भारत की टी20 विश्व कप टीम के खिलाड़ियों पर एक नजर
नमिता आनन्द
- 20 Dec 2025, 06:16 PM
- Updated: 06:16 PM
नयी दिल्ली, 20 दिसंबर (भाषा) भारत में होने वाले टी20 विश्व कप के लिए चयनकर्ताओं ने खिलाड़ियों की फॉर्म और बहुमुखी प्रतिभा के आधार पर टीम का चयन किया है।
पीटीआई उन खिलाड़ियों के प्रोफाइल पर एक नजर डाल रहा है जिन्हें अगले साल सात फरवरी से शुरू होने वाले इस वैश्विक टूर्नामेंट में भारत के अभियान की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
सूर्यकुमार यादव
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क्रिकेट के छोटे प्रारूप में खेलने वाले बेहतरीन खिलाड़ियों में से एक भारतीय कप्तान अभी अपने करियर की सबसे खराब फॉर्म में हैं। पिछले 14 महीनों में सूर्यकुमार ने एक भी अर्धशतक नहीं जड़ा है और उनका स्ट्राइक रेट 125 से नीचे गिर गया है।
टी20 विश्व कप में भारतीय टीम को अपने कप्तान से उम्मीद होगी कि वह अच्छा प्रदर्शन करें। जहां तक उनकी कप्तानी की बात है तो मुकाबलों में जीत दिलाने का उनका प्रतिशत 83 उनके नेतृत्व का सबूत है। लेकिन हर कप्तान उदाहरण पेश करके नेतृत्व करना चाहता है और सूर्यकुमार भी टी20 विश्व कप में ऐसा ही करना चाहेंगे।
अभिषेक शर्मा
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वह खिलाड़ी जिसने नयी पीढ़ी के लिए टी20 बल्लेबाजी के तरीके को पूरी तरह से बदल दिया है। अभिषेक की शुरुआत भारत के पावरप्ले में नियंत्रण में अहम होगी।
अपने करियर के बेहतरीन दौर में दुनिया के नंबर एक टी20 बल्लेबाज ने लगभग 200 के स्ट्राइक रेट के साथ दुनिया भर के सलामी बल्लेबाजों के लिए एक अलग ही मानक तय किया है।
तिलक वर्मा
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अभिषेक शर्मा के बाद तिलक टी20 विश्व कप में सबसे अहम शीर्ष क्रम बल्लेबाज हैं। टी20 एक तेज-तर्रार प्रारूप है लेकिन तिलक की बल्लेबाजी तकनीक और तनाव भरी परिस्थितियों में शांत रहने की स्वाभाविक क्षमता एक बेहतरीन मिश्रण है।
पाकिस्तान के खिलाफ एशिया कप फाइनल और हारिस रऊफ की गेंद पर उस आखिरी ओवर के छक्के को याद करें। वह टीम की जरूरत के हिसाब से तीसरे या चौथे नंबर पर बल्लेबाजी कर सकते हैं और शायद टी20 टीम0 में सबसे अच्छे आउटफील्डर हैं।
हार्दिक पंड्या
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अगर पिछले नौ साल में भारतीय क्रिकेट में संतुलन का कोई पर्यायवाची होता तो वह पंड्या ही होते। जब भी वह टी20 या वनडे से बाहर रहे हैं, भारत को एक आदर्श संयोजन बनाने में मुश्किल हुई है।
कपिल देव से तुलना थोड़ी अनुचित हो सकती है, खासकर उनके खेल को देखते हुए। लेकिन छोटे प्रारूप में उनके क्लीन और जबरदस्त हिट कपिल की याद दिलाते हैं। उनकी तेज गेंदबाजी टीम को एक अतिरिक्त बल्लेबाज या गेंदबाज खिलाने का मौका देती है।
शिवम दुबे
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भारत की सपाट पिचों पर या थोड़ी मुश्किल पिचों पर दुबे इस भारतीय टीम के लिए काफी अहम हैं। वह ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्हें आप नौ से 16 ओवर के बीच चाहेंगे जब मुख्य रूप से स्पिनर गेंदबाजर कर रहे हों क्योंकि वह उपमहाद्वीप की पिचों पर धीमी गति के गेंदबाजों की धुनाई कर सकते हैं।
लेग स्पिनरों के खिलाफ खेलने में उनकी महारत ऐसी है कि जब वह क्रीज पर होते हैं तो एडम जम्पा, अबरार अहमद या वानिंदु हसरंगा को उनके कप्तान गेंदबाजी से दूर रखने की कोशिश करते हैं। उनकी गेंदबाजी में जबरदस्त सुधार हुआ है और धीमी पिचों पर वह आसानी से दो ओवर डाल सकते हैं।
संजू सैमसन
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भारत के विकेटकीपर-बल्लेबाज अब शुभमन गिल के टीम से बाहर होने के बाद आखिरकार राहत की सांस ले सकते हैं क्योंकि इससे बल्लेबाजी क्रम में एक जगह खाली हो गई है।
केरल का यह स्टार 2024 में 12 पारियों में 436 रन बनाकर भारत के लिए सबसे ज्यादा रन बनाने वाला खिलाड़ी था। गिल के सलामी बल्लेबाज के तौर पर वापसी के बाद वह बल्लेबाजी क्रम में नीचे चला गया।
टीम प्रबंधन ने जितेश शर्मा को निचले क्रम में उपयोगिता के कारण पसंद किया था जिससे सैमसन के मौके सीमित हो गए थे। अब सैमसन वही करना चाहेंगे जो वह सबसे अच्छा करते हैं यानी रन बनाना। भले ही उन्हें एक विशेषज्ञ बल्लेबाज के रूप में खेलने के लिए कहा जाए और विकेटकीपिंग शायद इशान किशन को मिले।
इशान किशन
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झारखंड के इस खिलाड़ी ने जबरदस्त वापसी की है। अपने राज्य को पहली बार सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी का खिताब दिलाने के बाद उन्होंने दो साल से ज्यादा समय बाद टीम में वापसी की है।
एक समय सभी प्रारूप में नियमित खिलाड़ी रहे किशन टीम से बाहर हो गए, उन्होंने अपना केंद्रीय अनुबंध खो दिया और उनकी ‘प्रतिबद्धता’ पर सवालों का सामना करना पड़ा।
उन्होंने मैदान पर काउंटी क्रिकेट और घरेलू सर्किट में मेहनत करके जवाब दिया। किशन सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में शीर्ष स्कोरर रहे और फाइनल में शतक लगाकर राष्ट्रीय टीम में अपनी जगह पक्की की।
कुलदीप यादव
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यह चतुर चाइनामैन स्पिन विभाग में भारत का ‘एक्स-फैक्टर’ बना हुआ है। बाएं हाथ के कलाई के स्पिनर कुलदीप सितंबर में भारत के एशिया कप जीतने के अभियान में अहम थे और 9.29 के शानदार औसत से सात विकेट लेकर सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज बने।
भारतीय पिचों पर कुलदीप की गेंदबाजी, खासकर उनकी ‘रांग-उन’ निर्णायक साबित हो सकती हैं क्योंकि भारत तीन स्पिनरों के साथ खेलने की सोच रहा है।
जसप्रीत बुमराह
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किसी भी पिच पर किसी भी हालात में गेंद से मैच जिताने वाले खिलाड़ी बुमराह के प्रदर्शन का सीधा संबंध भारत के खिताब का बचाव करने से होगा।
बुमराह के पास कटर, डिपर, स्लोअर बॉल, बाउंसर, यॉर्कर सब कुछ है जिसका एक तेज गेंदबाज सपना देखता है। वह चार ओवर के सीमित ओवरों में उतना ही खतरनाक हो सकता है जितना कि लंबे प्रारूप में।
अक्षर पटेल
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टीम के उप कप्तान की अतिरिक्त जिम्मेदारी मिलने के बाद अक्षर को गेंद और बल्ले दोनों से असर डालना होगा। उनकी बाएं हाथ की स्पिन सटीक है, वहीं यह बांए हाथ का बल्लेबाज बल्लेबाजी क्रम में कहीं भी बल्लेबाजी करने के लिए मानसिक और तकनीकी रूप से सक्षम है जो उन्हें अहम खिलाड़ी बनाता है।
अर्शदीप सिंह
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यह बाएं हाथ का गेंदबाज बुमराह के लिए एकदम सही जोड़ीदार है। हालांकि अर्शदीप में अपने सीनियर जैसा जादू नहीं है।
लेकिन शांत स्वभाव और अपनी गेंद की गति बदलने की क्षमता उन्हें पावरप्ले के साथ अंतिम ओवरों में भी बल्लेबाजों के लिए एक बड़ा खतरा बनाती है।
वरुण चक्रवर्ती
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उनकी गेंदबाजी को समझाना मुश्किल है। एक्शन में कोई खास बदलाव किए बिना यह स्पिनर बल्लेबाजों को परेशान करने के लिए कई तरह की गेंदें फेंक सकता है। उनके हाथों से गेंद को पढ़ना काफी मुश्किल है और उनकी स्वाभाविक तेजी उन्हें पिच पर भी खेलना मुश्किल बनाती है।
अपनी तरकीबों के अथाह पिटारे के साथ चक्रवर्ती अब और भी मुश्किल खिलाड़ी बन गए हैं।
हर्षित राणा
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मुख्य कोच गौतम गंभीर के तरजीह देने की बातों के बीच अब सभी प्रारूप में नियमित रूप से खेलने वाले इस भारतीय तेज गेंदबाज पर लगातार नजर बनी हुई है।
जसप्रीत बुमराह और अर्शदीप सिंह के बाद रिजर्व तेज गेंदबाज के तौर पर चुने गए राणा को एक बार फिर अधिक अनुभवी मोहम्मद सिराज पर तरजीह दी गई है। शीर्ष स्तर पर उनका प्रदर्शन मिला-जुला रहा है।
सीमित भूमिका की उम्मीद के साथ राणा की भूमिका पर एक बार फिर नजर रहेगी।
वाशिंगटन सुंदर
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तमिलनाडु के इस ऑफ-स्पिनर ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पहले टेस्ट में तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी की थी जो टीम में एक और ऑलराउंडर विकल्प प्रदान करता है।
उन्होंने 58 मैचों के 24 टी20 अंतरराष्ट्रीय पारियों में एक अर्धशतक बनाया है और 22.76 के औसत से 51 विकेट लिए हैं लेकिन हाल के मौके सीमित रहे हैं। वॉशिंगटन पिछले 10 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच में से सिर्फ चार में ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेले हैं और हो सकता है कि एक बार फिर उन्हें बेंच पर बैठना पड़े।
रिंकू सिंह
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अलीगढ़ के एक साधारण परिवार से भारत की टी20 विश्व कप टीम तक रिंकू सिंह का सफर निडर फिनिशिंग और दबाव में शानदार धैर्य की वजह से संभव हुआ है।
रिंकू ने लगातार इंडियन प्रीमियर लीग में अच्छे प्रदर्शन से राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई। उन्होंने टीम प्रबंधन का भरोसा एक तय फिनिशर के तौर पर जीता है जो दबाव झेलने और आखिरी ओवरों में तेजी से रन बनाने में माहिर हैं।
भाषा नमिता आनन्द