मंत्री ने केरल में घर से निकाले गए बच्चे, उसकी मां की मदद करने वाले स्कूल शिक्षकों की प्रशंसा की
तान्या प्रशांत
- 16 Nov 2025, 05:23 PM
- Updated: 05:23 PM
कोच्चि, 16 नवंबर (भाषा) शिक्षा मंत्री वी. शिवनकुट्टी ने रविवार को उन शिक्षकों की प्रशंसा की, जिन्होंने एर्नाकुलम जिले के तिरुमाराडी में माता-पिता के बीच विवाद के कारण घर से बाहर निकाले गए कक्षा छह के छात्र और उसकी मां की सुरक्षा सुनिश्चित की।
शिवनकुट्टी ने एक फेसबुक पोस्ट में तिरुमाराडी के एक सरकारी स्कूल के शिक्षकों की सराहना की।
यह घटना तब सामने आई जब शिक्षकों को स्कूल की कक्षा में कई प्लास्टिक की शीतल पेय की बोतलें पड़ी मिलीं।
पूछताछ में पता चला कि ये बोतलें एक छात्र ने छोड़ी थीं जो रोज जूस की बोतल खरीदता था।
परामर्श के दौरान, छात्र ने शिक्षकों को बताया कि वह अपनी मां द्वारा रोज दिए जाने वाले 20 रुपये पर गुजारा करता है और उसे घर पर खाना नहीं मिलता।
आगे की पूछताछ से पता चला कि उसके माता-पिता के बीच विवाद था और उसकी दादी ने कई दिनों तक मां और बच्चे को घर में आने की अनुमति नहीं दी थी।
पिछले कुछ दिनों से बच्चा और उसकी मां घर के बाहर एक झाड़ीदार इलाके में बने एक अस्थायी बसेरे में रह रहे थे।
चाइल्डलाइन और पुलिस की मदद से शिक्षकों ने माता-पिता और दादा-दादी से बात की और सभी मुद्दों को सुलझाया।
हाल ही में बच्चे के पिता और दादी ने उसे और उसकी मां को घर में वापस आने की अनुमति दे दी।
शिवनकुट्टी ने कहा कि तिरुमाराडी के शिक्षकों ने मानवता का एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है।
उन्होंने कहा, "यह घटना दर्शाती है कि हमारे सार्वजनिक शिक्षा संस्थान पाठ्यक्रम की सीमाओं से कहीं आगे जाकर छात्रों की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने के लिए कितने प्रतिबद्ध हैं।"
उन्होंने कहा कि यह सराहनीय है कि कक्षा छह के छात्र की पीड़ा को काउंसलिंग के दौरान पहचाना गया तथा प्रधानाध्यापक और अन्य शिक्षकों द्वारा समय पर हस्तक्षेप करने से बच्चे और उसकी मां के लिए घर लौटने का सुरक्षित वातावरण तैयार हुआ।
"सार्वजनिक शिक्षा विभाग की ओर से, मैं उन सभी शिक्षकों का हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं जो दिन-रात अथक परिश्रम करते हैं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि प्रत्येक छात्र सुरक्षित रहे। आप केवल अक्षर नहीं सिखा रहे हैं—आप उनके जीवन में प्रेम और करुणा का सबसे बड़ा पाठ पढ़ा रहे हैं।"
समस्या का समाधान होने के बाद, मां और बच्चे ने स्कूल के प्रधानाध्यापक और कक्षा-शिक्षक के पास जाकर आभार व्यक्त किया।
स्थानीय प्रतिनिधियों और पंचायत अधिकारियों ने शनिवार को बच्चे के घर जाकर अपना समर्थन व्यक्त किया।
भाषा तान्या