असम: जुबिन गर्ग मौत मामले के सभी सात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा शुरू
अमित सुभाष
- 22 Dec 2025, 10:02 PM
- Updated: 10:02 PM
गुवाहाटी, 22 दिसंबर (भाषा) गायक जुबिन गर्ग की मौत के मामले में सात आरोपियों के खिलाफ सोमवार को यहां की एक अदालत में मुकदमा शुरू हुआ और सभी आरोपी वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये पेश हुए।
कामरूप (मेट्रो) जिला एवं सत्र अदालत ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से आरोपियों का परीक्षण करने के बाद सुनवायी की अगली तारीख तीन जनवरी 2026 निर्धारित की।
एक वरिष्ठ वकील ने बताया कि अदालत सुनवायी की अगली तारीख पर आरोप तय करने पर विचार करेगी।
उन्होंने बताया कि अदालत उन्हें प्रत्यक्ष तौर पर या वीडियो कान्फ्रेंस के जरिये पेश होने के लिए कहेगी, ताकि उनसे पूछा जा सके कि क्या वे दोष स्वीकार करते हैं या मामले की सुनवायी के लिए तैयार हैं।
गर्ग सिंगापुर में आयोजित नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल (एनईआईएफ) में भाग लेने गए थे, जहां 19 सितंबर को समुद्र में तैरते समय रहस्यमय परिस्थितियों में उनकी मृत्यु हो गई।
आरोपी - एनईआईएफ प्रमुख आयोजक श्यामकानु महंत, गायक के सचिव सिद्धार्थ शर्मा, उनके रिश्ते के भाई संदीपन गर्ग और दो निजी सुरक्षा अधिकारी (पीएसओ) नंदेश्वर बोरा और परेश बैश्य बकसा जेल से अदालत में पेश हुए, जबकि संगीतकार शेखरज्योति गोस्वामी और गायक अमृतप्रभा महंत हाफलॉन्ग जेल से ऑनलाइन पेश हुए।
गायक की बहन पॉल्मी बड़ठाकुर सुनवाई के दौरान अदालत में मौजूद थीं और बाद में पत्रकारों से कहा कि परिवार को न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है।
इस मामले की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) ने 12 दिसंबर को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष दाखिल आरोपपत्र में महंत, शर्मा, गोस्वामी और अमृतप्रभा पर हत्या का आरोप लगाया है।
गायक के रिश्ते के भाई एवं निलंबित असम पुलिस अधिकारी संदीपन गर्ग पर गैर इरादतन हत्या का आरोप लगाया गया है, जबकि दो पीएसओ पर आपराधिक साजिश रचने और धन या संपत्ति का गबन करके आपराधिक विश्वासघात का आरोप है।
एसआईटी द्वारा आरोपपत्र दाखिल किए जाने के बाद मामले की पहली सुनवाई 16 दिसंबर को यहां मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) अदालत में हुई। इसके बाद सीजेएम ने मामले को मुकदमा शुरू करने के लिए सत्र अदालत को सौंप दिया।
सोलह दिसंबर की सुनवाई के दौरान भी आरोपी आनलाइन पेश हुए थे, क्योंकि पुलिस ने उन्हें भौतिक रूप से पेश करने पर कानून-व्यवस्था की समस्या होने की आशंका जतायी थी।
आरोपपत्र की प्रति पहली सुनवाई से पहले जेल प्रशासन द्वारा आरोपियों को सौंप दी गई और उनके परिवार के सदस्यों को दस्तावेज की प्रतियां एक-एक पेन ड्राइव में उपलब्ध कराई गईं।
आरोपियों पर लगे आरोपों के बारे में पूछे जाने पर बड़ठाकुर ने कहा कि उन्हें अभी तक आरोपपत्र की प्रमाणित प्रति प्राप्त नहीं हुई है।
हालांकि, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने आरोपियों का प्रतिनिधित्व करने के लिए अधिवक्ता ध्रुवज्योति दास को नियुक्त किया है, लेकिन सोमवार की सुनवाई के दौरान अमृतप्रभा की ओर से एक स्वतंत्र वकील भी पेश हुआ।
भाषा अमित