रांची के धुर्वा में दो बच्चों के लापता होने के विरोध में बंद
पारुल अविनाश
- 11 Jan 2026, 11:06 PM
- Updated: 11:06 PM
रांची, 11 जनवरी (भाषा) झारखंड की राजधानी रांची के धुर्वा इलाके में दो बच्चों के लापता होने के विरोध में रविवार को स्थानीय लोगों की ओर से आहूत 12 घंटे के बंद के कारण आम जनजीवन आंशिक रूप से प्रभावित हुआ।
चार और पांच साल की उम्र के दो भाई-बहन दो जनवरी को अपने घर के पास किराने की दुकान पर गए थे, जिसके बाद वे लापता हो गए। पुलिस ने दोनों बच्चों को ढूंढने के लिए 40 कर्मियों वाली एक विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया है।
स्थानीय लोगों की ओर से राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रदेश महासचिव कैलाश यादव के नेतृत्व में गठित समिति ने बंद का आह्वान किया था।
अधिकारियों के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने मौसिबारी और धुर्वा गोल चक्कर पर टायर जलाकर यातायात अवरुद्ध किया, जबकि इलाके के बाजार बंद रहे।
यादव ने कहा कि यह माता-पिता के लिए बेहद दुखद स्थिति है, क्योंकि अपने लापता बच्चों को वापस पाने का उनका इंतजार बढ़ता जा रहा है।
राजद नेता ने कहा, “पुलिस बच्चों का पता लगाने में नाकाम रही है। माता-पिता उम्मीद लगाए बैठे हैं कि उनके बच्चे लौट आएंगे, लेकिन उन्हें सिर्फ निराशा ही हाथ लग रही है।”
एसआईटी का नेतृत्व कर रहे पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) प्रमोद मिश्रा ने कहा कि दोनों बच्चों का पता लगाने के लिए कई टीमें विभिन्न स्थानों पर चौबीसों घंटे काम कर रही हैं। उन्होंने बताया कि पुलिस की तकनीकी टीम ने 800 जीबी सीसीटीवी फुटेज एकत्र किया है और उसका विश्लेषण कर रही है।
दोनों बच्चों को ढूंढने में हो रही देरी के बारे में मिश्रा ने कहा कि यह घटना दो जनवरी को दोपहर में हुई थी, लेकिन औपचारिक शिकायत उसी दिन रात को करीब नौ बजे प्राप्त हुई।
उन्होंने कहा, “छह-सात घंटे का अंतराल कुछ भी होने के लिए काफी था।”
मिश्रा के मुताबिक पुलिस ने न केवल झारखंड में, बल्कि पड़ोसी राज्यों में भी दोनों लापता बच्चों के पोस्टर वितरित किए हैं।
मिश्रा प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों को तलाश तेज करने और इसका दायरा बढ़ाने का आश्वासन दिया।
इस बीच यादव ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि पुलिस ने उन्हें पूर्वाह्न करीब 11 बजे उनके घर से उठाया और शाम 5:30 बजे तक हिरासत में रखा।
उन्होंने कहा, “मैं पुलिस की इस कार्रवाई की कड़ी निंदा करता हूं। घटना के बाद से हम हमेशा प्रशासन के साथ सहयोग करते रहे हैं, लेकिन अगर वरिष्ठ अधिकारी इसी तरह का व्यवहार करते रहे, तो जनता शांत नहीं होगी, बल्कि उनका गुस्सा और बढ़ेगा।”
शनिवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसद आदित्य साहू ने बच्चों के माता-पिता से मुलाकात की थी और उन्हें हर संभव सहयोग देने का भरोसा दिलाया था।
साहू ने कहा था कि यह घटना शहर के बिल्कुल बीचोंबीच घटी है, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवाल उठते हैं।
उन्होंने कहा था, “भाजपा इस लापरवाही, असंवेदनशीलता और प्रशासनिक विफलता के खिलाफ सड़कों से लेकर विधानसभा तक, हर स्तर पर लड़ाई लड़ेगी।”
भाषा पारुल