एनएमसीजी ने गंगा के वन्यजीवों और आर्द्रभूमि की सुरक्षा मजबूत करने के लिए अभियान शुरू किया
रंजन
- 06 Dec 2025, 09:20 PM
- Updated: 09:20 PM
नयी दिल्ली, छह दिसंबर (भाषा) राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) ने नदी से जुड़ी लुप्तप्राय प्रजातियों की सुरक्षा के लिए वास्तविक समय की निगरानी प्रणाली, और डिजिटल आर्द्रभूमि निगरानी शुरू की है।
अधिकारियों ने कहा कि यह कदम ऐसे समय में डेटा-समर्थित निर्णय लेने की ओर बदलाव का प्रतीक है, जब नदी के कई हिस्से पारिस्थितिक दबाव में हैं।
उत्तर प्रदेश के राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य के गराईटा केंद्र में एक बड़ी शुरुआत की गई है, जहां राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) ने स्मार्ट गश्त शुरू की है। यह एक ऐसी व्यवस्था है जो क्षेत्र की गतिविधि को डिजिटल रूप से रिकॉर्ड करती है और वास्तविक समय में घड़ियाल, कछुए और डॉल्फिन जैसी प्रजातियों पर नजर रखती है।
अधिकारियों के अनुसार, एक नयी स्मार्ट प्रयोगशाला अब गश्ती मार्गों का मानचित्रण कर रही है, क्षेत्र डेटा का विश्लेषण कर रही है और कमियों को चिह्नित कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, इससे प्रतिक्रिया समय में सुधार हो रहा है और अग्रिम पंक्ति के कर्मचारियों के बीच जवाबदेही मजबूत हो रही है।
उन्होंने बताया कि गंगा के किनारे स्थित आर्द्रभूमियों पर जीआईएस और रिमोट सेंसिंग का उपयोग करके निरंतर डिजिटल निगरानी रखी जा रही है।
इससे अतिक्रमणों की पहचान करने, भूमि उपयोग में बदलावों का पता लगाने और यह आकलन करने में मदद मिल रही है कि गाद हटाने या वनस्पतियों को पुनर्जीवित करने जैसे पुनर्स्थापन कार्य प्रभावी हो रहे हैं या नहीं।
परियोजना से जुड़े वैज्ञानिकों ने कहा कि नयी प्रणाली से एजेंसियों को अलग अलग हिस्सों के सर्वेक्षणों पर निर्भर रहने के बजाय, हस्तक्षेपों की अधिक सटीक योजना बनाने में मदद मिलेगी।
मिशन लुप्तप्राय प्रजातियों की गतिविधियों आदि का अध्ययन करने के लिए रेडियो और ध्वनिक टेलीमेट्री, पीआईटी टैग और जीपीएस उपकरणों की उच्च-स्तरीय ट्रैकिंग प्रणालियां भी तैनात कर रहा है।
अधिकारियों ने कहा कि अनियमित रेत खनन, औद्योगिक गतिविधियों आदि से नदी के पारिस्थितिक तंत्र पर पड़ रहे दबाव को देखते हुए व्यापक जन भागीदारी महत्वपूर्ण है।
एनएमसीजी में उप महानिदेशक नलिन कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि नयी प्रणालियां उन कमियों को दूर करने के लिए हैं जिन पर पहले ध्यान नहीं दिया गया था।
उन्होंने कहा, ‘‘प्रौद्योगिकी हमें उस लक्ष्य को मजबूत करने में मदद कर रही है जो हमेशा से हमारा मुख्य मिशन रहा है - वैज्ञानिक सटीकता और सामुदायिक भागीदारी के साथ गंगा और इसकी पारिस्थितिक विरासत की रक्षा करना।’’
भाषा अमित