न्यायालय ने मुनंबम भूमि मामले में केरल उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगाई
शफीक नरेश
- 12 Dec 2025, 05:35 PM
- Updated: 05:35 PM
नयी दिल्ली, 12 दिसंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को केरल उच्च न्यायालय के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें कहा गया था कि मुनंबम की जमीन को वक्फ घोषित करना ‘‘केरल वक्फ बोर्ड की जमीन हड़पने की रणनीति’’ है।
उच्चतम न्यायालय ने विवादित भूमि पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया।
हालांकि, न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने स्पष्ट किया कि उसने विवादित क्षेत्र के स्वामित्व का पता लगाने के लिए एक जांच आयोग की नियुक्ति के सरकारी आदेश को बरकरार रखने वाले उच्च न्यायालय के निर्देश पर रोक नहीं लगाई है।
यह विवाद एर्णाकुलम जिले के चेराई और मुनंबम गांवों से संबंधित है, जहां के निवासियों ने आरोप लगाया है कि वक्फ बोर्ड उनके पंजीकृत दस्तावेजों और भूमि कर भुगतान रसीदों के बावजूद अवैध रूप से उनकी जमीन और संपत्तियों पर दावा कर रहा है।
उच्चतम न्यायालय ने केरल सरकार को नोटिस जारी कर मुनंबम में स्थित 404 एकड़ भूमि पर उच्च न्यायालय के 10 अक्टूबर के आदेश को चुनौती देने वाली केरल वक्फ संरक्षण वेदी की याचिका पर सरकार से जवाब मांगा है।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता हुजेफा अहमदी ने कहा कि उच्च न्यायालय ने वक्फ न्यायाधिकरण द्वारा निपटाए जाने वाले मुद्दों में हस्तक्षेप करके गलत टिप्पणियां की हैं, और वक्फ विलेख की वैधता पर टिप्पणी अनुचित थी क्योंकि यह मुद्दा विचाराधीन नहीं था।
उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय के समक्ष मामला राज्य द्वारा वक्फ विलेख की वैधता और भूमि की प्रकृति की पड़ताल के लिए गठित जांच आयोग को चुनौती है, ये दोनों मुद्दे पूरी तरह से वक्फ न्यायाधिकरण के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।
केरल सरकार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता जयदीप गुप्ता ने दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि संबंधित वक्फ के मुतवल्ली ने न तो उच्च न्यायालय का रुख किया और न ही जांच आयोग के गठन से उन्हें कोई आपत्ति है।
उन्होंने कहा कि जांच आयोग पहले ही राज्य सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंप चुका है।
अहमदी ने कहा कि वक्फ के मुतवल्ली ने विपक्षी पक्षों (स्थानीय निवासियों) का साथ दिया है।
स्थानीय निवासियों की ओर से पेश हुए वकील ने कहा कि ये लोग गरीब मछुआरे हैं और जांच आयोग को चुनौती देना निरर्थक हो गया है क्योंकि रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी गई है।
उन्होंने कहा कि इन गरीब स्थानीय लोगों की बात कभी नहीं सुनी गई और 2019 में अचानक उनकी संपत्तियों को वक्फ घोषित कर दिया गया।
अन्य स्थानीय निवासियों की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने कहा कि पहले से ही एक दीवानी अदालत का फैसला है जिसमें कहा गया है कि यह जमीन वक्फ भूमि नहीं है।
पीठ ने कहा कि उच्च न्यायालय भूमि के स्वरूप के प्रश्न पर विचार करने के लिए उपयुक्त मंच नहीं है, क्योंकि मामला न्यायाधिकरण के समक्ष लंबित है।
न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा, ‘‘ऐसा प्रतीत होता है कि उच्च न्यायालय ने अपने अधिकार क्षेत्र से आगे बढ़कर कार्य किया है।’’
न्यायमूर्ति भुइयां ने पूछा कि क्या इन मुद्दों पर निर्णय लेने के लिए उच्च न्यायालय उपयुक्त मंच है?
पीठ ने 27 जनवरी से शुरू होने वाले सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए नोटिस जारी किया। पीठ ने संपत्ति पर यथास्थिति बनाए रखने का भी आदेश दिया।
भाषा शफीक