केजरीवाल की अंतरिम जमानत के मुद्दे पर ईडी ने हलफनामे के जरिये न्यायालय के समक्ष विरोध दर्ज कराया
देवेंद्र माधव
- 09 May 2024, 08:20 PM
- Updated: 08:20 PM
नयी दिल्ली, नौ मई (भाषा) प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कथित आबकारी नीति घोटाले से जुड़े धनशोधन मामले में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अंतरिम जमानत के मुद्दे पर बृहस्पतिवार को हलफनामे के जरिये उच्चतम न्यायालय में विरोध दर्ज कराया और कहा कि चुनाव में प्रचार करने का अधिकार न तो मौलिक अधिकार है और न ही संवैधानिक।
उच्चतम न्यायालय शुक्रवार को केजरीवाल की अंतरिम जमानत के मुद्दे पर फैसला सुनायेगा।
उच्चतम न्यायालय में दाखिल एक नये हलफनामे में ईडी ने कहा कि ऐसे कई उदाहरण हैं जहां राजनीतिज्ञों ने न्यायिक हिरासत में रहते हुए चुनाव लड़ा और कुछ जीते भी, लेकिन चुनाव प्रचार के लिए कभी अंतरिम जमानत नहीं दी गई।
ईडी ने कहा, ‘‘किसी भी नेता को चुनाव प्रचार के लिए अंतरिम जमानत नहीं दी गई है, भले वह चुनाव नहीं लड़ रहा हो। यहां तक कि चुनाव लड़ने वाला उम्मीदवार भी यदि हिरासत में हो तो उसे अपने खुद के प्रचार के लिए भी अंतरिम जमानत नहीं दी जाती है।’’
इसने कहा, ‘‘इस बात को ध्यान में रखना प्रासंगिक है कि चुनाव के लिए प्रचार करने का अधिकार न तो मौलिक अधिकार है, न ही संवैधानिक, यहां तक कि यह कानूनी अधिकार भी नहीं है।’’
गिरफ्तारी के खिलाफ केजरीवाल की याचिका पर सुनवाई कर रही पीठ की अध्यक्षता कर रहे न्यायमूर्ति संजीव खन्ना ने बुधवार को कहा था, “हम शुक्रवार को अंतरिम आदेश (अंतरिम जमानत पर) सुनाएंगे। गिरफ्तारी को चुनौती देने से जुड़े मुख्य मामले पर उस दिन सुनवाई भी होगी।’’
आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक केजरीवाल को 21 मार्च को गिरफ्तार किया गया था और फिलहाल वह न्यायिक हिरासत के तहत तिहाड़ जेल में बंद हैं।
एजेंसी ने अपने हलफनामे में कहा, ‘‘उपरोक्त तथ्यात्मक और कानूनी दलीलों के मद्देनजर अंतरिम जमानत के आग्रह को खारिज कर दिया जाना चाहिए क्योंकि यह कानून के स्थापित सिद्धांतों के विपरीत होगा जो संविधान की मूल विशेषता है।’’
इसने कहा, ‘‘केवल राजनीतिक चुनाव प्रचार के लिए अंतरिम जमानत देना समानता के नियम के खिलाफ होगा और भेदभावपूर्ण होगा क्योंकि प्रत्येक नागरिक का कार्य/व्यवसाय/पेशा या गतिविधि उसके लिए समान रूप से महत्वपूर्ण है।’’
ईडी ने कहा कि ऐसा समझना संभव नहीं होगा कि एक छोटे किसान या व्यापारी का काम किसी उस राजनीतिक नेता के प्रचार से कम महत्वपूर्ण है जो स्वीकार करता है कि वह चुनाव नहीं लड़ रहा है।
इसने कहा कि यदि केजरीवाल को उनकी पार्टी के लिए लोकसभा चुनावों में प्रचार करने के लिए एक राजनीतिज्ञ होने के कारण कोई अंतरिम राहत दी जाती है, तो इसमें कोई दो राय नहीं है कि जेल में बंद सभी राजनीतिज्ञ यह दावा करते हुए समान राहत की मांग करेंगे कि वे भी इस श्रेणी में आते हैं।
ईडी ने अपने 44 पृष्ठ के हलफनामे में कहा कि एक राजनीतिज्ञ एक आम नागरिक से अधिक किसी विशेष दर्जे का दावा नहीं कर सकता है और अपराध करने पर उसे किसी अन्य नागरिक की तरह ही गिरफ्तार और हिरासत में लिया जा सकता है।
इसने कहा, ‘‘यदि प्रचार अभियान के अधिकार को अंतरिम जमानत देने के आधार के रूप में माना जाता है तो यह अनुच्छेद 14 के सिद्धांतों का उल्लंघन होगा क्योंकि एक आरोपी किसान के लिए फसल कटाई अंतरिम जमानत के लिए अनुरोध करने वाला उतना ही महत्वपूर्ण कारक होगा जितना कि किसी कंपनी के आरोपी निदेशक के लिए बोर्ड बैठक या वार्षिक आम बैठक।’’
ईडी ने कहा कि केजरीवाल ने उच्चतम न्यायालय या किसी अन्य अदालत के समक्ष नियमित या अंतरिम जमानत के लिए याचिका दायर नहीं की है।
इसमें पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, आम आदमी पार्टी (आप) नेता संजय सिंह और भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) नेता के. कविता के मामलों में अदालत द्वारा पारित आदेशों का हवाला दिया गया है जिनमें अदालत ने उन्हें दिल्ली आबकारी नीति घोटाले से संबंधित धनशोधन मामले में जमानत याचिकाएं दायर करने के लिए कहा था।
पीठ में न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता भी शामिल थे। पीठ ने केजरीवाल की अंतरिम जमानत के मुद्दे पर सात मई को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
दिल्ली की एक अदालत ने मंगलवार को केजरीवाल की न्यायिक हिरासत 20 मई तक बढ़ा दी थी।
उच्च न्यायालय ने नौ अप्रैल को केजरीवाल की गिरफ्तारी को वैध ठहराया था और कहा था कि बार-बार समन जारी करने और केजरीवाल के जांच में शामिल होने से इनकार करने के बाद ईडी के पास ‘बहुत ही मामूली विकल्प’ बचा था।
यह मामला 2021-22 के लिए दिल्ली सरकार की आबकारी नीति के निर्माण और कार्यान्वयन में कथित भ्रष्टाचार और धनशोधन से संबंधित है। यह नीति अब समाप्त कर दी गयी है।
भाषा
देवेंद्र