दिल्ली उच्च न्यायालय ने ओआरएस लेबल के साथ मौजूदा स्टॉक की बिक्री का कंपनी का अनुरोध ठुकराया
धीरज नेत्रपाल
- 12 Nov 2025, 06:53 PM
- Updated: 06:53 PM
नयी दिल्ली, 12 नवंबर (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने ओआरएसएल नाम से तैयार इलेक्ट्रोलाइट पेय पदार्थों के मौजूदा स्टॉक को बेचने की अनुमति देने का अनुरोध करने वाली एक कंपनी की याचिका को ठुकरा दिया।
एफएसएसएआई ने कंपनी के उक्त पेय को ‘ओरल रिहाइड्रेशन साल्ट’ (ओआरएस) के नाम से बेचे जाने पर रोक लगा दी है।
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने कहा कि आरोप यह नहीं है कि यह उत्पाद हानिकारक है, बल्कि यह गलत ‘ब्रांडिंग’ का मामला है और वह ऐसे उत्पादों को बाजार में बने रहने की अनुमति नहीं दे सकती, क्योंकि यह मामला जनस्वास्थ्य से जुड़ा है।
पीठ ने याचिकाकर्ता कंपनी जेएनटीएल कंज्यूमर हेल्थ इंडिया प्राइवेट लिमिटेड का पक्ष रखने के लिए पेश हुए अधिवक्ता से कहा, ‘‘माफ कीजिए, हम इसकी अनुमति नहीं दे सकते। कृपया इसे (स्टॉक) वापस मंगवा लीजिए। हम इसकी अनुमति नहीं देंगे। हमें खेद है। यह मामला जनस्वास्थ्य से जुड़ा है।’’
अदालत ने कहा कि समस्या यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों में, यदि कोई बच्चा दस्त से पीड़ित है, तो आमतौर पर वे इलेक्ट्रोलाइट्स को संतुलित करने के लिए ओआरएस खरीदते हैं।
पीठ ने कहा, ‘‘आप अपने उत्पाद में इलेक्ट्रोलाइट्स भी लिख रहे हैं। इससे भ्रम पैदा होने की आशंका है। यह उन लोगों के लिए हानिकारक नहीं है जो इसे लेने के लिए स्वस्थ हैं, लेकिन यह उन लोगों के लिए हानिकारक है जो इसे लेने के लिए स्वस्थ नहीं हैं।’’
अदालत ने कहा, ‘‘ओआरएस ने हमारे जैसे गरीब देश में क्रांति ला दी है और इन क्षेत्रों में बच्चों की मृत्यु दर में कमी आई है।’’
इसने कहा कि इससे पहले यूनिसेफ इन्हें मुफ्त में वितरित करता था और यह मुद्दा नहीं है कि यह हानिकारक है या नहीं, बल्कि यह गलत ब्रांडिंग का मामला है।
न्यायालय ने केंद्र और भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) को उस मुख्य याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें प्राधिकरण के 14 और 15 अक्टूबर के आदेशों को चुनौती दी गई है।
एफएसएसएआई ने अपने आदेश में खाद्य एवं पेय पदार्थ कंपनियों को अपने लेबलिंग में ‘ओआरएस’ शब्द का इस्तेमाल करने की अनुमति तब तक के लिए रोक दी जब तक कि वे उक्त चिकित्सा मानकों को पूरा नहीं करते।
अदालत ने अब इस मामले की अगली सुनवाई के लिए नौ दिसंबर की तारीख तय की है।
भाषा धीरज