रिम्स की जमीन के अवैध आवंटन पर अदालत ने अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिये
प्रशांत सुभाष
- 22 Dec 2025, 10:42 PM
- Updated: 10:42 PM
रांची, 22 दिसंबर (भाषा) झारखंड उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) परिसर के भीतर भूमि के अवैध आवंटन और पंजीकरण के लिए जिम्मेदार सभी अधिकारियों को जवाबदेह ठहराने का निर्देश दिया है। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।
अदालत ने आदेश दिया कि जिन व्यक्तियों और निवासियों को बेदखल किया गया है और जिन्हें परेशानी में डाला गया है, उन्हें सरकारी अधिकारियों और बिल्डरों द्वारा उचित मुआवजा दिया जाए।
मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने ज्योति शर्मा द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया।
अदालत ने पुलिस को उन सरकारी अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का भी निर्देश दिया, जिन पर अस्पताल की जमीन पर अतिक्रमण करने के लिए बिल्डरों के साथ मिलीभगत करने का आरोप है।
अदालत ने 20 दिसंबर को दिए अपने फैसले में कहा है कि भूमि पंजीकरण के लिए जिम्मेदार सरकारी अधिकारियों को अधिक सतर्क रहना चाहिए था, जिससे कई निवासियों को रिम्स द्वारा अधिग्रहित भूमि से बेदखल होने से बचाया जा सकता था।
अदालत ने इस बात पर हैरानी और आक्रोश व्यक्त किया कि रिम्स ने अपने परिसर में निर्माण कार्य होने के दौरान भी चुप्पी साधे रखी।
यह जनहित याचिका 2018 में दायर की गई थी, लेकिन अस्पताल ने कभी भी अदालत को यह सूचित नहीं किया था कि उसकी जमीन पर अतिक्रमण किया गया है।
यह मामला उस वक्त सामने आया जब झारखंड विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव ने अदालत के निर्देशों पर एक जांच की और बताया कि रिम्स परिसर के भीतर 7 एकड़ भूमि पर अतिक्रमण किया गया था।
रिम्स की अतिक्रमित भूमि के बारे में जानकारी मिलने के बाद, उच्च न्यायालय ने तीन दिसंबर को प्रशासन को 72 घंटों के भीतर सभी अतिक्रमणों को हटाने का आदेश दिया।
अदालत के निर्देश ने जिला प्रशासन को प्रेरित किया, जिसने तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी और रिम्स की जमीन पर निर्मित इमारतों को गिराने का अभियान चलाया।
न्यायालय इस तथ्य से भी अवगत था कि संबंधित अंचल के अंचलाधिकारियों और राजस्व अधिकारियों सहित जिला प्रशासन को हर समय अभिलेखों की जानकारी थी।
इस मामले में अगली सुनवाई छह जनवरी 2026 को होगी।
भाषा प्रशांत