भगवान सोमनाथ से सबसे अधिक नफरत पंडित नेहरू को थी: भाजपा
धीरज सुरेश
- 07 Jan 2026, 08:27 PM
- Updated: 08:27 PM
नयी दिल्ली, सात जनवरी (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बुधवार को कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सोमनाथ मंदिर को अतीत में महमूद गजनी और अलाउद्दीन खिलजी ने लूटा था, लेकिन स्वतंत्र भारत में देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को भगवान सोमनाथ से सबसे अधिक नफरत थी।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर सिलसिलेवार पोस्ट कर आरोप लगाया कि नेहरू अपनी ‘‘अंध तुष्टीकरण की राजनीति’’ के कारण स्वतंत्रता के बाद सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण नहीं चाहते थे, जिसके कारण उन्होंने मुगल आक्रमणकारियों का भी महिमामंडन किया।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के ‘दुष्प्रचार’ का प्रतिकार करने या भारत की सभ्यतागत स्मृति का बचाव करने के बजाय, पंडित नेहरू ने हिंदू ऐतिहासिक प्रतीकों को कम करके पाकिस्तान को खुश करने और आंतरिक आत्मविश्वास के बजाय बाहरी तुष्टीकरण को प्राथमिकता दी।
त्रिवेदी ने कहा, ‘‘अतीत में सोमनाथ को मोहम्मद गजनी और खिलजी ने लूटा, लेकिन आजाद भारत में भगवान सोमनाथ से सबसे अधिक नफरत पंडित नेहरू को थी।’’
भाजपा प्रवक्ता ने कहा, ‘‘इसकी सबसे बड़ी बानगी देखिये कि पंडित नेहरू ने 21 अप्रैल 1951 को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री लियाकत अली खान को ‘प्रिय नवाबजादा’ कहकर संबोधित करते हुए पत्र लिखा और उसमें सोमनाथ के दरवाजों की कहानी को ‘पूरी तरह से झूठा’ बताया। पंडित नेहरू ने लियाकत अली खान के आगे एक तरह से आत्मसमर्पण करते हुए लिखा कि सोमनाथ मंदिर के निर्माण जैसा कुछ नहीं हो रहा।’’
त्रिवेदी ने सवाल किया, ‘‘आखिर पंडित नेहरू को लियाकत अली खान से ऐसा क्या डर था जो वे उसे सोमनाथ मंदिर के बारे में पत्र लिख रहे थे।’’
उन्होंने बाद में पार्टी मुख्यालय में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि भाजपा का भारत के पहले प्रधानमंत्री के खिलाफ ‘कुछ भी व्यक्तिगत’ नहीं है।
त्रिवेदी ने कहा, ‘‘नेहरू का विरोध वैचारिक और व्यावहारिक दोनों है। नरेन्द्र मोदी की तरह, जो एक व्यक्ति नहीं बल्कि एक संस्था हैं, नेहरू भी एक नेता नहीं, बल्कि एक विचार के प्रतीक हैं।’’
भाजपा प्रवक्ता ने, हालांकि यह भी कहा कि सोमनाथ मंदिर के मुद्दे और नेहरू के इसके पुनर्निर्माण के प्रति दृष्टिकोण की याद दिलाना आज देश के लोगों को उनके (नेहरू के) उन ‘भयानक और डरावने’ विचारों से अवगत कराने के लिए ‘महत्वपूर्ण’ है, जो कई परतों के नीचे छिपे हुए थे।
उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय जो मानसिकता मौजूद थी, वह आज भी कांग्रेस में दिखाई देती है।
त्रिवेदी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘मुस्लिम लीग की मानसिकता के प्रति प्रेम अब भी मौजूद है, क्योंकि उसके साथ गठबंधन है, चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के साथ समझौता है और सनातन-हिंदू धर्म पर तीक्ष्ण हमले अब भी जारी हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘जो उस समय हो रहा था, वही आज भी हो रहा है। इसलिए, इसकी प्रासंगिकता और इसके परिणाम बहुत गंभीर हैं।’’
त्रिवेदी ने कहा कि ये तो सब जानते हैं कि पंडित नेहरू ने न केवल कैबिनेट मंत्रियों, बल्कि राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद और उपराष्ट्रपति डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन तक को पत्र लिखकर सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण की जरूरत पर सवाल उठाया था और उन्हें उद्घाटन समारोह में शामिल होने से मना किया था।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा, ‘‘लेकिन यह भी सच है कि पंडित नेहरू ने सभी भारतीय मुख्यमंत्रियों को दो-दो बार पत्र लिखकर सोमनाथ मंदिर के निर्माण पर शिकायत करते हुए लिखा कि इससे विदेशों में भारत की छवि खराब हुई है।’’
त्रिवेदी ने प्रियंका गांधी वाद्रा पर भी तंज साधते हुए कहा कि वह चाहती हैं कि भाजपा नेता नेहरू के बारे में सारी बातें एक ही बार में कह दें, लेकिन ‘मजेदार बात यह है कि परिवार अब भी मौजूद है’।
उन्होंने आगे कहा, ‘‘और वे (कांग्रेसी नेता) हमसे बार-बार पूछते रहते हैं कि हम (नेहरू के बारे में) क्यों बात करते रहते हैं।’’ भाजपा नेता स्पष्ट रूप से शीतकालीन सत्र के दौरान लोकसभा में हुई बहस में प्रियंका गांधी की टिप्पणियों का जिक्र कर रहे थे।
भाजपा के राज्यसभा सदस्य ने कहा कि आज देश में दो विचारधाराएं हैं, एक वह जो मानती है कि ‘भारत कभी एक देश नहीं था’ और यह एक देश के रूप में जीवित नहीं रह सकता, जबकि दूसरी ‘एक भारत और महान भारत’ के विचार को मानती है, जो सभी विविधताओं के साथ प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में चमक रहा है और प्रगति कर रहा है।
त्रिवेदी ने कहा कि यही कारण है कि प्रधानमंत्री ने कहा है कि देश को 10 वर्षों के भीतर ‘मैकाले की मानसिकता’ से मुक्त होना होगा। उन्होंने कहा कि इसी मानसिकता ने कांग्रेस सरकारों और नेहरू को प्रभावित किया था।
भाषा धीरज