रेड-लाइट इलाकों में यौनकर्मियों के लिए एसआईआर शिविर का आयोजन
प्रचेता नरेश
- 10 Dec 2025, 07:11 PM
- Updated: 07:11 PM
कोलकाता, 10 दिसंबर (भाषा) पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत यौनकर्मियों को गणना प्रपत्र भरने में मदद करने के लिए राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने बुधवार को कोलकाता के कई रेड-लाइट इलाकों में शिविर का आयोजन किया। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।
अधिकारी ने बताया कि ये शिविर शहर के खिदिरपुर, कालीघाट और चेतला इलाकों के रेड-लाइट क्षेत्रों में स्थापित किए गए थे।
यह कदम पूर्वी महानगर के एशिया के सबसे बड़े 'रेड-लाइट' क्षेत्र सोनागाछी में इसी तरह के सहायता शिविरों के आयोजन किये जाने के एक दिन बाद उठाया गया है।
अधिकारी ने बताया कि तीनों रेड-लाइट इलाकों में बनाए गए विशेष शिविरों ने सुबह 11 बजे से काम करना शुरू कर दिया था।
निर्वाचन आयोग के अधिकारी ने बताया, "ये विशेष शिविर किद्दरपुर के मुंशीगंज मार्ग पर स्थित फाइव स्टार क्लब में और 148 कालीघाट मार्ग पर आयोजित किए गए थे। दोनों शिविर दोपहर 12.40 बजे तक बंद कर दिए गए थे।"
अधिकारी ने बताया कि चेतला में शिविर का संचालन इस समय जारी है।
उन्होंने कहा, "यौनकर्मियों को गणना प्रपत्र भरने में सहायता दी जाएगी और शिविर शाम चार बजे तक चलेगा।"
अधिकारी ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि किद्दरपुर में कम से कम 70 यौनकर्मी हैं जबकि कालीघाट में इनकी संख्या लगभग 100 है तथा चेतला में लगभग 60 यौनकर्मी हैं।
जानकारी के मुताबिक, यौनकर्मियों और उनके बच्चों के कल्याण के लिए काम करने वाले विभिन्न संगठनों द्वारा कई चिंताजनक मुद्दे उठाए जाने के बाद इस पहल की शुरूआत की गई है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने आश्वासन दिया था कि समुदाय(यौनकर्मियों) की चिंताओं को दूर करने और उनका समर्थन करने के लिए विशेष शिविरों का आयोजन किया जाएगा।
मंगलवार को सोनागाछी में 805 यौनकर्मी निर्वाचन आयोग के सहायता शिविरों में उमड़ पड़े, उनके चेहरों पर चिंता साफ झलक रही थी। हालांकि, मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने कहा कि एक भी पात्र मतदाता को मतदान से वंचित नहीं होने दिए जाएगा।
उत्तर कोलकाता के वार्ड नंबर 18 की संकरी गलियों और भीड़भाड़ वाली कोठियों में वर्षों से रह रही कई महिलाओं ने कहा कि उन्हें डर है कि उनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए जाएंगे क्योंकि उनके पास पारिवारिक संबंधों को दर्शाने वाला कोई प्रमाण नहीं है या फिर दशकों पहले तस्करी किए जाने, छोड़ दिए जाने या घर से भाग जाने के बाद वे लंबे समय से अपने परिवारों के संपर्क में नहीं हैं।
भाषा
प्रचेता