संयुक्त राष्ट्र में कार्यरत भारतीय सेना के पूर्व अधिकारी की गाजा में मौत
धीरज माधव
- 14 May 2024, 10:26 PM
- Updated: 10:26 PM
(योषिता सिंह)
संयुक्त राष्ट्र, 14 मई (भाषा) गाजा के रफह शहर में हमले की चपेट में आने से संयुक्त राष्ट्र के लिए काम करने वाले सेवानिवृत्त भारतीय कर्नल की मौत हो गई। पिछले साल सात अक्टूबर को इजराइल-हमास संघर्ष शुरू होने के बाद संयुक्त राष्ट्र के किसी अंतरराष्ट्रीय कर्मी की मौत का यह पहला मामला है।
संयुक्त राष्ट्र ने मामले की पूर्ण जांच कराने का आह्वान किया है जबकि इजराइल ने अलग से हमले की जांच करने का आदेश दिया है।
अधिकारियों ने मंगलवार को नयी दिल्ली में बताया कि भारतीय सेना से 2022 में समय पूर्व सेवानिवृत्ति लेने वाले कर्नल वैभव अनिल काले (46) दो महीने पहले संयुक्त राष्ट्र के सुरक्षा एवं संरक्षा विभाग (यूएनडीएसएस) में सुरक्षा समन्वय अधिकारी नियुक्त किए गए थे। उन्होंने कश्मीर में 11 जम्मू-कश्मीर राइफल्स की कमान संभाली दी थीं।
काले महू में सेना के इन्फैंट्री स्कूल में प्रशिक्षक थे। । सोमवार की सुबह यूएनडीएसएस के अन्य कर्मचारियों के साथ वह संयुक्त राष्ट्र के वाहन में रफह स्थित ‘यूरोपियन अस्पताल’ जा रहे थे तभी हमले की चपेट में आ गए। इस हमले में एक अन्य व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हुआ है जिसकी पहचान नहीं हो सकी है।
उनके रिश्तेदार विंग कमांडर (सेवानिवृत्त)प्रशांत करडे ने कहा ने मुंबई में ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘काले तीन सप्ताह पहले संयुक्त राष्ट्र में सुरक्षा सेवा समन्वयक के रूप में शामिल हुए थे। पूर्व इंफ्रेट्री सैन्य अधिकारी ने अपने करियर को आगे बढ़ाने के लिए संयुक्त राष्ट्र में शामिल होने का फैसला किया और इसलिए भी कि वह मानवीय मिशन के काम में रुचि रखते थे।’’
करडे ने बताया कि उनके परिवार में पत्नी अमृता और दो किशोर बच्चे हैं।
नागरिक विमानन कंपनी इंडिगो में वरिष्ठ कमांडर करडे ने बताया, ‘‘काले का अंतिम संस्कार काहिरा से शव लाए जाने के बाद दो दिनों में पुणे में किया जाएगा। उनका पार्थिव शरीर उड़ानों की उपलब्धता के आधार पर मुंबई या पुणे लाया जाएगा।’’
करडे ने बताया कि काले 1998 में भारतीय सेना में शामिल हुए थे और उन्होंने 2009 और 2010 के बीच संयुक्त राष्ट्र में आकस्मिक मुख्य सुरक्षा अधिकारी के रूप में भी काम किया था।
काले के सोशल मीडिया मंच लिंक्डइन पर दी गई जानकारी के मुताबिक वह अप्रैल 2004 में भारतीय सेना में शामिल हुए थे और 2009 से 2010 तक संयुक्त राष्ट्र में मुख्य सुरक्षा अधिकारी के तौर पर अपनी सेवाएं दी थीं। उन्होंने दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से व्यवहार विज्ञान और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून में स्नातक की उपाधि प्राप्त की थी। उन्होंने लखनऊ और इंदौर स्थित भारतीय प्रबंधन संस्थान सहित अन्य संस्थानों से भी पढ़ाई की थी।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा एवं सुरक्षा विभाग (डीएसएस) के एक कर्मचारी की मौत और एक अन्य डीएसएस कर्मचारी के घायल होने पर गहरा दुख जताया।
महासचिव के उप प्रवक्ता फरहान हक द्वारा जारी एक बयान में कहा गया कि गुतारेस ने संयुक्त राष्ट्र कर्मियों पर सभी हमलों की निंदा की और जांच का आह्वान किया। गुतारेस ने जान गंवाने वाले कर्मचारी के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।
बयान में कहा गया है, “गाजा में न केवल नागरिकों पर बल्कि मानवीय सहायता कार्यकर्ताओं पर भी संघर्ष का भारी असर हो रहा है। महासचिव ने एक बार फिर तत्काल मानवीय युद्धविराम और सभी बंधकों की रिहाई की अपील की है।”
गुतारेस ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि गाजा में संयुक्त राष्ट्र के वाहन पर हमला किया गया, ‘हमारे एक सहयोगी की मौत हो गई और एक अन्य घायल हो गया।’
उन्होंने कहा कि गाजा में संयुक्त राष्ट्र के 190 से ज्यादा कर्मचारियों की मौत हुई है।
प्रेस वार्ता के दौरान घटना को लेकर पूछे गए सवाल पर महासचिव के उप प्रवक्ता हक ने कहा कि इस समय ‘‘ हम संबंधित सरकारों और संबंधित परिवारों को जानकारी देने की प्रक्रिया में है...।’’ उन्होंने कहा कि वे ‘अंतरराष्ट्रीय कर्मी’’ थे । उन्होंने पुष्टि की कि यह संयुक्त राष्ट्र की पहली अंतरराष्ट्रीय जनहानि है।
गाजा में वर्ल्ड सेंट्रल किचन के कर्मचारियों के हताहत होने के सवाल पर हक ने कहा कि ‘‘संयुक्त राष्ट्र के कर्मचारियों में से, मेरा मानना है कि मुझे पहले किसी अंतरराष्ट्रीय हताहत की जानकारी नहीं थी।’’
उन्होंने कहा कि हमले के समय वाहन अस्पताल जा रहा था और उसमें सवार लोग अपने काम पर जा रहे थे। हक ने कहा कि वे विभिन्न स्थानों पर सुरक्षा स्थिति का आकलन करने जाते हैं और यह रफह स्थित यूरोपीय अस्पताल है।
बीबीसी की खबर के मुताबिक, इजराइली रक्षाबल (आईडीसी) ने पुष्टि की थी कि यूएनडीएसएस से सोमवार को दक्षिणी गाजा के रफह इलाके में उसके दो कर्मचारियों के घायल होने की सूचना मिली है।
बीबीसी की खबर के अनुसार, इजराइली सेना ने कहा कि प्रारंभिक जांच से संकेत मिलता है कि वाहन दोनों पक्ष के बीच जारी लड़ाई में फंस गया और इसके मार्ग के बारे में अवगत नहीं कराया गया था।
लेकिन संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि वाहन स्पष्ट रूप से चिह्नित था और इसकी योजनाबद्ध गतिविधियों की जानकारी इजराइली अधिकारियों को पहले ही दे दी गई थी।
जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता रोलैंडो गोमज ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र गाजा में अपने सभी काफिलों की आवाजाही के बारे में इजराइली अधिकारियों को सूचित करता है।
बीबीसी ने गोमज के एक प्रेस वार्ता के हवाले बताया, ‘‘यह एक मानक संचालन प्रक्रिया है। कल सुबह भी ऐसा ही किया गया था।’’
सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई और बीबीसी द्वारा सत्यापित तस्वीर में यूरोपीय अस्पताल के बाहर संयुक्त राष्ट्र के चिह्न वाला वाहन दिखाई दे रहा है जिसपर गोलियों के कई निशान हैं।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन ने भारतीय सेना के अवकाश प्राप्त अधिकारी और संयुक्त राष्ट्र की ओर से गाजा में कार्यरत कर्नल वैभव अनिल काले के एक हमले में मारे जाने पर गहरा शोक व्यक्त किया।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ के अपने आधिकारिक अकाउंट से जारी पोस्ट में कहा, ‘‘हम संयुक्त राष्ट्र के सुरक्षा एवं संरक्षा विभाग के तहत गाजा में काम कर रहे कर्नल वैभव काले के निधन से बहुत दुखी हैं। इस मुश्किल समय में हमारी गहरी संवेदनाएं उनके परिवार के साथ है।’’
गाजा में अप्रैल में इजराइल द्वारा किए गए एक हमले हवाई वर्ल्ड सेंट्रल किचन के सात सदस्य मारे गए थे। खबरों के मुताबिक मरने वाले सात लोगों में भारतीय मूल का ऑस्ट्रेलियाई जोमी फ्रैंककॉम भी था।
मानवीय मामलों के समन्वय के लिए संयुक्त राष्ट्र कार्यालय (ओसीएचए) ने बताया कि सात अक्टूबर, 2023 से 12 मई, 2024 के बीच गाजा में कम से कम 35,091 फलस्तीनी मारे गए हैं और 78,827 अन्य घायल हुए हैं।
इजराइल ने यह कार्रवाई हमास के हमले में 33 बच्चों सहित उसके एवं अन्य देशों के 1,200 नागरिकों के मारे जाने के बाद शुरू की थी।
इस बीच, काले का परिवार उनके पार्थिव शरीर का इंतजार कर रहा है। उनके रिश्तेदार ने बताया, ‘‘वैभव ने तीन साल पहले सेना से अवकाश प्राप्त किया था और पुणे में बस गए थे। वह नागपुर के रहने वाले थे और उन्होंने वहीं सोमलवार उच्च माध्यमिक स्कूल से पढ़ाई की थी।’’
उन्होंने बताया कि सेना में अपने दो दशक से अधिक लंबे करियर के दौरान काले ने पूर्वोत्तर और सियाचिन ग्लेशियर में भी अपनी सेवा दी। वह कश्मीर में राष्ट्रीय राइफल्स के पूर्व उप कमांडर थे और खुफिया एवं आतंकवाद विरोधी अभियानों का हिस्सा थे।
काले के भाई विशाल काले भारतीय वायुसेना में ग्रुप कैप्टन के पद पर कार्यरत हैं जबकि उनके चचेरे भाई अमेय काले भी सेना में कर्नल हैं।
भाषा धीरज