कारपोरेट क्षेत्र में काम के दबाव के मद्देनजर सरकार से नियमावली बनाने की रास में की गई मांग
मनीषा अविनाश
- 12 Dec 2025, 05:37 PM
- Updated: 05:37 PM
नयी दिल्ली, 12 दिसंबर (भाषा) प्रतिस्पर्धा के दौर में कारपोरेट क्षेत्र में कर्मचारियों से अंधाधुंध काम लिए जाने का मुद्दा उठाते हुए शुक्रवार को राज्यसभा में झारखंड मुक्ति मोर्चा की एक सदस्य ने कहा कि इस तरह की स्थिति मानसिक स्वास्थ्य की समस्या उत्पन्न करती है और सरकार को इस संबंध में नियमावली बनानी चाहिए ताकि दबाव और तनाव से मुक्त रह कर काम किया जा सके।
झामुमो की महुआ माझी ने विशेष उल्लेख के जरिये यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि कारपोरेट क्षेत्र में काम करने वालों के अधिकार प्रतिस्पर्धा के इस दौर में दरकिनार हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि कारपोरेट क्षेत्र में कड़ी प्रतिस्पर्धा है, पदोन्नति की दौड़ होती है और दबाव की वजह से कर्मचारी छुट्टी के बाद भी काम करते हैं।
उन्होंने कहा कि यह स्थिति तनाव, दबाव, हताशा और अवसाद की ओर ले जाती है और पिछले साल कई युवाओं ने मानसिक रूप से हार कर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली।
महुआ ने कहा कि कारपोरेट क्षेत्र में न्यूनतम कार्य अवधि का तो उल्लेख होता है अधिकतम का नहीं। उन्होंने कहा कि कई बार तो छुट्टी के दिन भी काम लिया जाता है।
उन्होंने कहा कि विदेशों में अतिरिक्त काम को नियमों का उल्लंघन माना जाता है लेकिन हमारे यहां स्थिति अलग है। उन्होंने कहा कि सीमित कर्मचारी होने के कारण एक ही कर्मचारी से कई तरह का काम कराया जाता है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि कारपोरेट क्षेत्र में काम करने वालों के लिए मानसिक स्वास्थ्य, ओवर टाइम, कार्यावधि और अवकाश आदि को लेकर स्पष्ट नियमावली बनाई जानाी चाहिए।
द्रमुक सदस्य आर गिरिराजन ने कहा कि दिव्यांगों को ग्रामीण स्थानीय प्रशासन में नामित सदस्य के तौर पर नियुक्त करने का प्रावधान होना चाहिए। ‘‘ऐसा करने से उन्हें सम्मानजनक जीवन मिलेगा।’’
उन्होंने कहा कि शहरी स्थानीय निकायों में तो तीन हजार से अधिक दिव्यांग नामित सदस्य के तौर पर नियुक्त किए गए हैं। उन्होंने कहा कि दिव्यांगों को ग्रामीण स्थानीय प्रशासन में नामित सदस्य के तौर पर नियुक्त करने से सरकार का सबको साथ लेकर चलने का दावा सार्थक होगा।
भाजपा के सुजीत कुमार ने भारत को हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रयास करने का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार को स्वदेशी उत्पादों के निर्माण एवं उत्पादन पर जोर देने के साथ ही इनकी बिक्री की व्यवस्था भी करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे न केवल रोजगार को बढ़ावा मिलेगा बल्कि आत्मनिर्भरता भी बढ़ेगी।
द्रमुक की राजाथि ने बच्चों के साथ कथित दुर्व्यवहार किए जाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं पीड़ित के मन में हमेशा के लिए दर्द बन कर अंकित हो जाती हैं और उसकी मानसिकता पर भी असर पड़ता है।
अन्नाद्रमुक के एम धनपाल, मनोनीत हर्षवर्धन श्रृंगला, कांग्रेस के प्रमोद तिवारी, शक्ति सिंह गोहिल, जे बी माथेर हीशम, मनोनीत सतनाम सिंह संधू, बीजद की सुलता देव, सस्मित पात्रा, माकपा के वी शिवदासन, जॉन ब्रिटास, भाजपा के भगवत कराड़, सुमित्रा वाल्मीक, माया नारोलिया और भाकपा के संदोष कुमार पी ने भी आसन की अनुमति से लोक महत्व से जुड़े मुद्दे विशेष उल्लेख के जरिये उठाए।
इसके बाद पांच बज कर 13 मिनट पर उच्च सदन की बैठक सोमवार, 15 दिसंबर को सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
भाषा
मनीषा