नेतृत्व मुद्दा: शिवकुमार ने कहा, कांग्रेस आलाकमान हमें 'उचित समय' पर बुलाएगा
शुभम सुभाष
- 20 Dec 2025, 11:53 PM
- Updated: 11:53 PM
बेंगलुरु, 20 दिसंबर (भाषा) कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया से जुड़ा नेतृत्व का मुद्दा फिर से सामने आने के बाद उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने शनिवार को कहा कि कांग्रेस आलाकमान ने दोनों नेताओं को बता दिया है कि इस मामले पर चर्चा करने के लिए उन्हें दिल्ली कब बुलाया जाएगा।
शिवकुमार ने कहा कि बुलाए जाने पर वे दोनों दिल्ली जाकर आलाकमान से मिलेंगे।
हाल में समाप्त हुए विधानमंडल सत्र के बाद पार्टी आलाकमान से मिलने के लिए शिवकुमार और सिद्धरमैया की संभावित यात्रा के बारे में पूछे जाने पर उपमुख्यमंत्री ने पत्रकारों से कहा, "मैं आपको सूचित करूंगा, बिना बताए कुछ नहीं करूंगा। मैं आपसे छिपूंगा नहीं।"
जब शिवकुमार से पूछा गया कि क्या उन्हें और मुख्यमंत्री को दिल्ली बुलाया गया है, तो उपमुख्यमंत्री ने कहा, "उन्होंने हम दोनों से कुछ कहा है, उन्होंने फोन पर बताया है कि वे हमें कब बुलाएंगे। हम दोनों जाएंगे।"
कांग्रेस की कर्नाटक इकाई के अध्यक्ष शिवकुमार ने कहा, "उन्होंने (आलाकमान ने) कहा है कि वे उचित समय पर हम दोनों को बुलाएंगे, हम बुलाये जाने का इंतजार करेंगे।"
शिवकुमार के इस बयान से एक दिन पहले सिद्धरमैया ने विधानसभा में कहा था कि वह अपने पद पर बने रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा था कि कांग्रेस आलाकमान "मेरे पक्ष में" है और इस बात पर जोर दिया था कि उनके और उनके उपमुख्यमंत्री के बीच सत्ता-साझाकरण को लेकर 2023 में हुए एक कथित समझौते के अनुसार, उनके केवल ढाई साल तक सत्ता में बने रहने के बारे में कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
शिवकुमार ने शुक्रवार को कहा था कि उन्होंने और मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने कांग्रेस आलाकमान की भागीदारी में एक समझौते पर सहमति जताई है और वे दोनों इसका पालन करेंगे।
कांग्रेस नीत सरकार के पांच साल के कार्यकाल का आधा सफर तय करने के साथ राज्य में मुख्यमंत्री बदलने की अटकलों के बीच, सत्तारूढ़ पार्टी के भीतर खींचतान तेज हो गई है। 2023 में सिद्धरमैया और शिवकुमार के बीच हुए कथित "सत्ता-साझाकरण" समझौते ने इन अटकलों को और हवा दी।
इस बीच, कुछ 'नगा साधुओं' ने उपमुख्यमंत्री के आवास पर जाकर उन्हें आशीर्वाद दिया।
इसके अलावा, एक आश्चर्यजनक घटनाक्रम में शिवकुमार ने शनिवार को यहां एक निजी अतिथिगृह में पूर्व मंत्री और वरिष्ठ विधायक के एन राजन्ना से मुलाकात की। राजन्ना को सिद्धरमैया का करीबी माना जाता है।
शिवकुमार ने इससे पहले "सिद्धरमैया खेमे" के नेताओं जैसे मंत्री सतीश जारकीहोली, जी परमेश्वर, के जे जॉर्ज से मुलाकात की थी।
राजन्ना के साथ हुई यह मुलाकात काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दरअसल, वह खुले तौर पर कहते रहे हैं कि सिद्धरमैया को पूरे पांच साल तक मुख्यमंत्री रहना चाहिए और वे रहेंगे, क्योंकि उन्हें पार्टी विधायकों द्वारा कांग्रेस विधायक दल के नेता के रूप में चुना गया है। उन्होंने यह भी कहा है कि शिवकुमार 2028 के विधानसभा चुनावों में पार्टी का नेतृत्व कर सकते हैं और मुख्यमंत्री बन सकते हैं।
राजन्ना ने यह भी कहा कि अगर शिवकुमार को मुख्यमंत्री पद मिलता है तो वह उनके मंत्रिमंडल में मंत्री नहीं बनेंगे। राजन्ना प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद (जो वर्तमान में शिवकुमार के पास है) में बदलाव और राज्य में तीन और उपमुख्यमंत्री नियुक्त करने की मांग को लेकर मुखर रहे हैं।
सहकारिता मंत्री रहे राजन्ना को कांग्रेस आलाकमान के निर्देशानुसार इस साल की शुरुआत में मंत्रिमंडल से हटा दिया गया था। उनकी कुछ टिप्पणियां (विशेष रूप से कांग्रेस नेता राहुल गांधी के "वोट चोरी" के आरोपों) बर्खास्तगी का कारण बताई गई थीं।
जल संसाधन मंत्री शिवकुमार ने बताया कि वह मंगलवार को विभिन्न केंद्रीय मंत्रियों से मिलने के लिए दिल्ली जा रहे हैं। उन्होंने कहा, "केंद्र सरकार के जल संसाधन विभाग ने नदियों को जोड़ने के संबंध में हमें बुलाया है।"
केंद्र में नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) को बदलने और उससे महात्मा गांधी का नाम हटाने को लेकर, शिवकुमार ने केंद्र पर राष्ट्रपिता का अपमान करने का आरोप लगाया।
भाषा
शुभम