तिरुपरनकुंद्रम दीपम मामला: उच्च न्यायालय ने मुख्य सचिव, एडीजीपी को 17 दिसंबर को पेश होने को कहा
देवेंद्र पवनेश
- 09 Dec 2025, 10:40 PM
- Updated: 10:40 PM
मदुरै (तमिलनाडु), नौ दिसंबर (भाषा) मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ ने तमिलनाडु के मुख्य सचिव और एडीजीपी (कानून-व्यवस्था) को तिरुपरनकुंद्रम दीपम विवाद मामले में 17 दिसंबर को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए अदालत में पेश होने का मंगलवार को निर्देश दिया।
केंद्रीय गृह सचिव को सुनवाई में एक पक्षकार के रूप में शामिल किया गया है।
अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान आज राज्य सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त महाधिवक्ता वीरा कथिरावन ने बताया कि तिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी पर दीप प्रज्वलित करने संबंधी एकल न्यायाधीश के आदेश को चुनौती देने वाली तमिलनाडु के अधिकारियों द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका उच्चतम न्यायालय में लंबित है।
न्यायमूर्ति जी आर स्वामीनाथन ने राम रविकुमार द्वारा दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य सचिव और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) को 17 दिसंबर को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए पेश होने का निर्देश दिया।
रविकुमार ने अदालत के पूर्व आदेशों का पालन न करने के लिए मदुरै के जिलाधिकारी, पुलिस आयुक्त और अरुलमिगु सुब्रमण्य स्वामी मंदिर, तिरुपरनकुंद्रम के कार्यकारी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई किये जाने का अनुरोध करते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि अधिकारी ‘‘अदालत के आदेश का पालन किए बिना मामले को खींचने का प्रयास कर रहे हैं।’’
बाद में पत्रकारों से बात करते हुए अधिवक्ता कार्तिकेयन एन ने कहा कि मदुरै के पुलिस उपायुक्त को एक वैधानिक नोटिस जारी किया गया है, जिसमें पूछा गया है कि उनके खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए।
न्यायमूर्ति स्वामीनाथन ने एक दिसंबर को मंदिर प्रबंधन को आदेश दिया था कि तीन दिसंबर को कार्तिगई दीपम उत्सव के दौरान तिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी पर दीप प्रज्वलित करने की व्यवस्था की जाए।
अदालत के आदेश के बावजूद कार्यक्रम नहीं हुआ तो न्यायाधीश ने याचिकाकर्ता और दस अन्य लोगों को तीन दिसंबर की शाम को सीआईएसएफ सुरक्षा के साथ दीप प्रज्वलित करने की अनुमति दे दी।
अदालत ने चार दिसंबर को अवमानना याचिका स्वीकार करते हुए, कार्तिगई दीपम उत्सव के दौरान जिलाधिकारी द्वारा लागू निषेधाज्ञा को रद्द कर दिया।
भाषा
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