दिल्ली विश्वविद्यालय: शिक्षक संघ ने आधार-आधारित उपस्थिति के कदम का विरोध किया
जितेंद्र रंजन
- 09 Jan 2026, 10:14 PM
- Updated: 10:14 PM
नयी दिल्ली, नौ जनवरी (भाषा) ‘ऑल एकेडमिक्स ऑफ दिल्ली टीचर्स एसोसिएशन’ (एएडीटीए) ने शुक्रवार को दिल्ली विश्वविद्यालय के आधार-आधारित बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली को अनिवार्य रूप से लागू करने और उपस्थिति को वेतन वितरण से जोड़ने के निर्णय पर आपत्ति जताई।
शिक्षकों के संगठन ने कहा कि इस कदम ने शिक्षकों का सिरदर्द बढ़ा दिया है।
दिल्ली विश्वविद्यालय ने शुक्रवार को जारी एक बयान में बताया कि विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों, विभागों, अनुभागों और ‘इकाइयों’ के कई कर्मचारी अब तक आधार-आधारित बायोमेट्रिक पंजीकरण पूरा करने के लिए निर्धारित स्थान पर नहीं पहुंचे तथा निर्देश का पालन न करने पर जनवरी 2026 से उन्हें वेतन नहीं मिलेगा।
संगठन ने दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति योगेश सिंह को संबोधित करते हुए एक बयान में आठ जनवरी को जारी अधिसूचना पर आपत्ति जताई।
अधिसूचना में बायोमेट्रिक उपस्थिति अनिवार्य की गई है और यह चेतावनी दी गई है कि अनुपालन न करने पर जनवरी 2026 से वेतन का भुगतान नहीं किया जाएगा।
संगठन ने दावा किया कि संकाय सदस्यों को पहले सूचित किया गया था कि शिक्षकों के लिए बायोमेट्रिक उपस्थिति लागू करने का प्रस्ताव कार्यकारी परिषद के एजेंडे से ‘हटा दिया गया’ है।
संगठन ने दलील दी कि अधिसूचना जारी करना और लागू करना पहले दिए गए आश्वासन के विपरीत व जबरदस्ती के समान है।
संगठन ने बयान में कहा, “उपस्थिति पहले से ही यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) के नियमों, दिल्ली विश्वविद्यालय के अध्यादेशों व मौजूदा शैक्षणिक जवाबदेही तंत्रों द्वारा नियंत्रित है, जो शिक्षण, अनुसंधान, परीक्षा, क्षेत्र कार्य, विस्तार गतिविधियों व अन्य शैक्षणिक जिम्मेदारियों को मान्यता देते हैं। इन्हें बायोमेट्रिक अंकन तक सीमित करना शैक्षणिक कार्य की प्रकृति की अनदेखी करता है और न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन करता है।”
संगठन ने कार्यभार को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि ‘करियर एडवांसमेंट स्कीम’ के तहत पदोन्नति के लिए प्रकाशन संबंधी आवश्यकताओं और शोध एवं सेमिनार जैसी शैक्षणिक प्रतिबद्धताओं के कारण संकाय सदस्य पहले से ही दबाव में हैं।
संगठन ने कहा कि बायोमेट्रिक प्रणाली कार्य-जीवन संतुलन और शैक्षणिक उत्कृष्टता को भी कमजोर कर देगी।
संगठन ने शिक्षकों पर लागू होने वाली आठ जनवरी की अधिसूचना को तत्काल वापस लेने की मांग की और यह आश्वासन मांगा कि बायोमेट्रिक उपस्थिति के कारण किसी भी तरह से वेतन में कटौती नहीं की जाएगी।
उन्होंने कॉलेजों के लिए ‘यूनिट’ शब्द को समाप्त करने की भी मांग की और यह भी कहा कि सेवा शर्तों में किसी भी बदलाव पर वैधानिक निकायों द्वारा चर्चा की जानी चाहिए।
भाषा जितेंद्र