ईरान के सर्वोच्च नेता ने ‘दंगाइयों पर सख्ती’ की बात कही, मृतक संख्या कम से कम 10 हुई
एपी संतोष नेत्रपाल
- 03 Jan 2026, 06:43 PM
- Updated: 06:43 PM
दुबई, तीन जनवरी (एपी) ईरान के सर्वोच्च नेता ने शनिवार को देश में अशांति उत्पन्न करने वाले विरोध प्रदर्शनों पर कहा कि ‘‘दंगाइयों पर सख्ती करनी होगी।’’ सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की ये टिप्पणियां एक सप्ताह से जारी प्रदर्शनों के प्रति अधिकारियों को अधिक आक्रामक रुख अपनाने की अनुमति देने का संकेत प्रतीत होती है।
ईरान की खस्ताहाल अर्थव्यवस्था के कारण भड़के विरोध-प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा में कम से कम 10 लोगों की मौत हो चुकी है। ऐसे में 86 वर्षीय अयातुल्ला अली खामेनेई की यह पहली टिप्पणी सामने आई है।
विरोध-प्रदर्शन का सिलसिला थमता नहीं दिख रहा है और ऐसा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा शुक्रवार को ईरान को दी गई चेतावनी के बाद हो रहा है।
ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर तेहरान ‘‘शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की हिंसक हत्या करता है’’ तो अमेरिका ‘‘उनकी मदद के लिए आगे आएगा।’’
हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप हस्तक्षेप करेंगे या नहीं, यदि करेंगे तो कैसे करेंगे, लेकिन उनकी टिप्पणियों ने तुरंत ही तीखी प्रतिक्रिया को जन्म दिया है, जिसमें ईरान के अधिकारियों ने मध्य पूर्व में अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाने की धमकी दी है।
ट्रंप द्वारा शनिवार को यह कहे जाने के बाद कि अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ लिया है, जो तेहरान के लंबे समय से सहयोगी रहे हैं, इन टिप्पणियों का महत्व और भी बढ़ गया है।
यह 2022 के बाद से ईरान का सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन है। वर्ष 2022 में पुलिस हिरासत में 22 वर्षीय महसा अमीनी की मौत ने देशव्यापी प्रदर्शनों को जन्म दिया था। हालांकि, ये प्रदर्शन अभी तक उतने व्यापक और तीव्र नहीं हुए हैं जितने अमीनी की मौत के समय हुए थे। अमीनी को अधिकारियों की पसंद के अनुरूप हिजाब या सिर पर स्कार्फ न पहनने के कारण हिरासत में लिया गया था।
तेहरान में एक सभा के दौरान दिए गए खामेनेई के उन बयानों को सरकारी टीवी पर प्रसारित किया गया जिनमें उन्होंने रियाल की गिरती कीमत से नाराज प्रदर्शनकारी ईरानियों की चिंताओं को ‘‘दंगाइयों’’ से अलग करने की कोशिश की।
खामेनेई ने कहा, ‘‘हम प्रदर्शनकारियों से बात करते हैं, अधिकारियों को भी उनसे बात करनी चाहिए। लेकिन दंगा करने वालों से बात करने का कोई फायदा नहीं है। दंगा करने वालों को उनकी जगह दिखानी होगी।’’
उन्होंने ईरान के अधिकारियों द्वारा लगातार किए जाने वाले एक दावे को भी दोहराया कि इजराइल या अमेरिका जैसी विदेशी ताकतें विरोध प्रदर्शनों को बढ़ावा दे रही हैं, हालांकि उन्होंने इसका कोई सबूत नहीं दिया। उन्होंने ईरान के गिरते रियाल के लिए भी ‘‘दुश्मन’’ को दोषी ठहराया।
शनिवार को रातभर में दो और मौतें दर्ज की गईं तथा हिंसा का एक नया स्तर देखने को मिला। सरकारी अखबार आईआरएएन ने बताया कि देश के बड़े शिया मदरसों वाले शहर कोम में एक ग्रेनेड फटा, जिससे एक व्यक्ति की मौत हो गई। अखबार ने सुरक्षा अधिकारियों के हवाले से बताया कि वह व्यक्ति शहर में लोगों पर हमला करने के लिए ग्रेनेड ले जा रहा था। यह शहर राजधानी तेहरान से लगभग 130 किलोमीटर (80 मील) दक्षिण में है।
कोम से प्रसारित ऑनलाइन वीडियो में रात भर सड़कों पर आग की लपटें उठती दिखीं।
दूसरी मौत तेहरान से लगभग 370 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में हरसिन शहर में हुई। अखबार ने बताया कि वहां ईरान के ‘पैरामिलिट्री रिवोल्यूशनरी गार्ड’ की ‘ऑल-वॉलंटियर विंग’ बासिज का एक सदस्य करमानशाह प्रांत के शहर में बंदूक और चाकू से किए गए हमले में मारा गया।
अमेरिका स्थित ‘ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी’ ने बताया कि ईरान के 31 में से 22 प्रांतों में 100 से अधिक जगहों पर प्रदर्शन हुए हैं।
इन विरोध प्रदर्शनों की वजह देश की कमजोर अर्थव्यवस्था है क्योंकि ईरान की मुद्रा ‘रियाल’ का मूल्य अमेरिकी डॉलर के मुकाबले काफी गिर गया है।
एपी संतोष