हरियाणा में 600 सहायक प्राध्यापक के रिक्त पदों के लिए केवल 151 ने पास की विषय ज्ञान परीक्षा
शोभना नरेश
- 04 Dec 2025, 05:31 PM
- Updated: 05:31 PM
चंडीगढ़, चार दिसंबर (भाषा) हरियाणा के कॉलेजों के अंग्रेज़ी विभागों में सहायक प्राध्यापकों (कॉलेज काडर) के 600 से अधिक रिक्त पदों के लिए हो रही भर्ती परीक्षा में केवल 151 उम्मीदवार ही विषय संबंधी ज्ञान परीक्षा पास कर पाए हैं।
कार्यकर्ताओं और कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाए कि ‘यूजीसी-नेट’, ‘जेआरएफ’ और अन्य शीर्ष प्रतियोगी परीक्षाएं पास करने वाले अभ्यर्थी कैसे विषय ज्ञान परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिए आवश्यक न्यूनतम 35 प्रतिशत अंक भी हासिल नहीं कर सके? परिणाम मंगलवार को घोषित हुए।
इस मामले पर टिप्पणी के लिए हरियाणा लोक सेवा आयोग (एचपीएससी) के अधिकारियों से संपर्क नहीं हो सका।
हरियाणा लोक सेवा आयोग द्वारा पूर्व में आयोजित स्क्रीनिंग टेस्ट पास करने के बाद विषय ज्ञान चरण में करीब दो हजार उम्मीदवार शामिल हुए जिनमें से केवल 151 ही इस चरण में न्यूनतम 35 प्रतिशत अंक प्राप्त कर पाए। ये अब साक्षात्कार के चरण में पहुंच गए हैं।
भर्ती प्रक्रिया आठ जून को आयोजित स्क्रीनिंग टेस्ट के साथ शुरू हुई। यह 100 अंकों की बहुविकल्पीय प्रश्नों वाली एक वस्तुनिष्ठ परीक्षा थी।
राज्य भर में सरकारी नौकरी के इच्छुक उम्मीदवारों के मुद्दों को उठाने के लिए जानी जाने वाली कार्यकर्ता श्वेता ढल ने कहा कि यह "विश्वास करना मुश्किल" है कि उच्च योग्यता प्राप्त उम्मीदवारों में से अधिकांश परीक्षा में अर्हता प्राप्त करने के लिए आवश्यक 35 प्रतिशत अंक भी हासिल नहीं कर पाए।
उन्होंने कहा कि यह मुद्दा केवल सहायक प्राध्यापक पदों के लिए परीक्षा का नहीं है, बल्कि एचपीएससी द्वारा आयोजित हर परीक्षा का है।
उन्होंने प्रश्न किया, "अब रिक्तियां कैसे भरी जाएंगी, जब केवल 151 ही परीक्षा में सफल हुए हैं। साक्षात्कार के बाद अंततः कितने लोगों का चयन होगा?"
कांग्रेस नेता गीता भुक्कल ने कहा कि यह आश्चर्यजनक है कि केवल 151 अभ्यर्थी ही परीक्षा उत्तीर्ण कर पाए, जिनमें अनुसूचित जाति और अन्य आरक्षित श्रेणियों के कुछ ही अभ्यर्थी शामिल हैं।
भुक्कल ने कहा, ‘‘हरियाणा के छात्र प्रतिभाशाली हैं और इस परीक्षा में बैठने वाले कई छात्र शीर्ष विश्वविद्यालयों और संस्थानों से पढ़े हैं और उच्च योग्यता प्राप्त हैं। 35 प्रतिशत अंक भी न ला पाना आश्चर्यजनक है और इससे मूल्यांकन पद्धति पर सवाल उठते हैं।’’
भाषा शोभना