कर्नाटक: धर्मस्थल मामले में आरोपी चिनैया ने पुलिस सुरक्षा की मांग की
सं राजेंद्र जितेंद्र सुभाष
- 20 Dec 2025, 07:46 PM
- Updated: 07:46 PM
मंगलुरु, 20 दिसंबर (भाषा) धर्मस्थल मामले में झूठी गवाही देने के आरोप में गिरफ्तार होने और फिर जमानत पर रिहा होने वाले सीएन चिनैया ने अपने और परिजनों के जीवन को खतरा होने का दावा करते हुए पांच लोगों के खिलाफ पुलिस में शिकायत की है।
पुलिस ने शनिवार को बताया कि चिनैया ने महेश शेट्टी तिमारोडी, गिरीश मट्टेनवर, टी जयंत, विट्टल गौड़ा और यूट्यूबर समीर एमडी से जान को खतरा होने की शिकायत की है।
यूट्यूबर समीर एमडी ने नौ अक्टूबर 2012 को धर्मस्थल के निकट 17 वर्षीय एक किशोरी से कथित दुष्कर्म व उसकी हत्या के मामले में न्याय की मांग करते हुए चलाये गए अभियान की अगुवाई की थी।
पुलिस ने कहा कि चिनैया का दावा है कि शिकायत में नामजद लोग धर्मस्थल में दुष्कर्म, हत्या और शवों को दफनाने के आरोपों के संबंध में बयान वापस लेने की वजह से उसे और उसकी पत्नी को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
शिकायत में नामजद लोगों पर धर्मस्थल मामले में झूठी शिकायत दर्ज कराने के लिए चिनैया पर दबाव बनाने का आरोप है। 18 दिसंबर को शिवमोगा जेल से जमानत पर रिहा हुए चिनैया ने उसी शाम धर्मस्थल पुलिस थाना के अधिकारियों से संपर्क किया था।
पुलिस ने बताया कि चिनैया ने अधिकारियों से उसे और उसके परिवार को सुरक्षा उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। बेलथांगडी पुलिस ने इस मामले में शिकायत दर्ज की है।
दक्षिण कन्नड़ के पुलिस उपाधीक्षक अरुण के. ने कहा कि इस शिकायत के संबंध में आगे की कानूनी प्रक्रियाएं की जाएंगी।
नवंबर में दाखिल विशेष जांच दल (एसआईटी) के 3,900 पृष्ठों के आरोप पत्र में चिनैया और चार अन्य लोगों -- महेश शेट्टी तिमारोडी, गिरीश मट्टेनवर, टी जयंत और विट्टल गौड़ा पर झूठा साक्ष्य देने, धोखाधड़ी करने और षडयंत्र रचने का आरोप है।
जांच में 18 स्थानों पर की गई खुदाई में, दुष्कर्म और हत्या के बाद शवों को दफनाने का कोई साक्ष्य नहीं पाया गया और वहां मिले ज्यादातर कंकाल पुरुषों के थे। बाद में चिनैया ने स्वीकार किया कि उसने मजबूरी में गलत बयान दिया था।
पूर्व सफाईकर्मी चिनैया को 23 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था। चिनैया पर आरोप है कि उसने 1995 और 2014 के बीच कई शवों को धर्मस्थल में दफनाया था।
यह मामला कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिला स्थित धर्मस्थल नामक स्थान पर, वर्ष 2017 और 2019 के बीच पोस्टमार्टम समेत आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं के बिना कथित तौर पर कई अज्ञात शवों को दफनाए जाने से संबंधित है।
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सं राजेंद्र जितेंद्र