आत्मनिर्भरता की नीति विलासिता नहीं, बल्कि जरूरत : राजनाथ सिंह
धीरज सुरेश
- 05 Jan 2026, 12:59 AM
- Updated: 12:59 AM
(तस्वीरों के साथ)
नयी दिल्ली, चार जनवरी (भाषा) रक्षामंत्री राजनाथ सिंह भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) के लिए देश में ही डिजाइन और निर्मित पहले प्रदूषण नियंत्रण पोत ‘समुद्र प्रताप’ को सोमवार को औपचारिक रूप से बल की सेवा में शामिल करेंगे। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी।
सिंह ने सेवा में शामिल करने की पूर्व संध्या पर कहा कि रक्षा क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भरता’ विलासिता नहीं, बल्कि एक ‘रणनीतिक आवश्यकता’ है।
अधिकारियों ने बताया कि भारतीय तटरक्षक का स्वदेशी रूप से निर्मित यह पहला प्रदूषण नियंत्रण पोत है। कुल 114.5 मीटर लंबे इस पोत में 60 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री है। पोत का वजन 4,200 टन है और इसकी गति 22 नॉट से अधिक की है।
यह पोत समुद्री प्रदूषण नियंत्रण नियमों को लागू करने, समुद्री कानून प्रवर्तन, खोज और बचाव अभियानों और भारत के विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) की सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
इस पोत को औपचारिक रूप से दिसंबर में गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (जीएसएल) में तटरक्षक बल को सौंप दिया गया था।
भारतीय तटरक्षक बल ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘तटरक्षक के पोत समुद्र प्रताप को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पांच जनवरी को गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (जीएसएल) में सेवा में शामिल करेंगे। यह प्रदूषण नियंत्रण दो पोतों में से पहला पोत है।’’
तटरक्षक बल ने पोत का एक छोटा वीडियो क्लिप भी साझा किया, जिसे बल का सबसे बड़ा और सबसे उन्नत प्रदूषण नियंत्रण पोत बताया जा रहा है।
बाद में, रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि सिंह ने गोवा में जीएसएल द्वारा निर्मित दो प्रदूषण नियंत्रण पोतों में से पहले ‘समुद्र प्रताप’ को सेवा में शामिल करने की पूर्व संध्या पर जीएसएल का दौरा किया।
रक्षा मंत्री ने कहा, ‘‘गोवा शिपयार्ड लिमिटेड और अन्य भारतीय गोदियों द्वारा भारतीय नौसेना और भारतीय तटरक्षक बल के लिए निर्मित जहाज भारत की संप्रभुता के तैरते प्रतीक हैं, जो खुले समुद्र में हमारी उपस्थिति, क्षमता और संकल्प का प्रतिनिधित्व करते हैं।’’
मंत्रालय के मुताबिक सिंह ने रक्षा क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भरता’ को विलासिता नहीं, बल्कि एक ‘रणनीतिक आवश्यकता’ बताया और इस आवश्यकता को वास्तविकता में बदलने के लिए जीएसएल जैसी संस्थाओं की सराहना की।
उन्होंने कहा कि जीएसएल क्षमताओं को मजबूत कर रहा है, प्रौद्योगिकी को आत्मसात कर रहा है और स्वदेशी डिजाइन को मजबूत कर रहा है, जिसके परिणामस्वरूप सशस्त्र बलों को उपकरणों की समय पर आपूर्ति हुई है और देश को आत्मनिर्भर बनाने की गति तेज हुई है।
सिंह ने जटिल सुरक्षा परिवेश में भारतीय पोत निर्माण गोदियों द्वारा निभाई जाने वाली महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि समुद्री क्षेत्र में पारंपरिक चुनौतियों के साथ-साथ गैर-पारंपरिक खतरे भी लगातार बढ़ रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘समुद्र में हमें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जैसे कि मादक पदार्थों की तस्करी, अवैध मछली पकड़ना, मानव तस्करी, पर्यावरणीय अपराध और संदिग्ध क्षेत्र से जुड़ी चुनौतियां। ऐसी स्थिति में, जहाजरानी स्थलों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘देश के समुद्री इतिहास, नौसैनिक विरासत और रणनीतिक दूरदर्शिता के केंद्र इस शहर में स्थित, जीएसएल भारत के रक्षा तंत्र के स्तंभों में से एक है, जो समुद्री सुरक्षा की जिम्मेदारी वहन करता है।’’
रक्षा मंत्री ने रेखांकित किया कि भारत एक ‘‘सक्रिय समुद्री राष्ट्र’’ के रूप में उभर रहा है, और हिंद महासागर क्षेत्र में स्थिरता, सहयोग और नियम-आधारित व्यवस्था सुनिश्चित करने में इसकी भूमिका ‘‘लगातार बढ़ रही है’’।
उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र में प्रौद्योगिकी के बढ़ते महत्व के मद्देनजर हमें इस बदलते परिदृश्य के अनुरूप ढलना होगा। हमें अपने प्रतिद्वंद्वियों पर बढ़त हासिल करने के लिए जहाजों को अत्याधुनिक उपकरणों, कृत्रिम मेधा (एआई)-सक्षम रखरखाव और साइबर हमले से सुरक्षित उपकरणों से लैस करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
सिंह ने कहा, ‘‘मुझे विश्वास है कि जीएसएल इस परिवर्तन में भी नेतृत्व का प्रदर्शन करेगा।’’
रक्षामंत्री ने रेखांकित किया कि जहाज केवल इस्पात, मशीनरी और प्रौद्योगिकी का मिश्रण नहीं है, बल्कि यह जनता के विश्वास और सशस्त्र बलों की अपेक्षाओं और जरूरतों का प्रतीक है।
तटरक्षक बल ने कहा, ‘‘जीएसएल द्वारा 60 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री से निर्मित, 114.5 मीटर लंबा और 4,200 टन वजन वाला यह पोत 22 नॉट से अधिक की गति से संचालित हो सकता है। इस पोत से आईसीजी की प्रदूषण नियंत्रण, अग्निशमन और समुद्री सुरक्षा क्षमताओं में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।"
आईसीजी ने पूर्व में कहा था कि यह तेल रिसाव का पता लगाने के लिए उन्नत प्रणालियों से सुसज्जित है, जैसे कि ‘ऑयल फिंगरप्रिंटिंग मशीन’, ‘जाइरो स्टेबलाइज्ड स्टैंडऑफ एक्टिव केमिकल डिटेक्टर’ और पीसी लैब उपकरण।
आईसीजी के मुताबिक, यह जहाज अत्याधुनिक तकनीक से लैस है, जिसमें 30 मिलीमीटर सीआरएन-91 गन, दो 12.7 मिलीमीटर स्थिरीकृत रिमोट-नियंत्रित गन (एकीकृत अग्निशमन प्रणाली के साथ), स्वदेशी एकीकृत ब्रिज सिस्टम, एकीकृत मंच प्रबंधन प्रणाली, स्वचालित ऊर्जा प्रबंधन प्रणाली और उच्च क्षमता वाला बाहरी अग्निशमन तंत्र शामिल है।
अधिकारियों ने कहा कि इस पोत के सेवा में शामिल होने से भारत की समुद्री प्रदूषण से निपटने की क्षमता मजबूत होगी और रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भरता के प्रति राष्ट्र की प्रतिबद्धता को बल मिलेगा।
सिंह ने बेल्जियम के लिए उच्च तकनीक वाले ड्रेजर के निर्माण की दिशा में जीएसएल के प्रयासों की सराहना की। इसी के साथ उन्होंने भारत को आत्मनिर्भर राष्ट्र और साथ ही रक्षा उत्पादों का शुद्ध निर्यातक बनाने पर अधिक ध्यान केंद्रित करने की वकालत की।
भाषा धीरज