मणिपुर: हिंसा भड़कने से पहले चल रही थी 25वीं वर्षगांठ मनाने की तैयारी, अब वीरान पड़ा है स्कूल
जोहेब सुरेश
- 12 May 2024, 09:13 PM
- Updated: 09:13 PM
(फोटो के साथ)
(गुंजन शर्मा)
इंफाल/चुराचांदपुर, 12 मई (भाषा) जमींदोज इमारत और राख बन चुका फर्नीचर...मणिपुर में कुकी और मेइती जातीय समूहों के बीच हिंसा का एक साल पूरा होने के बाद इंफाल में सेंट पीटर स्कूल का कुछ ऐसा ही नजारा है।
कुकी समुदाय से संबंध रखने वाली स्कूल की प्रधानाध्यापक खुपखोमन ने कहा, "हम 2023 में इसका रजत जयंती वर्ष मनाने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन तभी झड़पें शुरू हो गईं। उन्होंने सब कुछ जला दिया।"
खुपखोमन तब से परिवार समेत मेइती बहुल इंफाल घाटी क्षेत्र छोड़कर चुराचांदपुर में रह रही हैं।
मणिपुर में तीन मई, 2023 को हिंसा भड़कने से पहले राज्य बोर्ड से संबद्ध सेंट पीटर स्कूल में कक्षा 10 तक के 800 से अधिक छात्र थे, जो अब बिल्कुल वीरान पड़ा है। हिंसा भड़कने के चलते शैक्षिक संस्थानों, कार्यालयों और कारोबारों को बंद कर दिया गया।
खुपखोमन (62) ने कहा, "हमारे लिए हर दिन ऐसा ही है। स्थिति अप्रत्याशित बनी हुई है और हम अब योजना नहीं बनाते। संकट जारी है, और आगे बढ़ने या पीछे मुड़कर देखने के लिए कुछ भी नहीं है।"
खुपखोमन और उनके दिवंगत पति ने 25 वर्ष पहले कड़ी मेहनत से यह स्कूल बनाया था और इसके परिसर में उनका निवास भी था। वह अब अपने परिवार के साथ किराए के मकान में रहती हैं और दोनों समुदायों के 60,000 से अधिक अन्य लोगों की तरह विस्थापित हैं।
लेकिन खुपखोमन अपने मेइती छात्रों के बारे में जानकारी लेने के लिए अब भी स्कूल के आसपास रहने वाले परिवारों को फोन करती हैं।
उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ''वे दूसरे स्कूलों में दाखिला ले चुके हैं, कुछ ने पढ़ाई छोड़ दी है।''
खुपखोमन ने रजत जयंती समारोह की तैयारियों को याद करते हुए कहा कि नृत्य और गायन प्रस्तुति के लिए अभ्यास चल रहा था। उन्होंने नम आंखों से कहा कि बहुत सारी गतिविधियां थीं, लेकिन फिर एक रात में सब कुछ ख़त्म हो गया।
स्कूल पर चार मई को तड़के भीड़ ने हमला कर दिया था।
उन्होंने कहा, "हमारे पास बस स्कूल ही था, हमने बड़ी मुश्किल से इसे बनाया था, हम वर्षों तक उस जगह पर रहे... 800 से अधिक छात्रों की उम्मीदें हमसे जुड़ी हुई थीं और एक रात में सब कुछ खत्म हो गया। शुरू में मैंने सोचा था कि यह एक सप्ताह के समय में खत्म हो जाएगा और मैं योजना बना रहा थी कि कक्षाएं फिर से शुरू करने से पहले क्या-क्या करना होगा।”
उन्होंने कहा, "अचानक, मैं बेरोजगार, बेघर, निराश हो गई...सब कुछ खो बैठी।"
‘पीटीआई’ की इस संवाददाता ने इस महीने की शुरुआत में इंफाल घाटी के स्कूल और चुराचांदपुर की पहाड़ियों का दौरा किया था।
तीन मई को शुरू हुईं झड़पों में 200 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है।
भाषा जोहेब