अदालत ने कांग्रेस, पार्टी के चार नेताओं को मोदी-अदाणी के ‘डीपफेक’ वीडियो को हटाने का आदेश दिया
आशीष अविनाश
- 19 Dec 2025, 08:16 PM
- Updated: 08:16 PM
अहमदाबाद, 19 दिसंबर (भाषा) गुजरात के अहमदाबाद स्थित एक अदालत ने कांग्रेस पार्टी और उसके चार नेताओं को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उद्योगपति गौतम अदाणी के ‘डीप फेक’ वीडियो को सोशल मीडिया मंचों से हटाने का निर्देश दिया है।
अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड द्वारा दायर मानहानि के दीवानी मुकदमे की सुनवाई करते हुए, अतिरिक्त दीवानी न्यायाधीश श्रीकांत शर्मा की अदालत ने बृहस्पतिवार को कांग्रेस और उसके नेताओं जयराम रमेश, सुप्रिया श्रीनेत, पवन खेड़ा और उदयभानु चिब को सभी सोशल मीडिया मंचों से ‘डीपफेक’ वीडियो हटाने का निर्देश दिया।
कांग्रेस के ‘एक्स’ हैंडल पर 17 दिसंबर को पोस्ट किए गए वीडियो में मोदी और अदाणी के बीच बातचीत दिखाई गई है, जिसका शीर्षक है 'मोदी-अदाणी भाई भाई, देश बेचकर खाई मलाई।'
अदालत ने वीडियो को आदेश की तारीख से 48 घंटों के भीतर और अगली सुनवाई की तारीख 29 दिसंबर तक हटाने का आदेश दिया। वीडियो नहीं हटाने की स्थिति में अदालत ने एक्स कॉर्प और गूगल, जिन्हें मामले में प्रतिवादी बनाया गया है, को 72 घंटों के भीतर वीडियो हटाने का निर्देश दिया।
आदेश में कहा गया, "प्रतिवादियों द्वारा अनुपालन न करने की स्थिति में, वादी सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया नैतिकता संहिता) नियम 2021 के अनुसार उचित कार्रवाई के लिए संबंधित मध्यस्थ से संपर्क कर सकता है।"
अदालत ने प्रतिवादियों को तत्काल कारण बताओ नोटिस भी जारी किया, जिसका जवाब 29 दिसंबर तक देना होगा।
अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड की याचिका में कहा गया है कि कांग्रेस और उसके चार नेताओं ने मानहानिकारक आरोपों वाला एक ‘डीप फेक’ वीडियो विभिन्न सोशल मीडिया चैनल, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और डिजिटल संचार माध्यमों पर अपलोड, प्रसारित किया।
इसमें अदालत से प्रतिवादियों की वेबसाइट, चैनल, प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया हैंडल से मानहानिकारक वीडियो, पोस्ट और डिजिटल सामग्री को तत्काल हटाने और याचिका की सुनवाई लंबित रहने तक इस तरह की मानहानिकारक सामग्री के आगे प्रसार, प्रकाशन या पुनर्प्रकाशन पर रोक लगाने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया।
याचिका में कहा गया कि वीडियो और पोस्ट के माध्यम से आरोपियों ने "वादी पर आपराधिक गतिविधि, भ्रष्टाचार, भूमि हड़पने, राजनीतिक प्रभाव का दुरुपयोग, आम लोगों को परेशान करने, कृषि भूमि का अवैध अधिग्रहण, सरकारी अधिकारियों के साथ साठगांठ और आपराधिक तत्वों के साथ मिलीभगत के आरोप लगाए।"
इसमें दावा किया गया कि ये आरोप "पूरी तरह से झूठे, मनगढ़ंत, निराधार और दुर्भावना से प्रेरित" हैं।
भाषा आशीष