राष्ट्रपति मुर्मू ने पनडुब्बी आईएनएस वाघशीर पर यात्रा की
जोहेब दिलीप
- 28 Dec 2025, 10:00 PM
- Updated: 10:00 PM
नयी दिल्ली, 28 दिसंबर (भाषा) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रविवार को पश्चिमी तट पर स्वदेशी रूप से निर्मित पनडुब्बी आईएनएस वाघशीर पर दो घंटे से अधिक समय की समुद्री यात्रा की।
मुर्मू पनडुब्बी की सवारी का अनुभव करने वाली दूसरी राष्ट्रपति बनीं। इससे पहले फरवरी 2006 में एपीजे अब्दुल कलाम ने आईएनएस सिंधु रक्षक पर इसी तरह की सवारी की थी।
अधिकारियों के अनुसार, कर्नाटक के कारवार नौसैनिक अड्डे से कलवरी श्रेणी की इस “साइलेंट सेंटिनल” पनडुब्बी में हुई दो घंटे से अधिक की यात्रा के दौरान नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी राष्ट्रपति के साथ मौजूद थे।
राष्ट्रपति सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमांडर भी हैं।
बाद में आगंतुक पुस्तिका में लिखते हुए राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि नौसैनिकों और अधिकारियों के साथ “यात्रा करने, गोता लगाने और समय बिताने” का अनुभव उनके लिए “बहुत विशेष” रहा।
उन्होंने लिखा, “आईएनएस वाघशीर द्वारा किए गए कई सफल परीक्षण व चुनौतीपूर्ण अभियान चालक दल की असाधारण तत्परता और समर्पण को दर्शाते हैं, जो उसके आदर्श वाक्य ‘वीरता वर्चस्व विजय’ के अनुरूप है।”
उन्होंने कहा, “वाघशीर के चालक दल के अनुशासन, आत्मविश्वास और उत्साह को देखकर मुझे पूरा भरोसा है कि हमारी पनडुब्बियां और भारतीय नौसेना किसी भी खतरे और हर परिस्थिति में मुकाबले के लिए तैयार हैं।”
राष्ट्रपति सचिवालय ने कहा कि पनडुब्बी पर राष्ट्रपति की उपस्थिति यह दर्शाती है कि सर्वोच्च कमांडर का सशस्त्र बलों के साथ परिचालन स्तर पर निरंतर जुड़ाव बना हुआ है।
पिछले वर्ष नवंबर में राष्ट्रपति ने स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत पर भारतीय नौसेना के एक परिचालन प्रदर्शन को भी देखा था।
राष्ट्रपति को भारत की समुद्री रणनीति में पनडुब्बी बल की भूमिका, उसकी परिचालन क्षमताओं और राष्ट्रीय समुद्री हितों की रक्षा में उसके योगदान के बारे में जानकारी दी गई।
सचिवालय ने सोशल मीडिया मंच पर जारी पोस्ट में बताया, ‘‘राष्ट्रपति ने कहा कि यह स्वदेशी पनडुब्बी भारतीय नौसेना की व्यावसायिक उत्कृष्टता, युद्ध की तैयारी और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का एक शानदार उदाहरण है।’’
पी75 स्कॉर्पीन परियोजना की छठी और अंतिम पनडुब्बी, आईएनएस वाघशीर को इस साल जनवरी में नौसेना में शामिल किया गया था।
नौसेना अधिकारियों के मुताबिक, यह दुनिया की सबसे शांत और बहु-उद्देशीय डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों में से एक है।
इसे कई तरह के मिशन को अंजाम देने के लिए तैयार किया गया है, जिनमें सतह पर मौजूद दुश्मन से लड़ाई, पनडुब्बी-रोधी अभियान, खुफिया जानकारी जुटाना, क्षेत्र की निगरानी और विशेष अभियान शामिल हैं।
यह ‘वायर-गाइडेड टॉरपीडो’, पोत-रोधी मिसाइलों और उन्नत सोनार प्रणालियों से लैस है। यह पनडुब्बी मॉड्यूलर निर्माण तकनीक पर आधारित है, जिससे भविष्य में इसे एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (एआईपी) तकनीक जैसी प्रौद्योगकियों से एकीकृत करने की सहूलियत मिलती है।
भारतीय नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र में भारत के दीर्घकालिक सुरक्षा हितों को ध्यान में रखते हुए कारवार नौसेना अड्डे को विकसित कर रही है।
राष्ट्रपति मुर्मू ने इस साल के अक्टूबर में अंबाला स्थित भारतीय वायुसेना स्टेशन से राफेल लड़ाकू विमान में उड़ान भरी। इसी के साथ वह भारतीय वायुसेना के दो अलग-अलग लड़ाकू विमानों में उड़ान भरने वाली भारत की पहली राष्ट्रपति बनीं। इससे पहले, उन्होंने अप्रैल 2023 में असम के तेजपुर से सुखोई 30 एमकेआई में उड़ान भरी थी।
भाषा जोहेब