ रुपये प्राप्त करने का हकदार था, लेकिन बिना किसी औचित्य के उसे 5,900 करोड़ रुपये की राशि से इनकार कर दिया गया।
उन्होंने कहा कि इन कटौतियों ने राज्य की व्यय प्रतिबद्धताओं को पूरा करने की क्षमता को बुरी तरह प्रभावित किया है।
विजयन ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार वित्तीय नियंत्रणों को सख्त करके तथा धनराशि रोककर स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में केरल की उपलब्धियों को कमजोर करने का प्रयास कर रही है जिनमें प्रधानमंत्री के नाम पर घोषित केंद्र प्रायोजित योजनाएं भी शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा आवंटित धनराशि में कमी के बावजूद राज्य ने कल्याणकारी योजनाओं, बुनियादी ढांचे के विकास, औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन पर खर्च करना जारी रखा है।
विजयन ने आरोप लगाया कि केंद्र प्रायोजित योजनाओं का इस्तेमाल राजनीतिक प्रचार के औजार के रूप में किया जा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार पर ब्रांडिंग और संबंधित मुद्दों के बहाने राज्य को मिलने वाली सहायता रोकने का आरोप लगाया।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की हालिया टिप्पणी का हवाला देते हुए विजयन ने कहा कि करों का हस्तांतरण राज्यों का संवैधानिक अधिकार है, न कि उदारता का मामला।
शाह ने हाल में एक बयान में कहा था कि मोदी सरकार के तहत केरल को अधिक धनराशि प्राप्त हुई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र ने वित्त आयोग के कामकाज में हस्तक्षेप किया है और नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) बी वी आर सुब्रह्मण्यम के कथित बयानों का हवाला देते हुए दावा किया कि राज्यों के कर हिस्से को कम करने के लिए दबाव डाला गया था।
विजयन ने विपक्षी कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) पर भी निशाना साधते हुए उस पर इस मामले में भाजपा और उसके नेतृत्व वाली केंद्र सरकार का परोक्ष रूप से समर्थन करने का आरोप लगाया।
दिनभर चलने वाला यह विरोध प्रदर्शन, सुबह शहर के मध्य में पलायम स्थित शहीद स्मारक से शुरू हुआ, जिसमें केरल मंत्रिमंडल के मंत्रियों, सत्ताधारी विधायकों, वरिष्ठ नेताओं और अन्य जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया।
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