हिप्र में चिकित्सकों की अनिश्चितकालीन हड़ताल से राज्यभर में चिकित्सा सेवाएं प्रभावित
प्रचेता खारी
- 27 Dec 2025, 04:37 PM
- Updated: 04:37 PM
शिमला, 27 दिसंबर (भाषा) हिमाचल प्रदेश में मरीज के साथ कथित रूप से हाथापाई करने पर एक चिकित्सक की सेवा समाप्त किये जाने के विरोध में रेजिडेंट डॉक्टर शनिवार को अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए जिसके कारण राज्य के कई अस्पतालों में आपातकालीन सेवाओं को छोड़कर अन्य चिकित्सा सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो गईं।
इस मामले में चिकित्सकों का तर्क है कि 48 घंटे के भीतर डॉक्टर को बर्खास्त करना अनुचित था और इस कार्रवाई के कारण चिकित्सा जगत में भारी रोष पनप रहा है।
हड़ताल के कारण अस्पतालों में चिकित्सकों की अनुपलब्धता से मरीजों और उनके तीमारदारों, विशेष रूप से दूर-दराज के इलाकों से आने वाले लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
मरीज के साथ आए कृष्ण सिंह ठाकुर ने बताया, ‘‘मैं बृहस्पतिवार को शिमला से लगभग 125 किलोमीटर दूर आनी (कुल्लू) से यहां आया था। लेकिन हड़ताल के कारण यहां कोई डॉक्टर उपलब्ध नहीं है और हमें बहुत परेशानी हो रही है।"
उन्होंने कहा कि कड़ाके की ठंड और नए साल के आसपास पर्यटकों की बढ़ी संख्या के कारण ठहरने नहीं मिलने के कारण परेशानी और बढ़ गई है।
उन्होंने मरीजों के हित के लिए सरकार और चिकित्सकों से इस मामले को जल्द से जल्द हल करने का आग्रह किया।
एक अन्य मरीज के तीमारदार दशवी राम ने शनिवार को 'पीटीआई-वीडियो' से कहा, ‘‘मेरी पत्नी अस्पताल में भर्ती है। उसका एमआरआई (मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग) आज होना था लेकिन हड़ताल के कारण अभी तक नहीं हो सका है। हम चिकित्सकों के काम पर लौटने का इंतजार कर रहे हैं।’’
हड़ताल के कारण शिमला, धर्मशाला, नाहन, हमीरपुर, ऊना और कई अन्य जिलों से स्वास्थ्य सेवाओं के प्रभावित होने की खबरें आ रही हैं।
इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) और राज्य भर के कई अन्य सरकारी अस्पतालों के रेजिडेंट डॉक्टर शुक्रवार को सामूहिक रूप से आकस्मिक अवकाश पर चले गए।
शनिवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा करते हुए 'रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन' ने कहा कि हड़ताल के दौरान नियमित सेवाएं, ऑपरेशन थिएटर और बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) बंद रहेंगे और केवल आपातकालीन सेवाएं ही चालू रहेंगी।
आईजीएमसी के उप चिकित्सा अधीक्षक डॉ. प्रवीण भाटिया ने शनिवार को बताया, ‘‘आपातकालीन सेवाएं सुचारू रूप से जारी हैं। सहायक प्रोफेसरों, एसोसिएट प्रोफेसरों और प्रोफेसरों सहित विशेषज्ञ, अस्पताल में भर्ती मरीजों और ओपीडी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। हालांकि, पहले से निर्धारित सर्जरी के संबंध में कुछ समस्याएं आई हैं।"
इस बीच, चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान निदेशालय ने स्वास्थ्य सेवाओं को निर्बाध रूप से जारी रखने के लिए मानक परिचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की है जिसके तहत विशेषज्ञ को ओपीडी ड्यूटी पर तैनात करना, आपातकालीन ड्यूटी पर मौजूद 'रेजिडेंट डॉक्टर' की चौबीसों घंटे उपलब्धता सुनिश्चित करना और अस्पताल में भर्ती मरीजों को प्राथमिकता देना शामिल है।
‘आईजीएमसी रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन’ के अध्यक्ष डॉ. सोहेल शर्मा ने शनिवार को मीडिया से कहा कि मुख्यमंत्री ने मामले की जांच का भरोसा तो दिया है लेकिन डॉक्टर की सेवा समाप्ति ने पूरे चिकित्सा जगत में एक नकारात्मक संदेश दिया है, जिससे डॉक्टर अपमानित और असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
डॉ. सोहेल शर्मा ने कहा, ‘‘कड़ी मेहनत के बाद कोई डॉक्टर बन पाता है और कई परीक्षाएं पास करनी पड़ती हैं। डॉक्टर भी एक इंसान ही है। हम स्वीकार करते हैं कि डॉक्टर का व्यवहार गलत था जिसके लिए उन्हें छह घंटे के भीतर ही निलंबित कर दिया गया था, लेकिन अनुशासन समिति की रिपोर्ट के आधार पर 48 घंटों में ही सेवा समाप्त कर देना न्यायसंगत नहीं है। हमारी एकमात्र मांग सेवा समाप्ति के आदेश को वापस लेना है।"
डॉ. शर्मा ने पूछा, ‘‘एक डॉक्टर मरीजों की स्थिति को बेहतर समझता है। यदि कोई व्यक्ति यह मांग करने लगे कि डॉक्टर पहले उसे ही देखे वरना उसे नौकरी से निकलवा देगा तो ऐसी स्थिति में एक डॉक्टर काम कैसे कर पाएगा?’’
हिमाचल प्रदेश सरकार ने बुधवार को एक मरीज के साथ कथित तौर पर बदसलूकी करने के आरोप में डॉ. राघव नरूला की सेवाएं समाप्त कर दीं।
यह घटना तब प्रकाश में आई जब इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) के पल्मोनरी वार्ड (फेफड़ा विभाग) में हुए इस विवाद का एक वीडियो सामने आया। इस वीडियो में डॉक्टर नरूला मरीज के चेहरे पर घूंसा मारते हुए दिख रहे हैं जबकि मरीज डॉक्टर को लात मारने की कोशिश कर रहा है।
अर्जुन सिंह ब्रोंकोस्कोपी कराने अस्पताल आया था और प्रक्रिया के बाद सांस लेने में तकलीफ की शिकायत कर रहा था। सिंह ने आरोप लगाया कि विवाद की शुरुआत चिकित्सक द्वारा उसे ‘तुम’ की जगह ‘तू’ कहकर संबोधित करने से हुई। जब सिंह ने इसे लेकर आपत्ति जताई तो नरूला आक्रामक हो गया।
अधिकारियों के अनुसार, चिकित्सक नरूला का कहना है कि सिंह ने उनके तथा उनके परिवार के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल करते हुए झगड़े की शुरुआत सिंह की थी।
उन्होंने बताया कि इस मामले की जांच के लिए बनाई गई समिति की रिपोर्ट में दोनों पक्षों को दोषी माना गया है।
अधिकारियों के अनुसार, जांच समिति ने नरूला के व्यवहार में "दुराचार, दुर्व्यवहार और लोक सेवक के लिए अशोभनीय कृत्य" पाया है।
हिमाचल प्रदेश 'मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन', 'शिमला एसोसिएशन ऑफ मेडिकल एंड डेंटल कॉलेज टीचर्स', 'शिमला प्राइवेट प्रैक्टिशनर्स एसोसिएशन' और 'फेडरेशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन' ने चिकित्सकों के समर्थन में आवाज उठाई है।
इस संस्थाओं ने नरूला की सेवा बहाली की मांग की है। साथ ही, उन्होंने इस घटना की पारदर्शी, समयबद्ध और निष्पक्ष जांच कराने तथा अस्पताल परिसर के भीतर अराजकता फैलाने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ सख्त और त्वरित कार्रवाई की मांग की है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।
इस घटना को लेकर 'रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन' के सदस्यों ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से मुलाकात की थी।
मुख्यमंत्री ने अस्पताल के भीतर चिकित्सकों को कथित रूप से धमकाने और चिकित्सा सेवाओं को प्रभावित करने वाली भीड़ के खिलाफ कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।
उन्होंने अस्पतालों में चिकित्सकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नये दिशा-निर्देश और नियम लाने का भी वादा किया।
हालांकि, चिकित्सक नरूला की बर्खास्तगी के आदेश को रद्द करने की मांग करते हुए हड़ताल को जारी रखे हुए हैं।
भाषा
प्रचेता