पैकेट बंद सामान पर खाद्य लेबल भ्रामक हो सकता है : आईसीएमआर
गोला नेत्रपाल
- 12 May 2024, 05:38 PM
- Updated: 05:38 PM
(पायल बनर्जी)
नयी दिल्ली, 12 मई (भाषा) शीर्ष स्वास्थ्य अनुसंधान निकाय भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने कहा है कि पैकेट बंद सामान पर खाद्य लेबल भ्रामक हो सकता है। इसने जोर दिया कि उपभोक्ताओं को सामान खरीदते वक्त स्वस्थ विकल्प के लिए उस पर लिखी जानकारी को सावधानीपूर्वक पढ़ना चाहिए।
आईसीएमआर ने यह भी कहा कि ‘शुगर-फ्री’ होने का दावा करने वाले खाद्य पदार्थ वसा से भरे हो सकते हैं जबकि डिब्बाबंद फलों के रस में फल का केवल 10 फीसदी तत्व ही हो सकता है।
हाल ही में जारी किए आहार संबंधी दिशा निर्देशों में आईसीएमआर ने कहा कि पैकेट वाले खाद्य पदार्थ पर स्वास्थ्य संबंधी दावे उपभोक्ता का ध्यान आकर्षित करने के लिए और उन्हें इस बात पर राजी करने के लिए किए जा सकते हैं कि यह उत्पाद सेहत के लिहाज से अच्छा है।
आईसीएमआर के तहत आने वाले हैदराबाद स्थित राष्ट्रीय पोषण संस्थान (एनआईएन) द्वारा भारतीयों के लिए जारी आहार संबंधी दिशा निर्देशों में कहा गया है, ‘‘भारत खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के कड़े नियम हैं लेकिन लेबल पर लिखी सूचना भ्रामक हो सकती है।’’
एनआईएन ने कुछ उदाहरण देते हुए कहा कि किसी खाद्य उत्पाद को तभी ‘‘प्राकृतिक’’ कहा जा सकता है जब उसमें कोई रंग और स्वाद (फ्लेवर) या कृत्रिम पदार्थ न मिलाया गया हो और वह न्यूनतम प्रसंस्करण से गुजरा हो।
इसने कहा, ‘‘इस शब्द (प्राकृतिक) का प्रयोग प्राय: धड़ल्ले से किया जाता है। यह किसी मिश्रण में एक या दो प्राकृतिक सामग्री की पहचान के लिए विनिर्माताओं द्वारा अकसर इस्तेमाल किया जाता है और यह भ्रामक हो सकता है।’’
एनआईएन ने लोगों से लेबल खासतौर से सामग्री और अन्य जानकारी के बारे में सावधानीपूर्वक पढ़ने का अनुरोध किया।
‘असली फल या फलों के रस’ के दावे को लेकर एनआईएन ने कहा कि एफएसएसएआई के नियम के अनुसार, कोई भी खाद्य पदार्थ चाहे वह बहुत कम मात्रा में हो, उदाहरण के लिए केवल 10 फीसदी या उससे कम फल तत्व वाले उत्पाद को यह लिखने की अनुमति दी जाती है कि वह फलों के गूदे या रस से बना है।
इसने कहा कि लेकिन ‘रियल फ्रूट’ होने का दावा करने वाले उत्पाद में चीनी और अन्य तत्व मिले हो सकते हैं और उसमें असली फल का केवल 10 फीसदी तत्व हो सकता है।
इसी तरह ‘मेड विद होल ग्रेन’ के लिए इसने कहा कि इन शब्दों की गलत व्याख्या की जा सकती है।
एनआईएन ने कहा, ‘‘शुगर-फ्री खाद्य पदार्थ में वसा, परिष्कृत अनाज (सफेद आटा, स्टार्च) मिला हो सकता है और बल्कि छिपी हुई शुगर (माल्टीटोल, फ्रुकटोस, कॉर्न, सिरप) हो सकती है।’’
दिशा निर्देशों के अनुसार, विनिर्माता अपने खाद्य उत्पादों के बारे में गलत और अपूर्ण दावे करने के लिए लेबल का इस्तेमाल करते हैं।
भारतीयों के लिए आहार संबंधी दिशा निर्देश आईसीएमआर-एनआईएन की निदेशक डॉ. हेमलता आर की अगुवाई वाली विशेषज्ञों की बहु-विषयक समिति द्वारा तैयार किए गए हैं।
भाषा
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