अरावली को 'बचाने' नहीं, 'बेचने' की साजिश: अशोक गहलोत
पृथ्वी राजकुमार
- 22 Dec 2025, 09:52 PM
- Updated: 09:52 PM
जयपुर, 22 दिसंबर (भाषा) राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोमवार को केंद्र सरकार पर सुरक्षा की आड़ में अरावली को "बेचने" की साजिश रचने का आरोप लगाते कहा कि खनन कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए संस्थागत कब्जा किया जा रहा है एवं पर्यावरण सुरक्षा उपायों को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।
गहलोत ने आरोप लगाया, ‘‘यह सारी कवायद अरावली को 'बचाने' की नहीं, बल्कि 'बेचने' की साजिश है और इससे केंद्र सरकार की पोल खुल गयी है।’’
उन्होंने केंद्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव के इस दावे को पूरी तरह भ्रामक और तथ्यों से परे बताया है कि अरावली के केवल 0.19 प्रतिशत हिस्से पर ही खनन हो सकता है।
उन्होंने 2025 में ही केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा सरिस्का के संरक्षित क्षेत्र में बदलाव के प्रयास को लेकर उनकी मंशा पर भी सवाल उठाया।
उच्चतम न्यायालय ने 20 नवंबर 2025 को पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत एक समिति की अरावली पहाड़ियों और पर्वतमालाओं की परिभाषा पर दी गई सिफारिशों को स्वीकार कर लिया था।
नयी परिभाषा के तहत, ‘अरावली पहाड़ी’ अपने आसपास के इलाके से कम से कम 100 मीटर की ऊंचाई वाली एक भू-आकृति है और ‘अरावली रेंज’ एक दूसरे के 500 मीटर के भीतर दो या दो से अधिक ऐसी पहाड़ियों का समूह है।
इससे बड़ा विवाद खड़ा हो गया है क्योंकि कांग्रेस नेता और विशेषज्ञ दावा कर रहे हैं कि यह नई परिभाषा, सुरक्षा की कमी के कारण अरावली पर्वतमाला के 90 प्रतिशत हिस्से को खत्म कर देगी।
गहलोत ने कहा कि भाजपा जनता को आंकड़ों में उलझाकर बरगलाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि अरावली की '100 मीटर' वाली नई परिभाषा को अकेले नहीं, बल्कि दो अन्य बड़े फैसलों के साथ जोड़कर देखा जाना चाहिए जो यह साबित करते हैं कि यह पर्यावरण संरक्षण नहीं, बल्कि संस्थाओं पर कब्जा (इंस्टीट्यूशनल कैप्चर) कर अरावली को खनन माफिया को देने की तैयारी है।
गहलोत ने दावा किया कि 2002 में पर्यावरण संरक्षण के लिए बनी केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) को पांच सितंबर 2023 को उच्चतम न्यायालय से हटाकर सरकार के अंदर लाते ही शक्तिविहीन कर दिया गया।
उन्होंने कहा, ‘‘पहले सीईसी के सदस्य उच्चतम न्यायालय की मंजूरी से नियुक्त होते थे, लेकिन अब सदस्यों को चुनने का पूरा अधिकार केंद्र सरकार ने अपने हाथ में ले लिया जिससे सीईसी केन्द्र सरकार के इशारे पर काम करने लगी है।’’
सरिस्का का ज़िक्र करते हुए गहलोत ने कहा कि केंद्रीय मंत्री यादव का यह दावा कि इस नए फैसले के बाद भी अरावली के केवल 0.19प्रतिशत हिस्से पर ही नई खनन हो सकता है क्योंकि बाकी जगह बाघ संरक्षित क्षेत्र, संरक्षित क्षेत्र आदि हैं, अपूर्ण है।
उन्होंने कहा,‘‘सरक्षित क्षेत्र में खनन के प्रयास की सरकार की मंशा का सबसे बड़ा उदाहरण सरिस्का के ‘क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट (सीटीएच)’ में बदलाव का प्रयास है।
गहलोत ने कहा कि राजस्थान सरकार ने सरिस्का के लिए 881 वर्ग किलोमीटर इलाके को ‘क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट (सीटीएच)’ घोषित किया जिससे इस क्षेत्र के एक किलोमीटर में खनन प्रतिबंधित है लेकिन इसी वर्ष राजस्थान की भाजपा सरकार ने सरिस्का के सीटीएच की ‘बाउंड्री’ बदलने का प्रस्ताव तैयार किया लेकिन उच्चतम न्यायालय ने कड़ी फटकार लगाते हुए इसपर रोक लगा दी।
भाषा पृथ्वी