हैदराबाद के संगठन ने आरटीई के पैसे का 'दुरुपयोग' किया: ईडी
अमित धीरज
- 09 Dec 2025, 10:29 PM
- Updated: 10:29 PM
नयी दिल्ली, नौ दिसंबर (भाषा) हैदराबाद स्थित एक शिक्षा संगठन कथित तौर पर शिक्षा का अधिकार (आरटीई) कोष का दुरुपयोग कर रहा है, सामान्य छात्रों को ‘जोगिनी’ बताकर विदेशी चंदा प्राप्त कर रहा है और धन का इस्तेमाल विदेश यात्राओं में कर रहा है। यह जानकारी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार को दी।
प्रवर्तन निदेशालय ने एक बयान में कहा कि कुछ छापेमारी के बाद, उसने ऑपरेशन मर्सी इंडिया फ़ाउंडेशन (ओएमआईएफ़) की एक दर्जन अचल संपत्तियां कुर्क कीं, जिनका बाज़ार मूल्य 15 करोड़ रुपये है। यह संस्था मुख्यतः वंचित छात्रों के लिए ‘गुड शेफर्ड स्कूल’ कार्यक्रम चलाती है।
इन आरोपों पर ओएमआईएफ़ की प्रतिक्रिया का इंतज़ार है।
ईडी ने आरोप लगाया कि इन विद्यालयों ने सभी छात्रों से नियमित फीस, पुस्तक शुल्क, वर्दी और बस शुल्क वसूल किया, जिनमें पूर्णतः प्रायोजित छात्र भी शामिल थे, और इस प्रकार धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत परिभाषित ‘‘अपराध की आय’’ अर्जित की।
ईडी ने दावा किया कि विद्यालयों को शिक्षा का अधिकार (आरटीई) और छात्रवृत्ति योजनाओं के तहत ‘‘पर्याप्त’’ सरकारी सहायता भी मिली, फिर भी छात्रों से पूरी फीस ली गई और सरकारी प्रतिपूर्ति की राशि छात्रों को वितरित करने के बजाय ओएमआईएफ के मुख्यालय के खातों में ‘‘डाल दी गई’’।
उसने कहा कि 2011-12 और 2017-18 के बीच, छात्रों से एकत्रित और सरकारी स्रोतों से प्राप्त ‘काफी’ धनराशि उन दानदाताओं से छिपायी गई, जिनका मानना था कि वे मुफ्त शिक्षा के लिए वित्तपोषण कर रहे हैं।
ईडी ने कहा, ‘‘ईडी ने 15.37 करोड़ रुपये की पहचान अपराध से अर्जित आय के तौर पर की है जो छात्रों से प्राप्त धन और सरकारी सब्सिडी की हेराफेरी से प्राप्त की गई।’’
ईडी के अनुसार, समूह ने विदेशी दानदाताओं के समक्ष सामान्य स्कूली छात्राओं को ‘जोगिनी’ के रूप में गलत तरीके से प्रस्तुत किया, ताकि उनसे अधिक प्रायोजन राशि ‘प्राप्त’ की जा सके।
एजेंसी ने पाया कि ‘जोगिनी पुनर्वास’ के लिए दान 60-68 अमेरिकी डॉलर प्रति माह था, जबकि नियमित छात्र प्रायोजन के लिए यह 20-28 अमेरिकी डॉलर प्रति माह था।
ईडी ने आरोप लगाया कि यह पाया गया कि धार्मिक गतिविधियों में संलग्न एक समूह संस्था, गुड शेफर्ड कम्युनिटी सोसाइटी (जीएससीएस) ने माता-पिता द्वारा भुगतान की गई फीस का उपयोग चर्च से संबंधित खर्चों और अचल संपत्तियों के अधिग्रहण के लिए किया।
ईडी के अनुसार, जांच में पाया गया कि आरोपियों ने अपने ‘‘मुख्य’’ कार्यों के लिए संबद्ध संस्थाओं को धनराशि ‘‘मुहैया करायी’’ और उसका उपयोग वरिष्ठ पदाधिकारियों की ‘‘फिजूलखर्ची’’ वाली विदेश यात्राओं के लिए किया, जिसमें प्रमुख पदाधिकारी डॉ. जोसेफ ग्रेगरी डिसूजा द्वारा बिजनेस क्लास में हवाई यात्रा भी शामिल थी।
उसने कहा कि गृह मंत्रालय ने कई ओएम इंडिया इकाइयों के एफसीआरए (विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम) लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं करने का भी आदेश दिया है और उनके खातों के लेनदेन पर रोक भी लगा दी है।
भाषा अमित