गिग वर्कर के मामले में मोदी सरकार बहुत देर से जागी: कांग्रेस
हक माधव सुरेश
- 03 Jan 2026, 09:24 PM
- Updated: 09:24 PM
नयी दिल्ली, तीन जनवरी (भाषा) कांग्रेस ने ‘गिग वर्कर’ को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने के लिए साल भर में कम-से-कम 90 दिन काम करने संबंधी केंद्र के प्रस्ताव को लेकर शनिवार को आरोप लगाया कि मोदी सरकार इस मामले में देर से जागी है।
पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कांग्रेस की राज्य सरकारों द्वारा उठाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी पार्टी गिग वर्कर के साथ खड़ी है।
श्रम मंत्रालय ने ऐप-आधारित डिलीवरी पार्टनर, कैब ड्राइवर और फ्रीलांसर जैसे अस्थायी कामगारों (गिग वर्कर) को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने के लिए साल भर में कम-से-कम 90 दिन काम करने का प्रस्ताव रखा है।
सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के तहत बनाए गए नए मसौदा नियमों में यह प्रस्ताव रखा गया है। यह मसौदा 31 दिसंबर को जारी किया गया है और इस पर हितधारकों से सुझाव मांगे गए हैं।
रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, "गिग वर्कर्स द्वारा काम के सम्मानजनक परिस्थितियों की मांग को लेकर चल रहे व्यापक आंदोलन के बीच मोदी सरकार बहुत देर से जागी है, लेकिन उसका विज़न बहुत कम और बहुत देर से आया है- और यह गिग वर्कर्स के समर्थन में तेलंगाना, राजस्थान और कर्नाटक में कांग्रेस की सरकारों द्वारा किए गए प्रावधानों से कहीं पीछे है।"
उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस शासित राज्यों में गिग वर्कर्स के लिए किए गए प्रमुख प्रावधान इस प्रकार हैं कि प्रत्येक लेनदेन के दौरान गिग वर्कर को मिलने वाले भुगतान का एक प्रतिशत से पांच प्रतिशत तक कल्याण शुल्क वसूल कर गिग वर्कर्स के लिए एक कल्याण कोष की स्थापना एवं एक त्रिपक्षीय कल्याण बोर्ड की स्थापना की जाएगी ताकि प्लेटफार्म द्वारा वर्कर का पंजीकरण, कल्याण शुल्क की वसूली, पारदर्शिता और वर्करों को उनके काम से जुड़ी जानकारी तक पहुंच सुलभ की जा सके, साथ ही सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का भी क्रियान्वयन किया जा सके।"
उन्होंने कहा कि कांग्रेस की राज्य सरकारों द्वारा यह प्रावधान भी किया गया है कि किसी भी कर्मी को बिना वैध लिखित कारण और 14 दिन पूर्व सूचना के बगैर काम से नहीं हटाया जा सकेगा तथा प्लेटफॉर्म के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि वे कर्मियों को उचित अनुबंध प्रदान करें और काम का ऐसा वातावरण सुनिश्चित करें जो सुरक्षित हो, जिसमें वर्कर के स्वास्थ्य को कोई जोखिम न हो-साथ ही पर्याप्त आराम और स्वच्छता सुविधाएं भी उपलब्ध हों।
रमेश का कहना है, ‘‘गिग वर्कर्स की सुरक्षा 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस पार्टी के पांच-सूत्रीय ‘युवा न्याय’ एजेंडा का एक प्रमुख स्तंभ रही है। नौ अप्रैल, 2025 को अहमदाबाद में आयोजित एआईसीसी सत्र में अपनाए गए ‘न्याय पथ’ प्रस्ताव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने घोषणा की थी, “कांग्रेस पार्टी गिग प्लेटफॉर्म्स और असंगठित क्षेत्र के वर्कर्स की प्रबल समर्थक है। हम उनके अधिकारों की रक्षा के लिए क़ानूनी ज़रूरतों को पहचानते हैं।”
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कांग्रेस पार्टी गिग वर्कर्स के साथ खड़ी थी और आगे भी हमेशा खड़ी रहेगी।
भाषा हक माधव