भारत को मित्र, तटस्थ के साथ-साथ मजबूत इरादों वाले राष्ट्र के रूप में देखा जाता है: जयशंकर
आशीष संतोष
- 07 May 2024, 11:07 PM
- Updated: 11:07 PM
नयी दिल्ली, सात मई (भाषा) विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार को कहा कि भारत को आज दुनिया भर में न केवल मित्र और तटस्थ के रूप में, बल्कि दृढ़ और मजबूत इरादों वाले राष्ट्र के रूप में भी देखा जाता है जो संकट की स्थितियों में अपने लोगों का ख्याल रखता है और उनकी रक्षा करता है।
जयशंकर ने दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के हंसराज कॉलेज में एक कार्यक्रम में ‘‘विकसित भारत 2047-युवाओं की आवाज’’ विषय पर बोलते हुए यह टिप्पणी की। वह यूक्रेन जैसे युद्धग्रस्त देशों से अपने नागरिकों को वापस लाने के लिए भारत द्वारा चलाए गए बचाव अभियान का जिक्र कर रहे थे।
जयशंकर ने कहा कि दुनिया भारत पर करीब से नजर रख रही है क्योंकि यह अतीत की बेड़ियों से बाहर निकल रहा है और दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर कदम बढ़ा रहा है।
विदेश मंत्री ने कहा, ‘‘फिलहाल, हम चार ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था से थोड़ा कम हैं। जल्द ही हम पांच ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचते हुए तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएंगे। जब तक हम अमृत काल तक पहुंचेंगे, मुझे विश्वास है कि भारत 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था वाला देश होगा।’’
मंत्री ने कहा कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में प्रभावशाली वृद्धि की है और इसे दुनिया के नेताओं ने स्वीकार किया है।
जयशंकर ने कहा, ‘‘आज आर्थिक प्रदर्शन के कारण हमारा सम्मान हो रहा है। भारत की प्रतिभा दुनिया के सभी क्षेत्रों में मौजूद है।’’ उन्होंने कहा कि दुनिया भारत पर नजर रख रही है कि वह आगे कैसे बढ़ेगा।
जयशंकर ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि विकसित भारत केवल लोगों को प्रेरित करने वाला नारा नहीं है, बल्कि यह पिछले 10 वर्षों में बनाई गई नींव है, जिस पर भारत के अगले 25 वर्षों का भविष्य निर्मित होगा। उन्होंने कहा, ‘‘अमृत काल के अगले 25 साल आपका भविष्य हैं। यह विकसित भारत की ओर यात्रा है और आप ही इस यात्रा को संभव बनाएंगे।’’
विदेश मंत्री ने कहा कि वह इन 25 वर्षों को ‘‘अवसर और नयी चुनौती की अवधि’’ के रूप में देखते हैं।
जयशंकर ने अर्थव्यवस्था और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में हुए विकास और वैश्विक मंच पर भारत के बढ़ते कद के बारे में कहा, ‘‘यह बदलाव उस तरह का है जैसा हमने पहले कभी नहीं देखा।’’
उन्होंने कोविड-19 महामारी से निपटने का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, ‘‘जब कोविड का प्रकोप हुआ और विश्व नेता आगे का रास्ता खोजने के लिए मिले, तो उन्हें लगा कि भारत स्थिति को संभाल नहीं पाएगा। उनके पास चिंतित होने के कारण थे। लेकिन उसी देश ने लगभग 100 देशों को टीके की आपूर्ति की।’’
जयशंकर ने देश के चंद्र मिशन का जिक्र करते हुए कहा कि भारत विश्व स्तर पर प्रौद्योगिकी नेतृत्वकर्ता के रूप में उभरा है और दुनिया पर इसकी पहली छाप चंद्रयान-3 की सफलता के साथ पड़ी, जिसपर एक फिल्म बनाने की लागत से भी कम खर्च आया।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत प्रति माह 12 अरब कैशलेस लेनदेन के साथ एक डिजिटल अर्थव्यवस्था के रूप में बढ़ रहा है, जो अमेरिका से अधिक है जहां एक वर्ष में ऐसे चार अरब लेनदेन होते हैं।
जयशंकर ने सीमा पार आतंकवाद के प्रति भारत की कतई बर्दाश्त नहीं करने की नीति के बारे में भी बात की और बालाकोट एयरस्ट्राइक का उदाहरण दिया।
उन्होंने कहा, ‘‘दुनिया आज हमें मित्र के रूप में लेकिन दृढ़ इरादे वाले राष्ट्र के रूप में देखती है। उन्होंने आतंकवाद जैसी चुनौतियों पर हमारी कार्रवाई देखी है, चाहे वह 26/11 हो या बालाकोट या चीन सीमा पर चुनौतियां हों।’’
विदेश मंत्री ने कहा, ‘‘जब कई देश आपत्ति जता रहे थे, हमने अपने हित के लिए रूस से तेल खरीदने का दृढ़ रुख अपनाया। हम दृढ़ और तटस्थ हैं।’’
भाषा आशीष