छह समुदायों को एसटी का दर्जा देने संबंधी रिपोर्ट में ऐसा कुछ भी नहीं जिससे किसी को ठेस पहुंचे: हिमंत
आशीष नरेश
- 01 Dec 2025, 05:42 PM
- Updated: 05:42 PM
गुवाहाटी, एक दिसंबर (भाषा) असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने सोमवार को कहा कि राज्य के छह समुदायों को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने पर मंत्रिसमूह की रिपोर्ट में ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे कोई वर्ग "आहत" हो।
उन्होंने दावा किया कि इसका विरोध करने वालों ने रिपोर्ट को ठीक से नहीं पढ़ा है।
अहोम, चुटिया, मोरन, मटक, कोच-राजबोंगशी और चाय जनजाति (आदिवासी) समुदायों द्वारा अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिए जाने की मांग पर मंत्री समूह की सिफारिशों वाली रिपोर्ट शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन शनिवार को विधानसभा में प्रस्तुत की गई।
नगांव जिले में एक कार्यक्रम से इतर शर्मा ने संवाददाताओं से कहा, "रिपोर्ट में ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे किसी को ठेस पहुंचे। यह सुनिश्चित करती है कि सभी समुदाय और उप-समुदाय आगे बढ़ें।"
उन्होंने कहा, "अगर सभी लोग रिपोर्ट को ठीक से पढ़ेंगे, तो उन्हें पता चल जाएगा कि किसी के साथ अन्याय नहीं हुआ है। सभी वर्गों को न्याय मिलेगा।"
शनिवार को कोकराझार स्थित बोडोलैंड क्षेत्रीय परिषद (बीटीसी) सचिवालय के सभाकक्ष में बोडोलैंड विश्वविद्यालय के छात्रों द्वारा धावा बोलने और मंत्रिमंडल द्वारा रिपोर्ट को मंज़ूरी दिए जाने के विरोध में तोड़फोड़ के बारे में पूछे जाने पर मुख्यमंत्री ने कहा, "यह रिपोर्ट शाम लगभग सात बजे विधानसभा में रखी गई थी और प्रदर्शन तीन बजे हुआ। इसका मतलब है कि प्रदर्शन रिपोर्ट पेश किए जाने से पहले हुआ था।"
शर्मा ने रविवार को कहा था कि कुछ लोग रिपोर्ट को पढ़े बिना ही उस पर टिप्पणी कर रहे हैं।
मंत्रिमंडल की बैठक के बाद एक प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा था कि अगर रिपोर्ट को "पढ़ने और समझने में कोई कठिनाई" है, तो कुछ लोगों के मन में संदेह हो सकता है।
शर्मा ने कहा, "लेकिन, अगर इसे ध्यान से पढ़ा जाए, तो कोई संदेह नहीं रहेगा। मंत्रिमंडल ने फैसला किया है कि मंत्री समूह के तीन मंत्री - रनोज पेगू, केशव महंत और पीयूष हजारिका - सीसीटीओए के प्रतिनिधियों को चर्चा के लिए आमंत्रित करेंगे और किसी भी गलतफहमी को दूर करने के लिए उनके सामने रिपोर्ट की व्याख्या करेंगे।"
असम के जनजातीय संगठनों की समन्वय समिति (सीसीटीओए) जीओएम की रिपोर्ट के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व कर रही है। समिति का दावा है कि यदि छह समुदायों को आरक्षण श्रेणी में शामिल किया गया तो मौजूदा एसटी समुदायों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
रिपोर्ट में अनुसूचित जनजातियों के लिए त्रि-स्तरीय आरक्षण प्रणाली की सिफारिश की गई है, ताकि मौजूदा आदिवासी समूहों के कोटे को प्रभावित किए बिना मांग पूरी की जा सके।
भाषा आशीष