लोकसभा ने अनुदान की अनुपूरक मांगों और विनियोग विधेयक को मंजूरी दी
हक सुभाष हक सुभाष
- 15 Dec 2025, 08:40 PM
- Updated: 08:40 PM
नयी दिल्ली, 15 दिसंबर (भाषा) लोकसभा ने सोमवार को चालू वित्त वर्ष के लिए अनुदानों की अनुपूरक मांगों और संबंधित विनियोग विधेयक को मंजूरी दे दी।
सदन ने कटौती प्रस्तावों को अस्वीकार करते हुए वर्ष 2025-26 के लिए अनुदानों की अनुपूरक मांगें-प्रथम बैच और संबंधित विनियोग (संख्याक 4) विधेयक, 2025 को ध्वनि मत से स्वीकृति प्रदान की।
इससे पहले, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि पिछले एक दशक में आर्थिक विकास का दायरा विस्तृत हुआ है।
उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ‘डेड’ अर्थव्यवस्था संबंधी टिप्पणी का हवाला देते हुए कहा कि क्या किसी ऐसी अर्थव्यवस्था की क्रेडिट रेटिंग को उन्नत किया जाएगा जो ‘डेड’ हो चुकी है।
सीतारमण ने यह सवाल भी किया, ‘‘क्या कोई ‘डेड’ अर्थव्यवस्था 8.2 प्रतिशत की दर से से वृद्धि कर सकती है?’’
उन्होंने कहा कि बयानों के बजाय डेटा पर बात होनी चाहिए।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के ‘सी’ ग्रेड से जुड़े डेटा को लेकर उठाये गए सवाल पर कहा कि भारत की ग्रेडिंग में कोई कमी नहीं की गई।
वित्त मंत्री का कहना था कि यह गुमराह करने वाली बात है कि आईएमएफ ने ग्रेडिंग को कमतर किया है।
उन्होंने कहा कि सदस्यों के अपने तथ्य दुरुस्त करने चाहिए।
सीतारमण ने कहा कि कोविड जैसी आपदा के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है।
सरकार ने चालू वित्त वर्ष 2025-26 में 41,455 करोड़ रुपए के शुद्ध अतिरिक्त व्यय के लिए लोकसभा से मंजूरी मांगी थी, जिसमें से 27,000 करोड़ रुपये से अधिक उर्वरक और पेट्रोलियम सब्सिडी से जुड़ा व्यय भी शामिल है।
सरकार ने कुल 1.32 लाख करोड़ रुपए के सकल अतिरिक्त खर्च के लिए संसद से स्वीकृति मांगी थी। इनमें से 41,455.39 करोड़ रुपए शुद्ध नकद व्यय होंगे, जबकि शेष राशि को विभिन्न मंत्रालयों/विभागों की 90,812 करोड़ रुपए की बचत से समायोजित किया जाएगा।
अनुदान की अनुपूरक मांगों के अनुसार उर्वरक सब्सिडी और संबंधित मदों पर खर्च के लिए 18,525 करोड़ रुपए की मंज़ूरी मांगी गई और पेट्रोलियम मंत्रालय के लिए एलपीजी सब्सिडी के लिहाज से करीब 9,500 करोड़ रुपये की स्वीकृति मांगी गई थी।
उच्च शिक्षा विभाग द्वारा अतिरिक्त व्यय के लिए 1,304 करोड़ रुपये और वाणिज्य मंत्रालय द्वारा 225 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं।
विदेश मंत्रालय की ओर से करीब 1,200 करोड़ रुपये और गृह मंत्रालय की ओर से करीब 2500 करोड़ रुपये के अतिरिक्त खर्च के लिए मंजूरी मांगी गई थी।
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हक सुभाष हक