शिवराज चौहान ने किसानों की मदद के लिए पंजाब से फसल बीमा योजना लागू करने की अपील की
अविनाश सुरेश
- 12 Dec 2025, 10:23 PM
- Updated: 10:23 PM
नयी दिल्ली, 12 दिसंबर (भाषा) कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को राज्यसभा में कहा कि पंजाब ने अभी तक फसल बीमा योजना लागू नहीं की है और अगर इसे पहले ही वहां लागू कर दिया जाता तो राज्य में हाल में आई बाढ़ के दौरान किसानों को परेशानी नहीं होती।
मंत्री ने कहा कि सरकार प्रति हेक्टेयर फसलों की उपज बढ़ाने में मदद करने की कोशिश कर रही है और 2014 से 2024 तक उपज में 44 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
चौहान ने प्रश्नकाल के दौरान पूरक सवालों का जवाब देते हुए कहा, ‘‘मुझे यह कहते हुए खुशी हो रही है कि 2014 से 2024 तक उपज में 44 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जो एक रिकॉर्ड है।’’
उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में नयी प्रौद्योगिकी और नयी प्रणाली अपनाए जा रहे हैं और सरकार उत्पादन की लागत कम करने की भी कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि नरेन्द्र मोदी सरकार किसानों को उनकी लागत कम करने में मदद के लिए उर्वरक सब्सिडी के तौर पर लगभग दो लाख करोड़ रुपये दे रही है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत किसानों के खातों में लगभग 4.09 लाख करोड़ रुपये जमा किए गए हैं।
चौहान ने कहा कि फसल बीमा योजना के तहत किसानों को 1.90 लाख करोड़ रुपये दिए गए हैं। इसके अलावा, अलग-अलग योजनाओं के तहत किसानों को कम दरों पर ऋण के तौर पर 15 लाख करोड़ रुपये दिए गए हैं।
उन्होंने कहा कि कभी-कभी कुछ आपदाओं के कारण फसलें खराब हो जाती हैं और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना ऐसे किसानों के लिए वरदान साबित होती है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार ने अभी तक राज्य में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू नहीं की है और अगर यह योजना पंजाब में लागू होती, तो बाढ़ पीड़ित किसानों को फायदा होता।
आप सांसद संत बलबीर सिंह के पूरक सवालों के जवाब में उन्होंने कहा, ‘‘मैंने पंजाब के मुख्यमंत्री को फसल बीमा योजना लागू करने के लिए एक पत्र लिखा है, ताकि वहां के किसानों की मदद की जा सके।’’
किसानों की आत्महत्या से जुड़े एक अन्य पूरक सवाल के जवाब में मंत्री ने कहा कि किसी एक का भी आत्महत्या करना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा, ‘‘कभी-कभी लोग दुर्भाग्य से आत्महत्या कर लेते हैं। जहां तक किसानों की बात है, हम किसानों की आय बढ़ाने में मदद करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं... आत्महत्या के अलग-अलग कारण होते हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है।’’
भाषा
अविनाश