निर्माण के लिए ऋएा लिया था, कोई कालाधन नहीं है : पीवी अनवर ने ईडी के छापे पर कहा
धीरज सुरेश
- 23 Nov 2025, 12:34 AM
- Updated: 12:34 AM
मलाप्पुरम (केरल), 22 नवंबर (भाषा) तृणमूल कांग्रेस के केरल के राज्य संयोजक पी वी अनवर ने शनिवार को कहा कि उन्होंने निर्माण कार्य के लिए केरल फाइनेंशियल कॉर्पोरेशन (केएफसी) से ऋण लिया था। उन्होंने कहा कि ऋण की कुछ राशि चुकाई नहीं गई है और इसमें कालाधन का कोई वास्ता नहीं है।
केरल के पूर्व विधायक अनवर कथित ऋण हेराफेरी के मामले की प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा उनके आवास पर की गई छापेमारी के बाद संवाददाताओं से बातचीत कर रहे थे।
पूर्व विधायक ने कहा कि उन्होंने केएफसी से कुल 9.5 करोड़ रुपये के दो ऋण लिये थे और उस रकम में से 1.5 करोड़ रुपये का इस्तेमाल दूसरे ऋण को चुकाने में किया गया और लगभग छह करोड़ रुपये चुकाए गए।
उन्होंने कहा कि केएफसी बाकी ऋण, ब्याज और जुर्माने की एवज में बड़ी राशि की मांग कर रहा था और उन्होंने मामले को एकबार में निपटाने के लिए एक निश्चित राशि का भुगतान करने की पेशकश की थी।
अनवर ने कहा, ‘‘लेकिन, केएफसी ने पेशकश को ठुकरा दिया और मैंने उसे एक पत्र भेजा जिसमें पूछा गया कि वे एकबार में मामले को निपटाने के लिए कितनी राशि का भुगतान चाहते हैं। उनके जवाब का इंतज़ार करने के दौरान ही ईडी की कार्रवाई हो गई।’’
ईडी ने शुक्रवार को अनवर के आवासों और व्यापारिक परिसरों पर छापे मारे थे।
ईडी 2015 में केरल वित्तीय निगम (केएफसी) द्वारा ‘मलमकुलम कंस्ट्रक्शन्स’ को दिये गये 7.5 करोड़ रुपये के ऋण मामले की जांच कर रहा है।
ईडी के एक बयान में कहा गया है कि बाद में, उन्हीं ‘कोलेटरल’ संपत्तियों का इस्तेमाल करते हुए, थोड़े अंतराल के भीतर पी वी आर डेवलपर्स को 3.05 करोड़ रुपये और 1.56 करोड़ रुपये के ऋण स्वीकृत किए गए, जिसके परिणामस्वरूप कुल एनपीए लगभग 22.3 करोड़ रुपये का हो गया।
‘कोलेटरल’ संपत्ति वह संपत्ति है, जिसे उधारकर्ता ऋणदाता को ऋण के लिए सुरक्षा के रूप में देता है। यदि उधारकर्ता ऋण चुकाने में विफल रहता है, तो ऋणदाता इस संपत्ति को जब्त करके अपने नुकसान की भरपाई कर सकता है।
बयान में कहा गया है कि विभिन्न व्यक्तियों के नाम पर रखे गए 15 बैंक खातों की पहचान की गई है, जो कथित तौर पर बेनामी हैं और जिनसे संदिग्ध लेन-देन हुआ है।
ईडी के अनुसार, प्रारंभिक साक्ष्य स्वीकृत निधियों के दुरुपयोग, नाममात्र शेयरधारकों और निदेशकों के इस्तेमाल और संपत्ति के संदिग्ध बेनामी स्वामित्व का संकेत देते हैं।
ईडी ने कहा, ‘‘छापेमारी के दौरान, अनवर ने स्वीकार किया कि वह ‘मलमकुलम कंस्ट्रक्शन्स’ का असली लाभार्थी मालिक है, जबकि कंपनी उसके भतीजों और चालक के नाम पर थी। उसने पुष्टि की कि ऋण राशि का उपयोग बड़े टाउनशिप प्रोजेक्ट पीवीआर मेट्रो विलेज के लिए किया गया था।’’
ईडी के अनुसार कार्रवाई के दौरान केएफसी अधिकारियों के बयानों से प्रक्रियागत चूक और बाद के ऋणों के लिए उसी संपार्श्विक का पुनः उपयोग करने का पता चला।
भाषा
धीरज