फोन टैपिंग मामला: तेलंगाना के पूर्व खुफिया प्रमुख ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया
शुभम रंजन
- 12 Dec 2025, 07:18 PM
- Updated: 07:18 PM
हैदराबाद, 12 दिसंबर (भाषा) भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) की पूर्व सरकार के दौरान फोन टैपिंग मामले में आरोपी तेलंगाना के पूर्व खुफिया प्रमुख टी. प्रभाकर राव ने उच्चतम न्यायालय के निर्देशानुसार शुक्रवार को पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
तेलंगाना विशेष खुफिया ब्यूरो (एसआईबी) के पूर्व प्रमुख राव ने पूर्वाह्न 11 बजे जुबली हिल्स थाने में जांच अधिकारी (आईओ) के समक्ष आत्मसमर्पण किया।
प्रभाकर राव ने 2023 के विधानसभा चुनावों में बीआरएस की हार के बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।
फोन टैपिंग मामले की जांच में उनसे हिरासत में पूछताछ करना महत्वपूर्ण है क्योंकि उस समय वे खुफिया इकाई के प्रमुख थे।
हैदराबाद पुलिस ने मार्च 2024 से अब तक निलंबित एसआईपी के पुलिस उपाधीक्षक समेत चार पुलिस अधिकारियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उन्होंने भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) की पूर्ववर्ती सरकार के दौरान विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से खुफिया जानकारी मिटाई और फोन टैप किए।
बाद में चारों पुलिस अधिकारियों को जमानत दे दी गई।
पुलिस ने कहा था कि आरोपी उस कथित साजिश का हिस्सा हैं जिसमें उन्होंने जीवन के विभिन्न क्षेत्रों के नागरिकों पर नजर रखकर राजनीतिक उद्देश्यों के लिए एसआईबी के संसाधनों का "दुरुपयोग" किया।
पुलिस ने पहले कहा था कि इस मामले में जिन लोगों को आरोपी बनाया गया है उन पर अन्य लोगों के साथ मिलकर कई व्यक्तियों की अनधिकृत रूप से प्रोफाइल तैयार करने और एसआईबी में गुप्त रूप से और अवैध रूप से उनकी निगरानी करने का आरोप है। उन पर कुछ व्यक्तियों के इशारे पर एक राजनीतिक दल के पक्ष में पक्षपातपूर्ण तरीके से उनका इस्तेमाल करने का भी आरोप है। उन पर अपने अपराधों के सबूतों को मिटाने के लिए रिकॉर्ड नष्ट करने की साजिश रचने का भी आरोप है।
राव ने उच्चतम न्यायालय के निर्देशानुसार आत्मसमर्पण किया।
बृहस्पतिवार को न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने कहा था कि यह आदेश राव के खिलाफ अपराधों की विस्तृत जांच के लिए पारित किया गया है।
पीठ ने कहा, “हम याचिकाकर्ता को निर्देश देते हैं कि वह कल (शुक्रवार) पूर्वाह्न 11 बजे तक जुबली हिल्स थाने और जांच अधिकारी के समक्ष आत्मसमर्पण करे…कानून के अनुसार हिरासत में पूछताछ की जाएगी। मामले को शुक्रवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए। याचिकाकर्ता को यह स्वतंत्रता है कि वह घर से भोजन और नियमित दवा मंगा सकता है।”
उच्चतम न्यायालय ने 29 मई को राव को दंडात्मक कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की और उन्हें यह वचन देने का निर्देश दिया कि पासपोर्ट प्राप्त होने के तीन दिनों के भीतर वह भारत लौट आएंगे।
राव ने अग्रिम जमानत की याचिका खारिज करने वाले तेलंगाना उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुए उच्चतम न्यायालय का रुख किया था।
हैदराबाद की एक अदालत ने 22 मई को फोन टैपिंग मामले में राव को भगोड़ा घोषित करने का आदेश दिया था।
आदेश में कहा गया था कि यदि राव 20 जून तक अदालत में पेश नहीं होते, तो उन्हें भगोड़ा अपराधी घोषित किया जा सकता है।
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