दिल्ली दंगों की साजिश के मामले में जमानत पाने वालों के परिवार ने कहा-इंसाफ मिलने का पूरा भरोसा था
नोमान वैभव
- 05 Jan 2026, 08:23 PM
- Updated: 08:23 PM
नयी दिल्ली, पांच जनवरी (भाषा) दिल्ली में 2020 में हुए दंगों की साजिश के मामले में उच्चतम न्यायालय द्वारा जमानत पाने वाले कार्यकर्ताओं के परिजनों ने फैसले पर खुशी और राहत व्यक्त की तथा उम्मीद जताई कि उमर खालिद और शरजील इमाम को भी जल्द ही जेल से रिहा कर दिया जाएगा।
न्यायालय ने खालिद और इमाम को जमानत देने से सोमवार को इनकार कर दिया लेकिन ‘‘भागीदारी के स्तर के क्रम’’ का हवाला देते हुए पांच अन्य को जमानत दे दी और कहा कि मामले में सभी आरोपी एक ही पायदान पर नहीं हैं।
उसने कहा कि अभियोजन पक्ष की सामग्री से पता चलता है कि खालिद और इमाम साजिश रचने, लामबंदी करने और रणनीतिक दिशा-निर्देश देने के स्तर पर संलिप्त थे।
उच्चतम न्यायालय ने कार्यकर्ताओं गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को राहत देते हुए कहा कि इससे उनके खिलाफ लगे आरोपों की गंभीरता में कोई कमी नहीं आती है।
शादाब अहमद के पिता, शमशाद अहमद ने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है।
उन्होंने उत्तर प्रदेश के बिजनौर से ‘पीटीआई-भाषा’ से फोन पर बातचीत में कहा, "हम संविधान में विश्वास रखते हैं और न्याय व्यवस्था पर हमारा पूरा भरोसा है। हमारे बेटे ने कुछ भी गलत नहीं किया है। हमें उम्मीद थी कि उसे जमानत मिल जाएगी। हम जानते थे कि अगर आज नहीं तो कल उसे जमानत जरूर मिल जाएगी।"
शमशाद ने बताया कि उनका बेटा उत्तर-पूर्वी दिल्ली की मंडोली जेल में बंद है। उन्होंने कहा कि उन्हें खुशी है कि उनका इंतजार आखिरकार रंग लाया, और साथ ही उन्हें खालिद और इमाम को भी जमानत मिलने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा, "उमर और शरजील भी हमारे बच्चे हैं। हमें दुख है कि उन्हें जमानत नहीं मिली है। उन्हें भी देर-सवेर जमानत मिल ही जाएगी।"
शमशाद ने कहा कि उनके परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई है और वे बेसब्री से शादाब से मिलने का इंतजार कर रहे हैं, जिसे दिल्ली पुलिस ने अप्रैल 2020 में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत गिरफ्तार किया था।
शिफा उर रहमान की पत्नी नूरीन फातिमा ने भी इसी तरह की भावनाएं व्यक्त कीं और फैसले के लिए उच्चतम न्यायालय को धन्यवाद दिया।
उन्होंने ‘पीटीआई-वीडियो’ से कहा, "हमें पूरा भरोसा था कि हमें न्याय मिलेगा। हमें उन लोगों के लिए दुख है जिन्हें जमानत नहीं मिली। अल्लाह ने चाहा तो उनके परिवारों को भी खुशखबरी मिलेगी। मैं बहुत खुश हूं। अल्लाह ने हमें यह अपार खुशी दी है।"
फातिमा ने कहा कि उनके पति को जेल गए हुए लगभग छह साल हो गए हैं और उन्होंने इसे एक बहुत ही "कठिन और दर्दनाक" दौर बताया।
उन्होंने कहा, "इस बार मुझे उम्मीद थी कि उन्हें जमानत मिल जाएगी। जब मैंने बच्चों को जगाकर यह बात बताई, तो वे भी खुश हो गए। हम उम्मीद करते हैं कि जिन लोगों को आज जमानत नहीं मिली, उनके परिवारों को भी जल्द ही ऐसी ही खुशी मिले।"
सलीम खान की बेटी सायमा ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि यह उनके परिवार के लिए एक भावुक क्षण है क्योंकि उन्हें जमानत याचिका के एक और बार खारिज होने का डर था।
उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से फोन पर कहा, "हम उनका स्वागत करेंगे, लेकिन हम इस बात को लेकर चिंतित हैं कि जब हम उन्हें जेल से बाहर आते देखेंगे तो उस पल का सामना कैसे करेंगे। मेरे पिता को 11 मार्च, 2020 को गिरफ्तार किया गया था और लगभग छह साल बीत चुके हैं। हमें कई बार अस्वीकृति का सामना करना पड़ा है और मन में हमेशा डर बना रहता है। हम उच्चतम न्यायालय के लिखित आदेश का इंतजार कर रहे हैं।"
सलीम खान भी मंडोली जेल में बंद हैं।
खालिद और इमाम की जमानत याचिका खारिज होने पर उन्होंने कहा, "जब बाकी लोगों को पहले जमानत मिल गई थी, तो हमें उम्मीद थी कि हमें भी अच्छी खबर मिलेगी। हम जानते हैं कि किस तरह की पीड़ा से गुजरना पड़ता है। उनके लिए उम्मीद की किरण अभी बाकी है।"
उमर, शरजील और अन्य आरोपियों पर फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों का ‘‘मुख्य साजिशकर्ता’’ होने का आरोप है। उनके खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के विभिन्न प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया था।
उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों में 53 लोग मारे गए थे और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे।
भाषा
नोमान