वाम-कांग्रेस गठबंधन इस बार बेहतर प्रदर्शन करेगा : मोहम्मद सलीम
शफीक नरेश
- 12 May 2024, 04:39 PM
- Updated: 04:39 PM
(सौगत मुखोपाध्याय)
कोलकाता, 12 मई (भाषा) माकपा पोलित ब्यूरो के सदस्य एवं पार्टी की पश्चिम बंगाल इकाई के सचिव मोहम्मद सलीम ने दावा किया है कि राज्य में वाम-कांग्रेस गठबंधन 2021 के विधानसभा चुनाव और 2019 के संसदीय चुनाव के दौरान किए गए प्रयासों की तुलना में इस बार बहुत बेहतर प्रदर्शन करेगा क्योंकि गठबंधन को ‘वैज्ञानिक आधार पर’‘‘ऊपर से नीचे’’ के बजाय ‘‘नीचे से ऊपर’’ के स्तर पर अंतिम रूप दिया गया है।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेता सलीम मुर्शिदाबाद लोकसभा सीट से वाम-कांग्रेस गठबंधन उम्मीदवार के रूप में भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं। इस सीट पर सात मई को मतदान हुआ था।
राज्य की 42 संसदीय सीटों में से गठबंधन के तहत वाम दल 30 निर्वाचन क्षेत्रों जबकि कांग्रेस 12 पर चुनाव लड़ रही है। जिन 30 सीटों पर वाम मोर्चा चुनाव लड़ रहा है, उनमें से 23 उम्मीदवार माकपा से हैं जबकि बाकी पर भाकपा, फॉरवर्ड ब्लॉक और आरएसपी के उम्मीदवार मैदान में हैं।
माकपा के 23 उम्मीदवारों में से 20 नये चेहरे हैं।
सलीम ने ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ एक साक्षात्कार में कहा, ‘‘अनुभव सबसे अच्छा शिक्षक होता है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘2023 के पंचायत चुनावों और उससे दो साल पहले के राज्य चुनावों के निष्कर्षों ने नेताओं और जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को सिखाया है कि देश में चरम दक्षिणपंथी ताकतों और राज्य की छद्म-धर्मनिरपेक्ष भ्रष्ट व्यवस्था से लड़ने का एकमात्र तरीका समान विचारधारा वाले दलों का एकजुट होना है।’’
माकपा नेता ने कहा, ‘‘एकजुट होकर हम मजबूत हैं जबकि विभाजित होकर हम कमजोर पड़ते हैं।’’
राज्य में 2019 के आम चुनाव और 2021 के विधानसभा चुनावों में वाम दलों को कोई भी सीट नहीं मिली और राजनीतिक पंडितों ने इनके लिए खतरे की घंटी बजा दी, लेकिन ग्रामीण निकाय चुनावों के दौरान वाम-कांग्रेस गठबंधन ने बंगाल के महत्वपूर्ण हिस्सों में आश्चर्यजनक वापसी की, जहां भाजपा और तृणमूल कांग्रेस को करारा झटका लगा।
सलीम ने कहा, ‘‘जो लोग बंगाल और देश के बाकी हिस्सों में वामपंथ का दौर समाप्त होने की घोषणा करने की कोशिश कर रहे थे, मैं उनसे कहता हूं कि उन्होंने ऐसा करने में शायद बहुत जल्दबाजी की। वर्तमान में हमारा ध्यान ‘पुनरुत्थान’ पर केंद्रित है।’’
गठबंधन को लेकर उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं की इच्छा का ध्यान रखते हुए वाम नेतृत्व ने कांग्रेस के साथ गठजोड़ पर सहमति जताई।
माकपा नेता ने कहा, ‘‘कांग्रेस के साथ सीटों का समायोजन इसलिए नहीं हुआ कि कोई व्यक्ति या पार्टी ऐसा चाहती थी, बल्कि इसलिए हुआ क्योंकि यह लोगों की इच्छा थी। हमारे जमीनी स्तर के कार्यकर्ता यह देखकर प्रसन्न होते हैं कि नेतृत्व ने उनकी इच्छा पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है।’’
वरिष्ठ नेता ने ‘‘वामपंथ के पुनरुत्थान’’ के उद्देश्य के तहत नेतृत्व की अगली पीढ़ी को सामने लाने की अपनी पार्टी की नीति पर प्रकाश डाला।
सलीम ने कहा, ‘‘हमारे 23 उम्मीदवारों में से केवल तीन ही अनुभवी नेता हैं। पार्टी का विचार उन संभावित प्रतिभाओं पर ध्यान केंद्रित करना है जिनसे हम अगले दो दशकों में बंगाल की राजनीति का नेतृत्व करने की उम्मीद करते हैं।’’
माकपा नेता ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि भाजपा अंततः बंगाल में ‘‘पस्त’’ हो जाएगी।
उन्होंने कहा, ‘‘भाजपा कभी भी बंगाल के लिए नहीं बनी थी। तृणमूल कांग्रेस की सत्ता विरोधी लहर और ममता बनर्जी के प्रति बढ़ते मोहभंग के कारण भाजपा को फायदा मिला...और यह तथ्य कि लोग एक व्यवहार्य विकल्प के रूप में वामपंथ पर भरोसा नहीं कर सके, अब यह सब तेजी से बदल रहा है।’’
भाषा शफीक