कोई अंतर्कलह नहीं, कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस है एकजुट: मुख्यमंत्री सिद्धरमैया
राजकुमार माधव
- 14 May 2024, 07:20 PM
- Updated: 07:20 PM
(फाइल फोटो के साथ)
मैसुरु(कर्नाटक), 14 मई (भाषा) कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने राज्य में सत्तारूढ़ कांग्रेस में किसी अंतर्कलह से मंगलवार को इनकार किया और कहा कि पार्टी एकजुट है।
उन्होंने संवाददाताओं से सवालिये लहजे में कहा, ‘‘ हमारे बीच मतभेद कहां है? क्या हमारे बीच लड़ाई चल रही है? वे (भाजपा वाले) कह रहे हैं कि यह अलग है, वे राजनीति की वजह से ऐसा कहते हैं.... अंतर्कलह कहां है?’’
वह इस सवाल का जवाब दे रहे थे कि प्रदेश भाजपा के कुछ नेता कह रहे हैं कि कांग्रेस सरकार अंतर्कलह की वजह से गिर जाएगी।
सिद्धरमैया ने कहा, ‘‘हमारी बीच कोई अंदरूनी कलह नहीं है। यदि अंदरूनी कलह होती तो क्या हम एकजुट होकर संसदीय चुनाव का सामना कर पाते? कोई मतभेद नहीं है , न ही अंदर, न ही बाहर।’’
कर्नाटक में कांग्रेस सरकार को गिराने में ‘महाराष्ट्र मॉडल’ को दोहराने की कोशिश संबंधित महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के कथित बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘ वे (भाजपा नेता) एक साल से ऐसा दावा कर रहे हैं। वह महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री हैं, उन्हें हमारी सरकार के बारे में बोलने के बजाय पहले अपनी सरकार बचाने दें।’’
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बी वाई विजयेंद्र ने सोमवार को कहा था कि उनकी पार्टी इस सरकार को गिराने की कोई कोशिश नहीं करेगी लेकिन लोकसभा चुनाव के परिणाम की घोषणा के बाद सत्तारूढ़ कांग्रेस में जिस प्रकार की अशांति पैदा होगी, उस बारे में वह अपने आप से कोई अनुमान नहीं लगा सकते हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘बतौर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मैं कह रहा हूं कि -- भाजपा जिम्मेदार विपक्ष के रूप में सफलतापूर्वक काम कर रही है और हम ऐसा करते रहेंगे।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ किसी ऑपरेशन (अभियान) की जरूरत नहीं है लेकिन चुनाव नतीजों का सत्तारूढ़ दल पर जो असर होगा, हम उसके लिए जिम्मेदार नहीं होंगे।’’
राज्य में भाजपा और जनता दल सेक्यूलर (जदएस) के नेता लोकसभा चुनाव के बाद या वर्तमान विधानसभा के कार्यकाल के बीच में ही सत्तारूढ़ दल में नेतृत्व परिवर्तन की अनवरत अटकलबाजी के बीच सरकार के गिर जाने का कई बार अनुमान प्रकट कर चुके हैं। पिछले साल विधानसभा चुनाव के परिणाम की घोषणा होने के बाद मुख्यमंत्री पद के लिए सिद्धरमैया एवं शिवकुमार के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा हुई थी और कांग्रेस को शिवकुमार को मनाना पड़ा था। पार्टी ने उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाया था।
उसी समय कुछ ऐसी खबरें आयी थीं कि ‘बारी-बारी से मुख्यमंत्री बनाने के’ फार्मूले के आधार पर समझौता हुआ था। उसके हिसाब से ढाई साल के बाद शिवकुमार मुख्यमंत्री बनेंगे । हालांकि पार्टी ने आधिकारिक रूप से इसकी पुष्टि नहीं की।
शिवकुमार ने मुख्यमंत्री बनने की अपनी महत्वाकांक्षा को कभी नहीं छिपाया है। सिद्धरमैया लोकसभा चुनाव के दौरान जन समर्थन जुटाने की पुरजोर कोशिश में लगे हैं ताकि कांग्रेस राज्य में अधिक से अधिक सीट जीते जिससे उनकी (सिद्धरमैया की) स्थिति मजबूत होगी।
सिद्धरमैया ने तीन जून को कर्नाटक विधानपरिषद की छह सीट के लिए होने वाले चुनाव (तीन स्नातक एवं तीन अध्यापक निर्वाचन मंडल में) में भी कांग्रेस के सफल होने का विश्वास प्रकट किया है।
उन्होंने कहा, ‘‘ माहौल अच्छा है, कांग्रेस ने इस चुनाव को गंभीरता से लिया है। हमने छह महीने पहले ही उम्मीदवारों की घोषणा कर दी थी ताकि प्रत्याशियों को मतदाताओं से मिलने का समय मिले। ’’
उन्होंने कहा भाजपा-जदएस गठबंधन का विधानपरिषद चुनाव पर कोई असर नहीं पड़ेगा क्योंकि वे पहले भी तो संसदीय चुनाव में गठजोड़ में हैं।
जब सिद्धरमैया से पूछा गया कि क्या पेन ड्राइव मामले (जदएस सांसद प्रज्वल रेवन्ना से जुड़े सेक्स स्कैंडल) का विधानपरिषद चुनाव खासकर मैसुरु क्षेत्र में असर होगा तो उन्होंने कहा, ‘‘ पेन ड्राइव मामले का चुनाव से कोई लेना देना नहीं है क्योंकि मतदातता स्नातक एवं अध्यापक हैं। वे राजनीतिक रूप से जागरूक मतदाता हैं और उनके पास यह तय करने की शक्ति है कि कौन गलत है और कौन नहीं, वे यहां कांग्रेस सरकार की उपलब्धियों एवं केंद्र की भाजपा सरकार की उपलब्धियों के बीच तुलना करते हैं।’’
भाषा
राजकुमार