सरकार मूल स्थानीय लोगों के पुनर्वास पर विचार कर रही: बेदखली विवाद पर उपमुख्यमंत्री शिवकुमार
शुभम सुरेश
- 28 Dec 2025, 10:20 PM
- Updated: 10:20 PM
बेंगलुरु, 28 दिसंबर (भाषा) उत्तरी बेंगलुरु के कोगिलू में ‘‘अवैध मकानों’’ को ध्वस्त करने से राजनीतिक विवाद छिड़ने के बाद कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने रविवार को कहा कि राज्य सरकार बेदखल किए गए मूल स्थानीय लोगों के पुनर्वास पर विचार कर रही है।
शिवकुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री सिद्धरमैया सोमवार को इस मुद्दे पर एक बैठक बुलाएंगे।
अधिकारियों ने बताया कि कोगिलू के वसीम लेआउट और फकीर कॉलोनी में स्थित घरों को ‘‘बेंगलुरु सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट लिमिटेड’’ द्वारा 20 दिसंबर को प्रस्तावित ठोस अपशिष्ट प्रसंस्करण इकाई के लिए अतिक्रमण हटाने के उद्देश्य से ध्वस्त कर दिया गया था। अधिकारियों का दावा है कि ये घर बिना किसी आधिकारिक अनुमति के बनाए गए थे और इनमें रहने वाले अधिकांश लोग अन्य राज्यों से आए प्रवासी थे।
बेंगलुरु विकास के प्रभारी मंत्री शिवकुमार ने कहा, ‘‘हमारे अधिकारियों ने (ध्वस्तीकरण से पहले) उचित नोटिस दिया था। अगर वे लोग वास्तविक और स्थानीय निवासी हैं तो हम उनका पुनर्वास करने के लिए तैयार हैं। हम राजीव गांधी आवास योजना के तहत हर संभव मदद करेंगे।’’
उन्होंने यहां पत्रकारों से कहा कि सिद्धरमैया ने बेदखली के मुद्दे पर कल एक बैठक बुलाई है।
राज्य के आवास मंत्री बी जेड जमीर अहमद खान ने कहा कि मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री ने इस मामले पर सोमवार को एक बैठक बुलाई है, जहां उन लोगों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था प्रदान करने के संबंध में निर्णय लिया जा सकता है, जिनके घर ध्वस्त कर दिए गए हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘हम कुछ अच्छी खबर की उम्मीद कर सकते हैं।’’ उन्होंने बताया कि नोटिस जारी कर दिए गए थे और उनके आश्रय के लिए अस्थायी व्यवस्था भी कर दी गई थी, लेकिन लोग जाने को तैयार नहीं थे, क्योंकि उन्हें डर था कि वे बेघर हो जाएंगे।
इस ध्वस्तीकरण ने एक राजनीतिक विवाद को जन्म दिया। केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने इस अभियान की आलोचना करते हुए इसे ‘‘बुलडोजर राज का क्रूर सामान्यीकरण’’ करार दिया।
विजयन के बयान के बाद अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) महासचिव के. सी. वेणुगोपाल ने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री सिद्धरमैया और उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार से बात की है और पार्टी की चिंताओं से अवगत कराया है कि इस तरह की कार्रवाई (ध्वस्तीकरण) बहुत अधिक सावधानी, संवेदनशीलता और करुणा के साथ की जानी चाहिए, जिसमें मानवीय प्रभाव को केंद्र में रखा जाए।
इसी बीच विपक्षी भाजपा ने वेणुगोपाल पर कर्नाटक के प्रशासन में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाते हुए रविवार को पूछा कि क्या वह राज्य के "सुपर सीएम" हैं।
राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता आर अशोक ने कहा कि कर्नाटक सम्मान, स्वायत्तता और ईमानदार शासन का हकदार है, न कि आलाकमान के "नाटक" का।
उन्होंने कहा, "कर्नाटक राहुल गांधी और उनके गुट की कॉलोनी नहीं है।"
उन्होंने कहा, "कर्नाटक के प्रशासन में 'हस्तक्षेप' करने वाले के सी वेणुगोपाल कौन होते हैं? क्या वे सुपर सीएम हैं या कांग्रेस आलाकमान का मानना है कि चुनी हुई राज्य सरकारें दिल्ली के इशारों पर चलती हैं?"
वेणुगोपाल की टिप्पणियों की अन्य विपक्षी नेताओं और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने कड़ी आलोचना की है।
कांग्रेस नेता के खिलाफ भाजपा की आलोचना पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवकुमार ने स्पष्ट किया कि वेणुगोपाल ने राज्य के प्रशासन में किसी भी तरह से हस्तक्षेप नहीं किया है।
उन्होंने कहा, ‘‘पार्टी के महासचिव के रूप में वेणुगोपाल के पास हमें सलाह देने का अधिकार है।’’ उन्होंने सवाल उठाया कि क्या भाजपा के प्रभारियों और पदाधिकारियों ने उनकी सरकार को सत्ता में रहते हुए सलाह नहीं दी थी।
भाषा शुभम