‘बेदाग’ गैर-शिक्षण कर्मियों ने नौकरी बहाली की मांग को लेकर बंगाल शिक्षा विभाग मुख्यालय तक मार्च किया
तान्या दिलीप
- 22 Dec 2025, 09:35 PM
- Updated: 09:35 PM
कोलकाता, 22 दिसंबर (भाषा) पश्चिम बंगाल के स्कूलों में कार्यरत सैकड़ों गैर-शिक्षण कर्मचारियों ने सोमवार को राज्य शिक्षा विभाग के मुख्यालय विकास भवन तक मार्च किया। उन्होंने अपनी नौकरी बहाल करने की मांग की और किसी भी नई परीक्षा प्रक्रिया के दायरे में लाए जाने के किसी भी कदम का विरोध किया।
इन गैर-शिक्षण कर्मचारियों में वे लोग शामिल थे, जिनकी नौकरी घोटाले में प्रत्यक्ष संलिप्तता साबित नहीं हुई है।
‘समूह सी’ और ‘समूह डी’ श्रेणियों से संबंधित प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि उन्होंने बिना किसी गलत काम के अपनी नौकरी हासिल की थी, लेकिन "संस्थागत भ्रष्टाचार" के कारण उनकी आजीविका छिन गई।
राज्य द्वारा प्रायोजित और सहायता प्राप्त स्कूलों के कुल 25,753 शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों ने अपनी नौकरी खो दी, जब उच्चतम न्यायालय ने 2016 की राज्य स्तरीय चयन परीक्षा (एसएलएसटी) में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं पाईं और तीन अप्रैल को पूरे पैनल को रद्द कर दिया।
बाद में, उच्चतम न्यायालय ने पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग (डब्ल्यूबीएसएससी) को नए सिरे से भर्ती की व्यवस्था करने और इस प्रक्रिया को इस वर्ष 31 दिसंबर तक पूरा करने का निर्देश दिया, जिसे बाद में बढ़ाकर 31 अगस्त, 2026 कर दिया गया। उस दिन तक, 15,403 "दागी" शिक्षकों को काम करने की अनुमति दी गई थी। हालांकि, इस आदेश के बाद से गैर-शिक्षण कर्मचारियों को कोई राहत नहीं दी गई है।
सोमवार को पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को विकास भवन परिसर में प्रवेश करने से रोक दिया, यह कहते हुए कि रैली के लिए अनुमति नहीं थी और अधिकारियों से कोई मुलाकात का समय भी तय नहीं था। इस रोक के बाद, प्रदर्शनकारी पास की सड़क पर बैठ गए।
एक प्रर्दशनकारी ने कहा, “हम नौ महीने से बिना वेतन के काम से बाहर हैं। अगर योग्य और बेदाग शिक्षण कर्मचारी काम करते रह सकते हैं, तो हम नौकरी से बाहर क्यों हैं? और जब हम योग्य सूची में शामिल हैं, तो हमें किसी भी परीक्षा में क्यों शामिल होना चाहिए?”
एक "बेदाग" शिक्षण या गैर-शिक्षण कर्मचारी से तात्पर्य ऐसे व्यक्ति से है, जिसकी स्कूल नौकरी घोटाले में प्रत्यक्ष संलिप्तता साबित नहीं हुई है।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे अपनी मांगें रखने के लिए एसएससी के अध्यक्ष और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से मिलना चाहते थे, लेकिन उन्हें शांतिपूर्ण मार्च करने से रोक दिया गया।
कुल मिलाकर, 3,394 गैर-शिक्षण कर्मचारियों को "बेदाग" श्रेणी में रखा गया था। इन्हें 2016 के पैनल में अनियमितताओं से जुड़ी नियुक्तियों को रद्द किए जाने के बाद अपनी नौकरी गंवानी पड़ी।
उच्चतम न्यायालय के पहले के एक फैसले के अनुसार, 2016 के पैनल के "बेदाग" गैर-शिक्षण कर्मचारी नई भर्ती प्रक्रिया में भाग लेने के पात्र हैं, जबकि जिन्हें स्पष्ट रूप से "दागी" के रूप में पहचाना गया है, वे पात्र नहीं हैं।
भाषा तान्या