छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य जमानत मिलने के बाद जेल से रिहा
संजीव खारी
- 03 Jan 2026, 06:20 PM
- Updated: 06:20 PM
रायपुर, तीन जनवरी (भाषा) छत्तीसगढ़ में कथित शराब घोटाले से जुड़े दो मामलों में उच्च न्यायालय से जमानत मिलने के एक दिन बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल शनिवार को रायपुर केंद्रीय कारागार से रिहा हो गए।
चैतन्य को पिछले वर्ष 18 जुलाई को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कथित घोटाले में धनशोधन की जांच के सिलसिले में गिरफ्तार किया था और तब से वह न्यायिक हिरासत में थे।
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने ईडी द्वारा दर्ज मामले और छत्तीसगढ़ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी)/आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडब्ल्यू) द्वारा दर्ज मामले में शुक्रवार को उनकी जमानत याचिकाएं मंजूर की थीं।
रिहाई के दौरान भूपेश बघेल बड़ी संख्या में कांग्रेस नेताओं और समर्थकों के साथ जेल परिसर के बाहर मौजूद रहे। समर्थकों ने पिता–पुत्र के समर्थन में नारे लगाए। इस दौरान पार्टी के झंडे लहराए गए और ढोल बजाए गए।
जेल से बाहर निकलने के बाद चैतन्य ने अपने पिता के पैर छूकर उन्हें गले लगाया। इसके बाद वह एक वाहन में बैठकर परिसर से बाहर निकले। बाहर निकलते समय उन्होंने स्पोर्ट यूटिलिटी व्हीकल (एसयूवी) की छत से समर्थकों की ओर हाथ हिलाकर अभिवादन किया और कांग्रेस का झंडा भी लहराया।
चैतन्य ने ‘पीटीआई वीडियो’ से कहा, ‘‘न्याय में देरी हुई, लेकिन न्याय मिला है। मैं इस फैसले से बहुत खुश हूं। मुझे संविधान पर भरोसा है।’’
उन्होंने कहा कि मामला अदालत में होने के कारण वह इस पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे।
अपने बेटे की रिहाई पर भूपेश बघेल ने कहा कि जमानत ‘‘सरकार द्वारा प्रायोजित साजिशों’’ के खिलाफ एक जीत है।
उन्होंने दावा किया कि उच्च न्यायालय के आदेश से पूरे राज्य में खुशी की लहर है और विभिन्न जिलों से पार्टी कार्यकर्ता रायपुर पहुंचे हैं।
बघेल ने आरोप लगाया, ‘एक साजिश के तहत ईडी ने 18 जुलाई को चैतन्य को उनके जन्मदिन पर गिरफ्तार किया था और उनकी रिहाई बेटे (चैतन्य के बेटे) के जन्मदिन पर हुई।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि ईडी, आयकर, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) जैसी केंद्रीय एजेंसियों का विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के लिए दुरुपयोग किया जा रहा है।
उच्च न्यायालय ने ईडी के मामले में जमानत याचिका पर अपने आदेश में कहा कि आवेदक की कथित भूमिका पहले ही जमानत पा चुके कई अन्य आरोपियों की तुलना में ‘‘निश्चित तौर पर कमतर’’ है।
अदालत ने कहा कि कथित सरगना और अनवर ढेबर, अनिल टुटेजा, अरविंद सिंह, अरुणपति त्रिपाठी और त्रिलोक सिंह ढिल्लों को पहले ही उच्चतम न्यायालय से जमानत मिल चुकी है और आवेदक को जमानत न देना समानता के सिद्धांत का उल्लंघन होगा।
ईडी ने चैतन्य बघेल को 18 जुलाई को गिरफ्तार किया था, जबकि एसीबी/ईओडब्ल्यू ने भ्रष्टाचार से जुड़े अन्य मामले में 24 सितंबर को जेल में रहते हुए उन्हें गिरफ्तार किया था।
ईडी के अनुसार, छत्तीसगढ़ में कथित शराब घोटाला 2019 से 2022 के बीच हुआ, जब राज्य में भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार थी। केंद्रीय एजेंसी का दावा है कि घोटाले से राज्य के खजाने को भारी नुकसान हुआ।
ईडी ने दावा किया था कि चैतन्य कथित शराब घोटाले के ‘सिंडिकेट’ का मुखिया था और उसने लगभग एक हजार करोड़ रुपये की राशि का प्रबंधन किया।
वहीं एसीबी/ईओडब्ल्यू का आरोप है कि चैतन्य ने अपराध से अर्जित आय में से करीब 200–250 करोड़ रुपये अपने हिस्से के रूप में प्राप्त किए। राज्य एजेंसी के अनुसार, घोटाले से अपराध की कुल अर्जित आय 3,500 करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है।
भाषा संजीव