आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने एकता और सांस्कृतिक गौरव का आह्वान किया
आशीष रंजन
- 13 Dec 2025, 07:47 PM
- Updated: 07:47 PM
श्री विजयपुरम, 13 दिसंबर (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार को हिंदू समाज से स्वामी विवेकानंद के उस संदेश से प्रेरणा लेने की अपील की कि हर राष्ट्र का एक दायित्व होता है जिसे उसे निभाना होता है और एक नियति होती है, जिसे उसे प्राप्त करना होता है।
यहां नेताजी स्टेडियम में विराट हिंदू सम्मेलन समिति द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि वर्तमान समय में वैश्विक मान्यता को आकार देने में केवल सत्य से कहीं अधिक शक्ति का योगदान है। उन्होंने कहा, "विश्व सत्य को नहीं, शक्ति को देखता है, जिसके पास शक्ति है, उसको मानता है...भले मन से नहीं, पर मानता जरूर है।"
भागवत ने कहा कि एक सशक्त समाज के निर्माण और राष्ट्रीय लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए एकजुटता आवश्यक है। उन्होंने कहा, "यदि हिंदू जागृत हों, तो विश्व जागृत होगा। विश्व को विश्वास है कि भारत ही मार्ग प्रशस्त करेगा। समस्याओं पर समय बर्बाद करने के बजाय, हमें समाधान खोजने चाहिए। किसी भी कार्य को पूरा करने के लिए शक्ति की आवश्यकता होती है, और शक्ति केवल एकता से ही प्राप्त होती है।"
भगवान कृष्ण और वन में रहने वाले एक राक्षस के बारे में महाभारत की एक कथा सुनाते हुए, भागवत ने कहा कि टकराव हमेशा समाधान नहीं होता है।
उन्होंने कहा, “अर्जुन और सात्यकी ने राक्षस से लड़ने की कोशिश की, लेकिन हर वार के साथ वह और बड़ा होता गया। कृष्ण ने हस्तक्षेप किया, टकराव से बचते हुए और सूझबूझ से बिना लड़ाई के ही उसे वश में कर लिया। इससे यह सीख मिलती है कि हर समस्या के लिए बल प्रयोग जरूरी नहीं; समाधान स्थिति को समझने पर निर्भर करता है।”
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि एक मजबूत और स्वस्थ समाज के निर्माण के प्रयास घर से ही शुरू होने चाहिए। उन्होंने कहा, "अपने इलाके में दोस्त बनाएं, परिवार के सदस्यों के साथ समय बिताएं और नियमित रूप से पारिवारिक समारोह आयोजित करें। विशेष अवसरों पर पारंपरिक पोशाक पहनने और परिवार के साथ मिलकर भोजन करने पर गर्व महसूस करें। अपनी संस्कृति से प्यार करना महत्वपूर्ण है।"
उन्होंने कहा, “अब यह तय करने का समय आ गया है कि हम अपने घरों में स्वामी विवेकानंद का चित्र रखना चाहते हैं या माइकल जैक्सन की तस्वीर। देशभक्ति एक नागरिक कर्तव्य है।”
भाषा आशीष