अमेरिका ने ताइवान को 10 अरब डॉलर से अधिक मूल्य के हथियार बेचने की घोषणा की
गोला रंजन
- 18 Dec 2025, 03:11 PM
- Updated: 03:11 PM
वाशिंगटन, 18 दिसंबर (एपी) अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने ताइवान को 10 अरब डॉलर से अधिक मूल्य के हथियारों की बिक्री के एक विशाल पैकेज की घोषणा की है, जिसमें मध्यम दूरी की मिसाइलें, होवित्जर तोपें और ड्रोन शामिल हैं।
अमेरिका के इस कदम पर चीन ने आक्रोश जताया है।
अमेरिकी विदेश विभाग ने बुधवार देर रात इन हथियार सौदों की घोषणा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रीय स्तर पर प्रसारित संबोधन के दौरान की। अपने भाषण में ट्रंप ने विदेश नीति के मुद्दों का बहुत कम उल्लेख किया और चीन या ताइवान के बारे में कोई बात नहीं की।
ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के दौरान अमेरिका-चीन तनाव कम हुआ है, न केवल मुख्य रूप से व्यापार और शुल्क (टैरिफ) को लेकर बल्कि ताइवान के प्रति चीन की बढ़ती आक्रामकता को लेकर भी। चीन, ताइवान पर अपना हक जताता है।
इन आठ हथियार बिक्री समझौतों में 82 उच्च गतिशीलता वाली तोपखाना रॉकेट प्रणाली (हिमार्स) और 420 सैन्य सामरिक मिसाइल प्रणाली शामिल हैं। ये वही प्रणालियां हैं जैसी पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रशासन के दौरान अमेरिका ने रूस के खिलाफ आत्मरक्षा के लिए यूक्रेन को प्रदान की थीं। इनकी कुल कीमत चार अरब डॉलर से अधिक बताई गई है।
इसके अलावा इस पैकेज में 60 स्वचालित होवित्जर प्रणालियां और उनसे जुड़े उपकरण भी शामिल हैं, जिनकी कीमत भी चार अरब डॉलर से अधिक है। साथ ही ड्रोन की बिक्री लगभग एक अरब डॉलर से अधिक मूल्य की बताई गई है।
अन्य सौदों में एक अरब डॉलर से अधिक मूल्य का सैन्य सॉफ्टवेयर, 70 करोड़ डॉलर से अधिक के जैवेलिन और टीओडब्ल्यू मिसाइल, 9.6 करोड़ डॉलर के हेलीकॉप्टर के पुर्जे और हार्पून मिसाइलों के लिए 9.1 करोड़ डॉलर की नवीनीकरण किट शामिल हैं।
एक अलग बयान में अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कहा कि ये हथियार बिक्री ‘‘प्राप्तकर्ता देश के सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण के निरंतर प्रयासों का समर्थन करने और एक विश्वसनीय रक्षा क्षमता बनाए रखने में मदद करके अमेरिका के राष्ट्रीय, आर्थिक और सुरक्षा हितों की पूर्ति करते हैं।’’
चीन के विदेश मंत्रालय ने इस कदम की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि इससे चीन और अमेरिका के बीच हुए कूटनीतिक समझौतों का उल्लंघन होगा, चीन की संप्रभुता, सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता को गंभीर नुकसान पहुंचेगा तथा क्षेत्रीय स्थिरता कमजोर होगी।
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा, ‘‘इस द्वीप पर मौजूद ‘ताइवान स्वतंत्रता’ की ताकतें बल के जरिए स्वतंत्रता हासिल करना और बल के जरिए ही पुन:एकीकरण का विरोध करना चाहती हैं। वे ताइवान को बारूद के ढेर में बदलने की कीमत पर जनता की मेहनत की कमायी को हथियार खरीदने में बर्बाद कर रहे हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हथियारों के जरिए ताइवान स्वतंत्रता का समर्थन करना अंततः अमेरिका के लिए ही उल्टा साबित होगा। ताइवान का इस्तेमाल कर चीन को रोकने की कोशिश सफल नहीं होगी।’’
ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को जारी एक बयान में हथियारों की बिक्री को लेकर अमेरिका के प्रति आभार व्यक्त किया। मंत्रालय ने कहा कि इससे ताइवान को ‘‘पर्याप्त आत्मरक्षा क्षमताएं’’ बनाए रखने में मदद मिलेगी और मजबूत प्रतिरोधक क्षमता हासिल होगी।
बयान में कहा गया कि ताइवान द्वारा अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करना ‘‘क्षेत्रीय शांति और स्थिरता बनाए रखने की बुनियाद’’ है।
एपी
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